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अनोखी श्रद्धा: यहां पूजी जाती हैं सिरकटी माता
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मुरकुटी मैया मंदिर ।
- फोटो : ETAH
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एटा। खंडित प्रतिमा का पूजन निषेध माना जाता है। लेकिन सदर तहसील क्षेत्र के गांव गिरौरा में सिरकटी माता की प्रतिमा लोगों में आस्था का केंद्र है। खासतौर से नवरात्र में यहां दूर-दूर से श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए आते हैं। मंदिर का नाम ही मुरकटिया माता मंदिर रख दिया गया है।
मंदिर के महंत सुखदेवानंद महाराज बताते हैं कि बहुत पहले कासगंज के एक राजा हाथी पर सवार होकर घूमने आए हुए थे। इसी दौरान हाथी झाड़ियों के बीच निकले चकरोड पर यहीं बैठ गया। महावत ने उसे उठाने का काफी प्रयास किया, लेकिन वह नहीं उठा। जिसके बाद राजा रात में यहीं रुके थे। देवी मां ने उन्हें सपना देकर मंदिर बनाने का आदेश दिया।
जिस पर राजा ने अगले ही दिन इस स्थान पर खोदाई शुरू कराई। खोदाई के दौरान देवी मां की प्रतिमा निकली, लेकिन उसका सिर कट गया। प्रतिमा को यहीं स्थापित किया गया और सिर एक ओर रख दिया गया। यह भी कहा जाता है कि पास के गांव दतेई के शरारती तत्व मंदिर से मां का सिर उठाकर ले जाते थे, जो अगले दिन स्वयं मंदिर में ही मिलता था। महंत बताते हैं कि मुरकटिया मइया के दरबार में यूपी से ही नहीं अन्य प्रदेशों से भी भक्त दर्शन के लिए आते हैं।
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ऐसे पहुंचे मंदिर
मंदिर एटा जिला मुख्यालय से करीब 10 किमी दूर एटा-कासगंज मार्ग पर है। रोडवेज बस स्टैंड से ऑटो, प्राइवेट बस आदि के जरिए मंदिर तक आसानी से पहुंचा जा सकता है।
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मंदिर के महंत सुखदेवानंद महाराज बताते हैं कि बहुत पहले कासगंज के एक राजा हाथी पर सवार होकर घूमने आए हुए थे। इसी दौरान हाथी झाड़ियों के बीच निकले चकरोड पर यहीं बैठ गया। महावत ने उसे उठाने का काफी प्रयास किया, लेकिन वह नहीं उठा। जिसके बाद राजा रात में यहीं रुके थे। देवी मां ने उन्हें सपना देकर मंदिर बनाने का आदेश दिया।
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जिस पर राजा ने अगले ही दिन इस स्थान पर खोदाई शुरू कराई। खोदाई के दौरान देवी मां की प्रतिमा निकली, लेकिन उसका सिर कट गया। प्रतिमा को यहीं स्थापित किया गया और सिर एक ओर रख दिया गया। यह भी कहा जाता है कि पास के गांव दतेई के शरारती तत्व मंदिर से मां का सिर उठाकर ले जाते थे, जो अगले दिन स्वयं मंदिर में ही मिलता था। महंत बताते हैं कि मुरकटिया मइया के दरबार में यूपी से ही नहीं अन्य प्रदेशों से भी भक्त दर्शन के लिए आते हैं।
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ऐसे पहुंचे मंदिर
मंदिर एटा जिला मुख्यालय से करीब 10 किमी दूर एटा-कासगंज मार्ग पर है। रोडवेज बस स्टैंड से ऑटो, प्राइवेट बस आदि के जरिए मंदिर तक आसानी से पहुंचा जा सकता है।