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प्रतिकूल मौसम से प्रभावित हुई गेहूं की पैदावार

Mon, 11 Apr 2016 11:16 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो एटा
अमर उजाला ब्यूरो एटा Updated Mon, 11 Apr 2016 11:16 PM IST
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Wheat yields were affected by adverse weather
प्रतिकूल मौसम से प्रभावित हुई गेहूं की पैदावार - फोटो : अमर उजाला
 गेहूं की फसल के लिए प्रतिकूल रहे मौसम की वजह से पैदावार बुरी तरह से प्रभावित हुई है। क्रॉप कटिंग के बाद कृषि विभाग ने अपनी गेहूं फसल की पैदावार के जो आंकड़े जारी किए हैं, वह काफी चौंकाने वाले हैं। विभाग की ओर से की गई क्रॉप कंटिंग में गेहूं की पैदवार 35 से 36 क्ंिवटल प्रति हेक्टेयर है। यह स्थिति तब है, जब कृषि विभाग अपनी फसलें तैयार करने में नई-नई तकनीकों का इस्तेमाल करता है।
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बदलते मौसम के मिजाज का असर गेहूं की फसल भी पड़ा है। इस कारण से फसल की पैदावार में भी कमी आई है। विभागीय अधिकारियों की मानें तो साधारण किसानों को गेहूं की पैदावार 31 से 32 क्विंटल प्रति हेक्टेयर ही मिल पा रही है। इसके चलते जिले में गेहूं की पैदावार 20 से 25 प्रतिशत तक प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। गेहूं की पैदावार के असली आंकड़े प्रशासन द्वारा जारी की जाने वाली क्रॉप कटिंग के आंकड़ों में सामने आएंगे। इसके लिए एडीएम वित्त एवं राजस्व राजेंद्र कुमार ने टीमें गठित कर दी हैं। जो एक सप्ताह के अंदर जिले के अलग-अलग क्षेत्रों से गेहूं की पैदावार के आंकड़े जुटाएंगी। जिला कृषि अधिकारी डॉ. सर्वेश कुमार यादव की मानें तो गेहूं की बुवाई से लेकर कटाई तक फसल के लिए मौसम अनुकूल नहीं रहा। सर्दी की अवधि कम होने की वजह से गेहूं की बाली जल्दी निकल आई। इसकी वजह से पैदावार प्रभावित हुई है। कृषि विभाग द्वारा तैयार गेहूं की फसल में औसतन 45 क्विंटल प्रति हेक्टेयर पैदावार निकलनी चाहिए, लेकिन इस बार पैदावार 35 से 36 हेक्टेयर प्रति क्विंटल रही है। विभाग के अनुमान के मुताबिक किसानों को इस बार गेहूं की पैदावार 32 क्विंटल तक होना की आंशका है।
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थ्रेसिंग में भी मौसम बन रहा बाधा
तेज हवाओं के साथ आसमान में बादलों की आवाजाही से किसान परेशान है। आंधी बारिश की आशंका को देखते हुए किसानों ने गेहूं की कटाई तेज कर दी है। जिले में अभी भी 60-65 प्रतिशत फसल खेतों में खड़ी है। वहीं, तेज हवाओं के चलने से गेहूं की थ्रेसिंग प्रभावित हो रही है। किसानों का कहना है कि तेज हवा से भूसा काफी दूर गिर रहा है। इसकी वजह से थ्रेसिंग नहीं कराई जा रही है। किसान हवा रुकने का इंतजार कर रहे हैं।
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