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इटावा कांड गर्माया, 4 परिवारों ने गांव छोड़ा
इटावा/लखनऊ
Updated Fri, 22 Mar 2013 12:53 PM IST
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उत्तरप्रदेश के इटावा जिले में जाति विशेष के लोगों की पिटाई और उनका मुंह काला करके गांव में घुमाने का मुद्दा गर्माने लगा है। बुधवार को न सिर्फ मामला विधानमंडल के दोनों सदनों में गूंजा, दहशतजदा चार परिवार गांव से पलायन भी कर गए हैं।
उधर, दबंगों के परिजनों के दबाव में आई पुलिस ने सभी आरोपियों को थाने से ही जमानत पर रिहा कर दिया। संसदीय कार्यमंत्री ने कहा कि सरकार इस घटना को गंभीरता से ले रही है। दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी।
गौर हो कि गांव संतोषपुर इटगांव में बहुसंख्यक जाति विशेष के 30-40 लोगों ने सामूहिक रूप से शिवकुमार वाजपेयी के घर पर धावा बोल दिया। हमलावरों ने घर पर मौजूद उनकी पत्नी उर्मिला, साले का पुत्र कुलदीप और उसके साथ रह रही महिला को पीटा और बंधक बना लिया।
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इसके बाद हमलावरों ने चंद्रमहेश भटेले (70) और रास्ते में गांव के ही सनी बाजपेई को घर जाते समय पकड़ लिया। पांचों को कमरे में बंद कर लाठी-डंडों से पीटा।
इसी बीच पहुंचे शिवकुमार को भी कमरे में बंदकर बेरहमी से पीटा। इसके बाद उर्मिला, चंद्रमहेश और कुलदीप के मूंह पर कालिख पोती। गले में जूता-चप्पलों की माला पहनाकर उन्हें पूरे गांव में घुमाया। गांव के कई लोगों ने बच-बचाकर पुलिस को बार-बार सूचना दी, लेकिन पुलिस घंटों चुप्पी साधे रही।
तीन घंटे बाद मौके पर पहुंची पुलिस चंद्रमहेश को छोड़कर अन्य पांच लोगों को थाने ले आई। बाद में कुलदीप और एक महिला को भगा दिया। अन्य तीन का मेडिकल परीक्षण कराया गया। घटना के छह घंटे बाद आईजी एसके गुप्ता के निर्देश पर एसएसपी राजेश मोदक मौके पर पहुंचे।
हमले की वजह गांव में बाहरी महिला को ले आना बताया गया है। इससे पहले हमलावर बिरादरी की एक लड़की को उत्पीड़ित जाति का एक युवक भगा ले गया था। तभी से हमलावरों में गुस्सा बना हुआ था। शिवकुमार और चंद्रमहेश ने ग्राम प्रधान सुशील यादव पर उकसाने का आरोप लगाते हुए ओमप्रकाश यादव, विक्रम यादव, राजबहादुर यादव, पुष्पेंद्र यादव, शिवपाल यादव, भारतसिंह यादव, गुड्डू यादव आदि के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है।
दहशतजदा परिवारों ने गांव छोड़ा
दहशतजदा दुर्गेश मिश्रा, सुभाष मिश्रा तथा गिरजेश मिश्रा अपने घरों में ताले डालकर परिवार के साथ गांव से पलायन कर गए हैं। उत्पीड़न के शिकार परिवारों ने बताया दबंगों से धमकियां मिलने की वजह से उन्होंने यह फैसला किया है।
उधर, दबंगों के परिजनों ने देर रात सिविल लाइन थाने क घेराव करके जमकर बवाल किया। दबाव में आए पुलिस अफसरों ने निर्णय लेकर हिरासत में लिए गए सभी आरोपियों को थाने से ही जमानत देकर रिहा कर दिया।
विधानमंडल के दोनों सदनों में गूंजा इटावा कांड
बुधवार को विधानमंडल के दोनों सदनों में ये मामला गूंजा। विधान परिषद में प्रश्न प्रहर खत्म होते ही नेता प्रतिपक्ष नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि इस कृत्य को अंजाम देने वाले ग्राम प्रधान सुशील यादव और अन्य लोग समाजवादी पार्टी से जुड़े हैं।
नसीमुद्दीन बोल ही रहे थे कि बसपा सदस्य नारेबाजी करते हुए वैल में आ गए। विधान सभा में भाजपा और बसपा ने कार्यस्थगन प्रस्ताव के जरिये इटावा की घटना को उठाते हुए इसे मानवता को शर्मसार करने वाला बताया।
भाजपा के सुरेश खन्ना और नेता प्रतिपक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि एक लड़का और एक लड़की साथ कहीं चले गए थे। उसी से नाराज होकर एक जाति विशेष के लोगों ने सनी वाजपेयी, शिवकुमार वाजपेयी व अन्य लोगों के घरों पर हमला बोल दिया।
विधानसभा में संसदीय कार्यमंत्री मो. आजम खां ने कहा कि यह घटना काफी गंभीर है। निंदनीय भी है। सरकार पूरी गंभीरता से इसे ले रही है। जांच होगी। जो भी दोषी होंगे उनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जाएगी।
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उधर, दबंगों के परिजनों के दबाव में आई पुलिस ने सभी आरोपियों को थाने से ही जमानत पर रिहा कर दिया। संसदीय कार्यमंत्री ने कहा कि सरकार इस घटना को गंभीरता से ले रही है। दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी।
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गौर हो कि गांव संतोषपुर इटगांव में बहुसंख्यक जाति विशेष के 30-40 लोगों ने सामूहिक रूप से शिवकुमार वाजपेयी के घर पर धावा बोल दिया। हमलावरों ने घर पर मौजूद उनकी पत्नी उर्मिला, साले का पुत्र कुलदीप और उसके साथ रह रही महिला को पीटा और बंधक बना लिया।
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इसके बाद हमलावरों ने चंद्रमहेश भटेले (70) और रास्ते में गांव के ही सनी बाजपेई को घर जाते समय पकड़ लिया। पांचों को कमरे में बंद कर लाठी-डंडों से पीटा।
इसी बीच पहुंचे शिवकुमार को भी कमरे में बंदकर बेरहमी से पीटा। इसके बाद उर्मिला, चंद्रमहेश और कुलदीप के मूंह पर कालिख पोती। गले में जूता-चप्पलों की माला पहनाकर उन्हें पूरे गांव में घुमाया। गांव के कई लोगों ने बच-बचाकर पुलिस को बार-बार सूचना दी, लेकिन पुलिस घंटों चुप्पी साधे रही।
तीन घंटे बाद मौके पर पहुंची पुलिस चंद्रमहेश को छोड़कर अन्य पांच लोगों को थाने ले आई। बाद में कुलदीप और एक महिला को भगा दिया। अन्य तीन का मेडिकल परीक्षण कराया गया। घटना के छह घंटे बाद आईजी एसके गुप्ता के निर्देश पर एसएसपी राजेश मोदक मौके पर पहुंचे।
हमले की वजह गांव में बाहरी महिला को ले आना बताया गया है। इससे पहले हमलावर बिरादरी की एक लड़की को उत्पीड़ित जाति का एक युवक भगा ले गया था। तभी से हमलावरों में गुस्सा बना हुआ था। शिवकुमार और चंद्रमहेश ने ग्राम प्रधान सुशील यादव पर उकसाने का आरोप लगाते हुए ओमप्रकाश यादव, विक्रम यादव, राजबहादुर यादव, पुष्पेंद्र यादव, शिवपाल यादव, भारतसिंह यादव, गुड्डू यादव आदि के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है।
दहशतजदा परिवारों ने गांव छोड़ा
दहशतजदा दुर्गेश मिश्रा, सुभाष मिश्रा तथा गिरजेश मिश्रा अपने घरों में ताले डालकर परिवार के साथ गांव से पलायन कर गए हैं। उत्पीड़न के शिकार परिवारों ने बताया दबंगों से धमकियां मिलने की वजह से उन्होंने यह फैसला किया है।
उधर, दबंगों के परिजनों ने देर रात सिविल लाइन थाने क घेराव करके जमकर बवाल किया। दबाव में आए पुलिस अफसरों ने निर्णय लेकर हिरासत में लिए गए सभी आरोपियों को थाने से ही जमानत देकर रिहा कर दिया।
विधानमंडल के दोनों सदनों में गूंजा इटावा कांड
बुधवार को विधानमंडल के दोनों सदनों में ये मामला गूंजा। विधान परिषद में प्रश्न प्रहर खत्म होते ही नेता प्रतिपक्ष नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि इस कृत्य को अंजाम देने वाले ग्राम प्रधान सुशील यादव और अन्य लोग समाजवादी पार्टी से जुड़े हैं।
नसीमुद्दीन बोल ही रहे थे कि बसपा सदस्य नारेबाजी करते हुए वैल में आ गए। विधान सभा में भाजपा और बसपा ने कार्यस्थगन प्रस्ताव के जरिये इटावा की घटना को उठाते हुए इसे मानवता को शर्मसार करने वाला बताया।
भाजपा के सुरेश खन्ना और नेता प्रतिपक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि एक लड़का और एक लड़की साथ कहीं चले गए थे। उसी से नाराज होकर एक जाति विशेष के लोगों ने सनी वाजपेयी, शिवकुमार वाजपेयी व अन्य लोगों के घरों पर हमला बोल दिया।
विधानसभा में संसदीय कार्यमंत्री मो. आजम खां ने कहा कि यह घटना काफी गंभीर है। निंदनीय भी है। सरकार पूरी गंभीरता से इसे ले रही है। जांच होगी। जो भी दोषी होंगे उनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जाएगी।