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मजिस्ट्रेटों की जांच में पालिका के तीन और काम निरस्त

Sun, 01 Aug 2021 05:36 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Sun, 01 Aug 2021 05:36 PM IST
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Three more works of the municipality canceled in the investigation of magistrates
एटा। मजिस्ट्रेटों द्वारा की गई जांच में पालिका के तीन और काम निरस्त कर दिए गए हैं। इन्हें बिना जरूरत के प्रस्तावों में शामिल कर टेंडर कर दिए गए थे। इसके अलावा एक गली मार्ग के इंटरलॉकिंग निर्माण में पुरानी ईंट का प्रयोग मिला है, जिसमें ईंट के मूल्य की कटौती के आदेश दिए गए हैं। पिछले महीने एटा नगर पालिका के 14 सभासदों ने 15वें वित्त आयोग से कराए जा रहे 87 कार्यों में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कलक्ट्रेट में धरना दिया था। उनकी मांग पर डीएम अंकित अग्रवाल ने जांच कराई तो चार कार्य ऐसे पाए गए जिनकी जरूरत ही नहीं थी।
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डीएम ने इन्हें निरस्त कराते हुए अन्य 77 कार्यों पर भी रोक लगा दी। इनकी जांच डिप्टी कलक्टर स्तर के दो अधिकारियों को सौंपी। जांच में तीन कार्य ऐसे मिले हैं जिन्हें बिना जरूरत प्रस्ताव में शामिल कर टेंडर करा लिए गए। डीएम ने इन तीनों कार्यों को भी निरस्त कर दिया है। वहीं वार्ड 6 में अंधी मोड़, एमपी नगर की एक गली में नाली एवं इंटरलॉकिंग मार्ग निर्माण कार्य में पाया गया कि इंटरलॉकिंग ईंट पुरानी लगाई जा रही थी। इस पर डीएम ने भुगतान किए जाने वाली धनराशि से ईंट के मूल्य की कटौती करने का आदेश दिया है।
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ये कार्य किए गए निरस्त
- वार्ड सं. 21 में एचपी गैस एजेंसी से छतरी वाले कुआं तक दोनों साइड पटरी पर इंटरलॉकिंग निर्माण कार्य।
- वार्ड सं. 21 में लोकमन दास तिराहा से पटियाली गेट चौराहा तक एक साइड पटरी पर इंटरलॉकिंग निर्माण कार्य।
- वार्ड सं. 7 में उपकार नगर स्थित मयूर विहार पार्क में बाउंड्रीवाल एवं मिट्टी भराव का कार्य।
ईओ को कार्यमुक्त कराने की मांग पर अड़े सभासद
उधर, पालिका में भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए सभासदों का एक गुट ईओ डॉ. दीप वार्ष्णेय को कार्यमुक्त कराने की मांग पर अड़ा है। सभासद संघ के सचिव दिलीप पचौरी ने बताया कि शनिवार को बोर्ड बैठक में 18 सभासदों ने ईओ को हटाने के लिए लिखित प्रस्ताव दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रस्ताव को पंजिका में रख लिया गया, लेकिन बाद में इसे ईओ ने निकाल लिया। इसकी सूचना पालिकाध्यक्ष को दी है। पालिकाध्यक्ष ने इस पर प्रशासनिक अधिकारियों से परामर्श मांगा है। हालांकि ईओ को हटाने की शक्ति शासन की है।
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