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जलभराव: लाइलाज समस्या की दवा नहीं

Tue, 10 Jul 2012 12:00 PM IST
Etawah
Etawah Updated Tue, 10 Jul 2012 12:00 PM IST
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इटावा। अभी मानसून के पानी बरसने की शुरूआत ही हुई कि शहर में जलभराव की समस्या सिर चढ़कर बोलने लगी। मानसून के दौर में उत्पन्न होने वाले हालातों को लेकर लोग चिंतित हो उठे। जलभराव की यह समस्या कोई नई नहीं है। हर साल उभरती है। लोग इस समस्या के चलते घरों में कैद होने को विवश हो जाते हैं। हालात तब अधिक बिगड़ जाते हैं जब लगातार कई दिन तक बारिश का दौर जारी रहने पर पानी लोगों के घरों में घुस जाता है। हर वर्ष नालों की सफाई कराई जाती है बावजूद इसके लोगों को इस समस्या से छुटकारा नहीं मिल पा रहा है। जलभराव की कई वजह हैं लेकिन उन पर ध्यान नहीं दिया गया। फलत: लोगों को इस समस्या से जूझना विवशता है। अमर उजाला जलभराव के कारणों को शहर के जनप्रतिनिधियों और अफसरों के सामने पेश कर रहा है, ताकि इसके समाधान के प्रयास तेज हो सकें।
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कारण-1
जलभराव की प्रमुख वजह नवविकसित क्षेत्रों में जलनिकासी के कोई इंतजाम न होना है। आज भी शहर के कई क्षेत्र ऐसे हैं जहां पर घरों से निकलने वाला पानी वहीं पर स्थित तलैया में भरता है। मोतीझील, रामनगर, आजादनगर, फ्रेंड्स कालोनी में बिजली दफ्तर के पीछे, शकुंतलानगर, जयभारत कालोनी, चांदमियां ईंट-भट्ठा के पास, बंगाली कालोनी, सूतमिल के पीछे, कोकपुरा में बनी तलैयों में ही पानी भरता है। बरसात के समय यह तलैया ओवरफ्लो हो जाती है। लिहाजा पानी गलियों से होता हुआ घरों में भर जाता है। आज तक इन क्षेत्रों में जलनिकासी के कोई इंतजाम नहीं किए जा सके। यदि तलैयों के स्थान पर नाली बनाकर पानी की निकासी करा दी जाए तो काफी हद तक समस्या दूर हो सकती है।
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कारण-2
जलभराव की एक वजह नालों पर अवैध अतिक्रमण है। जनपद में छोटे बड़े सभी नाले अतिक्रमण की जद में है। कहीं अस्थाई तो कहीं स्थाई अतिक्रमण है। कहीं कहीं पर बड़े नालों का स्वरूप काफी सिकुड़ गया है। उन स्थानों पर गंदगी जमा हो जाती है और नाले को चोक कर देती है। बेशक हर वर्ष नालों की सफाई कराई जाती हैं लेकिन कुछ दिन बाद फिर पुराने हालात हो जाते हैं। उससे पानी की निकासी बाधित हो जाती है। फलस्वरूप बरसात का पानी गलियों से होता हुआ घरों में घुसने लगता है।
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कारण- 3
जलनिकासी के लिए बने नालों का ढाल भी सही नहीं है। फलस्वरूप पानी की निकासी सही ढंग से नहीं हो पाती है। बरसात के दिनों में पानी उल्टा लौटने लगता है। ऐसा नहीं है कि सभी नालों का ढाल बेढब है बल्कि पुराने समय के बने नालों ठीक है जो नए नाले बनाए गए हैं उनके निर्माण में ढलान सही नहीं है। इसके अलावा कुछ नाले ऐसे हैं जहां बरसात के दिनो में क्षमता से अधिक पानी आता है। गांधीनगर में जो नाला बनाया गया था उसकी क्षमता मुहल्ले के अनुरूप रखी गई थी लेकिन बाद में इस नाले में फोरलेन हाइवे के साथ साथ अशोकनगर शहरिया मुहल्ले का पानी भी छोड़ा जाने लगा लिहाजा गांधीनगर के लोगों को इस समस्या से जूझना पड़ता है।

कारण-4
जलभराव क ी समस्या की एक अहम वजह पॉलीथिन का प्रयोग है। पॉलीथिन सड़कों के जरिए नालियों में और नालियों के जरिए बड़े नालों में पहुंचकर एकत्र होती रहती है। पॉलीथिन का प्रयोग तो बंद नहीं कराया जा सका लेकिन यह पॉलीथिन नालियों के जरिए नालों में न पहुंचे इसके इंतजाम किए जाने चाहिए। नालियों की नियमित रूप से सफाई नहीं हो पाती है। यदि नालियां नियमित रूप से साफ की जाती रहें तो पॉलीथिन को नालियों से नालों में पहुंचने से रोका जा सकता है।

कारण-5
जलभराव की सबसे विकट समस्या नवविकसित कालोनियों की है। लाइन पार क्षेत्र में हो या फिर लाइन के इस पार। खेतों में प्लाटिंग करके कालोनियां तो विकसित कर दी जाती हैं परंतु उनमें जलनिकासी के प्रबंध नहीं किए जाते हैं। जबकि उन कालोनियों में सड़कों व नालियों का निर्माण करके दिया जाना चाहिए। कालोनी का पानी कहां निकलेगा इसकी व्यवस्था नहीं है। प्लाटिंग करने वाले प्लाट काटकर उनको बेचकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर लेते हैं। खरीददार भी इस ओर ध्यान नहीं देते हैं। नगर में तमाम ऐसी कालोनियां हैं जहां पर सही रास्ता तक नहीं है।

कारण-6
कुछ स्थानों पर नालों को नालियों से जोड़ देना भी जलभराव का अहम कारण है। पूर्व में नगर पालिका ने नगर में कई ऐसे नाले बनवाए जिनकी शुरूआत तो ठीक हुई लेकिन नाले का अंतिम छोर बड़े नाले के बजाय नाली में कर दिया गया। यह स्थिति हास्यास्पद ही मानी जाएगी। बड़े नाले का पानी छोटी नाली के जरिए कैसे निकलेगा। उदाहरण स्वरूप पक्का तालाब चौराहे पर बने बड़े नाले को छोटे नाली में जोड़ दिया गया।

सरकार के स्तर पर हों प्रयास
जलभराव शहर की गंभीर समस्या है। खासकर लाइनपार क्षेत्र वासियों के लिए तो यह समस्या बवाले जान बनी है। यह क्षेत्र नगरपालिका की उपेक्षा का शिकार रहा। इस क्षेत्र में बेतरतीब तरीके से कालोनियां निर्मित हुई। अब यहां की समस्याएं गंभीर हो गई हैं। इसके लिए सरकार के स्तर पर प्रयास की जरूरत हैं-अशोक दुबे, पूर्व विधायक भाजपा

समय से पहले नहीं दिया जाता ध्यान
जलभराव की समस्या के विकट होने का प्रमुख कारण उस पर ध्यान नहीं दिया जाना है। जब बाढ़ आती है तब अधिकारी जागते हैं। जलभराव होने लगता है तब नगरपालिका के लोगों को बचाव करना सूझता है। बरसात के तीन चार माह होते हैं। यदि शेष माह में इसके निदान के उपाय खोजे नहीं जाते-उदयभानसिंह यादव, जिला उपाध्यक्ष कांग्रेस

नगर पालिका के चेयरमैनों ने नहीं दिया ध्यान
जलभराव की समस्या के लिए अब तक रहे चेयरमैन गंभीर नहीं रहे। उनके द्वारा इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया। लाइनपार क्षेत्र में नगर पालिका की सुविधाओं का अभाव आज भी बरकरार है। अब नए चेयरमैन बने हैं। नया बोर्ड बना है तो उनसे उम्मीद करते हैं कि शहर की इस समस्या पर ध्यान दें-जितेंद्र बौद्ध जिलाध्यक्ष बसपा

नगर में जलभराव क ी समस्या के निदान के लिए जो भी संभव होगा उसको कराया जाएगा। जिन जिन क्षेत्रों में जल भराव की समस्या उभरती है, उन क्षेत्रों को चिह्नित कराया जाएगा। वहां पर समस्या के निदान के लिए प्रयास किए जाएंगे। जनता को सुविधाएं उपलब्ध कराना ही उनकी प्राथमिकता होगी-कुलदीप गुप्ता संटू, नवनिर्वाचित चेयरमैन


जलभराव की समस्या न उभरे इसके लिए नालों की सफाई करा दी गई है। जिन क्षेत्रों में नालों के जरिए पानी की निकासी होती है उन क्षेत्रों में जलभराव नहीं होगा, ऐसी उम्मीद है। इसके इतर जहां पर जलनिकासी के इंतजाम नहीं हैं वहां के लिए पंप के जरिए पानी निकालने की चार टीमें बना दी गई हैं। इस समस्या के स्थाई निदान के लिए नवगठित बोर्ड के समक्ष प्रस्ताव रखेंगे-जनार्दन राय, अधिशाषी अधिकारी नगर पालिका इटावा।
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