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रासायनिक खाद से बीमार हो गई खेतों की मिट्टी

Wed, 16 Oct 2019 11:48 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 16 Oct 2019 11:48 PM IST
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इटावा। रासायनिक खाद के जरूरत से ज्यादा उपयोग करने से जिले के खेतों की मिट्टी बीमार हो चुकी है। मिट्टी में उपजाऊ बनाने वाले तत्वों नाइट्रोजन और फास्फेट की मात्रा न्यूनतम स्तर पर पहुंच गई है। अगर रासायनिक खादों का इसी तरह अंधाधुंध इस्तेमाल होता रहा तो 15 से 20 साल में खेत बंजर हो जाएंगे।
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खेतों की मिट्टी में उपजाऊ तत्वों की जांच के लिए कृषि विभाग की परीक्षण प्रयोगशाला में खेतों की मिट्टी की जांच की जाती है।
वर्ष 2018-19 में अभियान चलाकर हर गांव से खेत की मिट्टी के नमूने लिए गए थे। इसमें 3400 किसानों को मृदा कार्ड दिए गए थे। किसानों को उनके खेत की मिट्टी में क्या-क्या तत्व कम हैं और कितनी व कौन से खाद डालनी चाहिए इसकी जानकारी दी गई थी।
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चालू वित्तीय वर्ष में सभी ब्लॉकों में अलग-अलग क्षेत्र से 2582 खेतों की मिट्टी की जांच करने का लक्ष्य है। अभी तक 2071 खेतों की मिट्टी की जांच कर मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनाए जा चुके हैं।
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कृषि विभाग की मृदा परीक्षण प्रयोगशाला के प्रभारी गजेंद्र सिंह ने बताया कि जिले के खेतों की मिट्टी की उर्वरक क्षमता लगातार घट रही है। पिछले दो साल में हुई मिट्टी की जांच में तो चिंता जनक परिणाम सामने आए हैं।
मिट्टी में जीवांश कार्बन नाइट्रोजन, फास्फेट और पोटाश तीन प्रमुख पोषक तत्व होते हैं। मिट्टी की जांच में जीवांश कार्बन नाइट्रोजन न्यूनतम स्तर 0.21 से 0.50 तक पहुंच गया है। अति न्यूनतम स्तर 0.20 होता है। इसके बाद मिट्टी फसल उपजाने लायक नहीं रह जाती है। फास्फेट का स्तर भी न्यूनतम स्तर 10.1 से 20.0 तक पाया गया है।
पोटास की मात्रा जरूर ठीक मिली है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार 8.5 से अधिक पीएच मान होने पर मृदा क्षरीय हो जाती है। ऐसी मिट्टी में ज्यादातर पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं। फिलहाल जिले की मिट्टी सामान्य श्रेणी में हैं और इसमें 6.5 से 5.5 तक कुछ पोषक तत्व उपलब्ध हैं। किंतु अगर हरी खाद और गोबर खाद का उपयोग न किया गया तो मिट्टी बेकार हो जाएगी।
गजेंद्र सिंह ने बताया कि किसानों को फसल चक्र में कम से कम एक बार हरी खाद का इस्तेमाल करना चाहिए। इसके अलावा कम से कम तीन वर्ष में गोबर की खाद खेत में जरूर डालनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पशुधन की उपेक्षा के कारण किसानों के साथ खेतों की हालत खराब हुई है।

बताया कि गोबर की खाद में मिट्टी को पोषक बनाने वाले तत्व सबसे ज्यादा होते हैं। उन्होंने बताया कि जिन किसानों को मृदा परीक्षण कार्ड मिले हैं, उनमें दर्ज तत्वों के हिसाब से ही रासायनिक खाद का इस्तेमाल करें। इसके लिए अपने ब्लॉक में कृषि अधिकारी से जानकारी ले सकते हैं।
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