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मेगा लोक अदालत से कम हुआ कोर्ट का बोझ
Etawah
Updated Tue, 09 Dec 2014 05:30 AM IST
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इटावा। जिला एवं सत्र न्यायाधीश रवींद्रनाथ कक्कड़ ने बताया कि शनिवार को आयोजित की गई मेगा लोक अदालत जिले में सफल रही है। एक ही दिन में विभिन्न प्रकार के 1,09,758 प्रकरणों का निराकरण किया गया। 7.11 करोड़ के सेटलमेंट हुए है। इससे आयोजन से अदालतों का बोझ काफी हद तक कम हो गया है। अब क ोर्ट को संगीन मामलों में उचित निर्णय देने के लिए पर्याप्त समय मिल जाएगा। श्री कक्कड़ ने सोमवार क ो अपने चैंबर में मीडिया से मुलाकात की।
डीजे ने बताया कि मेगा लोक अदालत में बैंक, बीमा, बिजली, परिवहन, आपराधिक, क्लेम आदि से संबंधित 1,09,758 प्रकरणों का निराकरण किया गया है। अदालत के सहयोग से 7.11 करोड़ रुपये के सेटलमेंट किए गए है। उन्होंने कहा कि प्रकरण दाखिल करने तथा फै सले में सालों का समय लग जाता है। लोगों को तो न्याय मिलने में देरी होती ही है साथ अदालत का कीमती समय बर्बाद हो जाता है। सबसे अच्छी बात तो यह है कि अदालत द्वारा निर्णय दिए जाने से दोनों पक्ष संतुष्ट नहीं होते। मेगा लोक अदालतों में प्रकरणों को आपसी सुलह-समझौते से सुलझाया जाता है। इसलिए कोई भी पक्ष असतुंष्ट नही रहता है। डीजे ने बताया कि लोक अदालत को सफल बनाने के लिए सबसे बड़ा काम निराकरण करने योग्य प्रकरणों की पहचान करने का होता है, इसके बाद सभी को समन पहुंचाने होते है। तीसरे फेस में लोक अदालत का प्रचार-प्रसार करना होता है। मेगा लोक अदालत को सफल बनाने में जिलाधिकारी, एसएसपी, विद्युत विभाग के अधीक्षण अभियंता, सभी 13 बैंक ो के मैनेजर्स, एलडीएम, फोरेस्ट, परिवहन विभाग का अच्छा सहयोग मिला है। डीजे ने सभी का आभार व्यक्त किया है। इस अवसर पर अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम भोपाल सिंह, एसीजेएम अभय प्रताप सिंह भी उपस्थित थे।
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डीजे ने बताया कि मेगा लोक अदालत में बैंक, बीमा, बिजली, परिवहन, आपराधिक, क्लेम आदि से संबंधित 1,09,758 प्रकरणों का निराकरण किया गया है। अदालत के सहयोग से 7.11 करोड़ रुपये के सेटलमेंट किए गए है। उन्होंने कहा कि प्रकरण दाखिल करने तथा फै सले में सालों का समय लग जाता है। लोगों को तो न्याय मिलने में देरी होती ही है साथ अदालत का कीमती समय बर्बाद हो जाता है। सबसे अच्छी बात तो यह है कि अदालत द्वारा निर्णय दिए जाने से दोनों पक्ष संतुष्ट नहीं होते। मेगा लोक अदालतों में प्रकरणों को आपसी सुलह-समझौते से सुलझाया जाता है। इसलिए कोई भी पक्ष असतुंष्ट नही रहता है। डीजे ने बताया कि लोक अदालत को सफल बनाने के लिए सबसे बड़ा काम निराकरण करने योग्य प्रकरणों की पहचान करने का होता है, इसके बाद सभी को समन पहुंचाने होते है। तीसरे फेस में लोक अदालत का प्रचार-प्रसार करना होता है। मेगा लोक अदालत को सफल बनाने में जिलाधिकारी, एसएसपी, विद्युत विभाग के अधीक्षण अभियंता, सभी 13 बैंक ो के मैनेजर्स, एलडीएम, फोरेस्ट, परिवहन विभाग का अच्छा सहयोग मिला है। डीजे ने सभी का आभार व्यक्त किया है। इस अवसर पर अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम भोपाल सिंह, एसीजेएम अभय प्रताप सिंह भी उपस्थित थे।
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