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चंबल छोड़ अपने वतन उड़ने लगे परिंदे
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चंबल नदी के किनारे रेत पर घोंसले के पास बैठा मगरमच्छ
- फोटो : ETAWAH
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चकरनगर। मौसम बदलने से चंबल सेंच्युरी से विदेशी परिंदे अपने वतन लौटने लगे हैं। नदियों के किनारे पक्षियों का कलरव थमने लगा है।
ठंडे देशों में बर्फ पड़ने से दाना-पानी के लिए दिसंबर माह से हजारों किलोमीटर दूर का सफर तय कर प्रवासी पक्षी चंबल के बीहड़ों में बहने वाली चंबल नदी में सर्दी के मौसम में ठहरते हैं। साइबेरियन पक्षियों के इलाके में आने से नदियों में रंग- बिरंगे दुर्लभ प्रजाति के पक्षी प्राकृतिक छटा को मनोहारी बना देते हैं। सर्दी के मौसम में नदियों के किनारे पंछियों के दुर्लभ नजारे आम लोगों को अपने तरफ आकर्षित कर लेते हैं। फागुन माह में गर्मी के चलते यह पक्षी समय से पहले ही अपने देशों को लौटने लगे हैं। भरेह संगम सेंच्युरी क्षेत्र में इन दिनों कार्बोनेट पक्षी बड़ी संख्या में अभी भी ठहरे हुए हैं । पेंटेड स्टार्क, रूडी शेलडक, विसलिंग टील, वार हेडेडगूज, ब्लैक नेक्ड, स्टार्क, प्लेसिस गल, ब्लैक आइविस समेत पांच हजार प्रवासी पक्षी चंबल नदी में ठहराव किए थे। अब धीरे-धीरे अपने वतन लौटने लगे हैं।
चंबल किनारे मौज-मस्ती खतरे से खाली नहीं है। मौसम में गर्माहट आते ही मगरमच्छों ने हेजिंग शुरू कर दी है । रेत में बने घोंसलों की पानी के तटों पर रहकर दिन-रात जलीय जीव रखवाली करते हैं। घोसलों के करीब आता देखकर हमलावर हो जाते हैं। चंबल सेंच्युरी क्षेत्राधिकारी हरि किशोर शुक्ला बताते हैं मगरमच्छ व घड़ियालों के लिए मौसम बेहद अनुकूल हो गया है। पिछले दिनों से नदी के रेत में हेजिंग प्रक्रिया देखने को मिल रही है। इस दौरान यह घातक जलीय जीव आक्रमक दौड़ में होते हैं। नदी के किनारे बालू में आना-जाना खतरे से खाली नहीं है। चंबल सेंच्युरी डीएफओ दिवाकर श्रीवास्तव बताते हैं कि प्रवासी पक्षी मौसम बदलने पर लौटना स्वाभाविक प्रक्रिया है। मगरमच्छ व घड़ियालों की हैजिंग शुरू हो गई है। नदी के किनारे विभागीय अमला निगरानी के लिए बढ़ा दिया है।
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ठंडे देशों में बर्फ पड़ने से दाना-पानी के लिए दिसंबर माह से हजारों किलोमीटर दूर का सफर तय कर प्रवासी पक्षी चंबल के बीहड़ों में बहने वाली चंबल नदी में सर्दी के मौसम में ठहरते हैं। साइबेरियन पक्षियों के इलाके में आने से नदियों में रंग- बिरंगे दुर्लभ प्रजाति के पक्षी प्राकृतिक छटा को मनोहारी बना देते हैं। सर्दी के मौसम में नदियों के किनारे पंछियों के दुर्लभ नजारे आम लोगों को अपने तरफ आकर्षित कर लेते हैं। फागुन माह में गर्मी के चलते यह पक्षी समय से पहले ही अपने देशों को लौटने लगे हैं। भरेह संगम सेंच्युरी क्षेत्र में इन दिनों कार्बोनेट पक्षी बड़ी संख्या में अभी भी ठहरे हुए हैं । पेंटेड स्टार्क, रूडी शेलडक, विसलिंग टील, वार हेडेडगूज, ब्लैक नेक्ड, स्टार्क, प्लेसिस गल, ब्लैक आइविस समेत पांच हजार प्रवासी पक्षी चंबल नदी में ठहराव किए थे। अब धीरे-धीरे अपने वतन लौटने लगे हैं।
चंबल किनारे मौज-मस्ती खतरे से खाली नहीं है। मौसम में गर्माहट आते ही मगरमच्छों ने हेजिंग शुरू कर दी है । रेत में बने घोंसलों की पानी के तटों पर रहकर दिन-रात जलीय जीव रखवाली करते हैं। घोसलों के करीब आता देखकर हमलावर हो जाते हैं। चंबल सेंच्युरी क्षेत्राधिकारी हरि किशोर शुक्ला बताते हैं मगरमच्छ व घड़ियालों के लिए मौसम बेहद अनुकूल हो गया है। पिछले दिनों से नदी के रेत में हेजिंग प्रक्रिया देखने को मिल रही है। इस दौरान यह घातक जलीय जीव आक्रमक दौड़ में होते हैं। नदी के किनारे बालू में आना-जाना खतरे से खाली नहीं है। चंबल सेंच्युरी डीएफओ दिवाकर श्रीवास्तव बताते हैं कि प्रवासी पक्षी मौसम बदलने पर लौटना स्वाभाविक प्रक्रिया है। मगरमच्छ व घड़ियालों की हैजिंग शुरू हो गई है। नदी के किनारे विभागीय अमला निगरानी के लिए बढ़ा दिया है।
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