{"_id":"6ab6b40a20236c21c8094f2a","slug":"adopting-ai-and-sensor-technology-is-essential-for-sustainable-farming-etawah-news-c-216-1-etw1004-150271-2026-09-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Etawah News: टिकाऊ खेती के लिए एआई और सेंसर तकनीक अपनाना जरूरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Etawah News: टिकाऊ खेती के लिए एआई और सेंसर तकनीक अपनाना जरूरी
विज्ञापन
फोटो 01:::ऑनलाइन संगोष्ठी में प्रस्तुतीकरण देते पूर्व अधिष्ठाता डॉ. एनके शर्मा। स्रोत-स्वयं
इटावा। कृषि इंजीनियरिंग कॉलेज के पूर्व अधिष्ठाता डॉ. एनके शर्मा ने कहा कि टिकाऊ खेती के लिए आधुनिक तकनीक को अपनाना समय की जरूरत है। उन्होंने तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में ऑनलाइन प्रस्तुतीकरण के दौरान कृषि क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), मशीन लर्निंग, आईओटी और सेंसर नेटवर्क की उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डाला।
डॉ. एनके शर्मा ने युवा शोधार्थियों से कहा कि अपने शोध कार्यों में आधुनिक तकनीकों का समावेश करें और परंपरागत कृषि से आगे बढ़कर आधुनिक कृषि तकनीकों पर ध्यान केंद्रित करें। शोध और नवाचार के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। कहा कि वर्ष 2050 तक भारतीय आबादी के भरण-पोषण के लिए 60 प्रतिशत सरप्लस भोजन की जरूरत होगी।
कहा कि इसकी पूर्ति नवीन तकनीकों को अपनाए बिना केवल परंपरागत खेती के माध्यम से संभव नहीं होगी। इसलिए कृषि उत्पादन बढ़ाने और खेती को टिकाऊ बनाने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग आवश्यक है। संगोष्ठी के तृतीय तकनीकी सत्र की अध्यक्षता डॉ. संजय सिंह ने की। तीन दिवसीय शिक्षाविद संगोष्ठी का आयोजन गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत के मुख्य संरक्षण में किया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
डॉ. एनके शर्मा ने युवा शोधार्थियों से कहा कि अपने शोध कार्यों में आधुनिक तकनीकों का समावेश करें और परंपरागत कृषि से आगे बढ़कर आधुनिक कृषि तकनीकों पर ध्यान केंद्रित करें। शोध और नवाचार के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। कहा कि वर्ष 2050 तक भारतीय आबादी के भरण-पोषण के लिए 60 प्रतिशत सरप्लस भोजन की जरूरत होगी।
विज्ञापन
कहा कि इसकी पूर्ति नवीन तकनीकों को अपनाए बिना केवल परंपरागत खेती के माध्यम से संभव नहीं होगी। इसलिए कृषि उत्पादन बढ़ाने और खेती को टिकाऊ बनाने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग आवश्यक है। संगोष्ठी के तृतीय तकनीकी सत्र की अध्यक्षता डॉ. संजय सिंह ने की। तीन दिवसीय शिक्षाविद संगोष्ठी का आयोजन गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत के मुख्य संरक्षण में किया जा रहा है।
विज्ञापन