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आयुर्वेदाचार्यों ने की धन्वंतरि की पूजा
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इटावा। दिवाली की शुरुआत धनतेरस से होती है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस मनाई जाती है। इस दिन धन की देवी मां लक्ष्मी, देवता कुबेर और आरोग्य का आशीर्वाद प्रदान करने वाले भगवान धन्वंतरि की विशेष पूजा का विधान है।
इस दिन खरीदारी करने को बेहद शुभ माना जाता है। लिहाजा घर में दिवाली से पूर्व शुभता लाने के लिए कुछ न कुछ नया सामान खरीदकर लाते हैं। धनतेरस के दिन प्रदोषकाल में यमराज के लिए चौमुखा दीपक मुख्य द्वार पर जलाया जाता है।
आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति से जुड़े चिकित्सक व वैद्य भगवान धन्वंतरि की पूजा अर्चना करते हैं। बुधवार को छोटी दिवाली मनाई जाएगी। यह पर्व नरक से जुड़े दोष से मुक्ति पाने के लिए शाम के समय द्वार पर दीया जलाया जाता है।
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मान्यता है कि हनुमान जी का जन्म कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को हुआ था, इसलिए उनके भक्त इस दिन विधि-विधान से जयंती मनाते हैं। इसी दिन श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध करके 16,100 कन्याओं को उसके चंगुल से मुक्त कराया था, इसलिए इसे रूप चौदस भी कहते हैं।
मान्यता है इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर उबटन लगाकर स्नान करने से रूप एवं सौंदर्य में वृद्धि होती है। इस दिन मृत्यु के देवता यमराज की पूजा होती है। घर के कोनों में दीपक जलाकर अकाल मृत्यु से मुक्ति की कामना की जाती है।
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इस दिन खरीदारी करने को बेहद शुभ माना जाता है। लिहाजा घर में दिवाली से पूर्व शुभता लाने के लिए कुछ न कुछ नया सामान खरीदकर लाते हैं। धनतेरस के दिन प्रदोषकाल में यमराज के लिए चौमुखा दीपक मुख्य द्वार पर जलाया जाता है।
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आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति से जुड़े चिकित्सक व वैद्य भगवान धन्वंतरि की पूजा अर्चना करते हैं। बुधवार को छोटी दिवाली मनाई जाएगी। यह पर्व नरक से जुड़े दोष से मुक्ति पाने के लिए शाम के समय द्वार पर दीया जलाया जाता है।
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मान्यता है कि हनुमान जी का जन्म कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को हुआ था, इसलिए उनके भक्त इस दिन विधि-विधान से जयंती मनाते हैं। इसी दिन श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध करके 16,100 कन्याओं को उसके चंगुल से मुक्त कराया था, इसलिए इसे रूप चौदस भी कहते हैं।
मान्यता है इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर उबटन लगाकर स्नान करने से रूप एवं सौंदर्य में वृद्धि होती है। इस दिन मृत्यु के देवता यमराज की पूजा होती है। घर के कोनों में दीपक जलाकर अकाल मृत्यु से मुक्ति की कामना की जाती है।