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संसाधनों का अभाव सरकारी स्कूलों से करता दूर

Wed, 19 Aug 2015 07:12 PM IST
ब्यूरो अमर उजाला, एटा
ब्यूरो अमर उजाला, एटा Updated Wed, 19 Aug 2015 07:12 PM IST
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 The lack of resources away from public schools
यूपी की बदहाल प्राथमिक शिक्षा पर हाईकोर्ट का आदेश नौकरशाही को एक आइना है। प्राइवेट शिक्षण संस्थानों की तुलना में परिषदीय स्कूलों पर कई गुना अधिक खर्च होने के बाद भी सरकारी स्कूलों की बदहाली चिंता का विषय है। सच यही है कि सरकारी परिषदीय स्कूलों में कोई भी अपने बच्चों को पढ़ाने नहीं भेजना चाहता। सुविधाओं, शिक्षा की गुणवत्ता एवं अन्य मामलों में एक तरफ सरकारी स्कूल और दूसरी तरफ प्राइवेट स्कूलों की तस्वीर को देखा जाए तो जमीन आसमान का अंतर साफ दिखाई देगा। जिले में भी यही हाल है। अंग्रेजी और हिंदी माध्यम के प्राइवेट स्कूल और सरकारी परिषदीय स्कूलों के बीच हरेक मानक से बड़ा अंतर दिखता है।
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 बुद्धजीवियों की माने तो सरकारी स्कूलों में संसाधनों के अभाव में जहां पढ़ाई समय चक्र के हिसाब से नहीं हो पाती, वहीं शिक्षकों को सरकार द्वारा किए जाने वाले गैर शैक्षणिक कार्यों की वजह से स्कूल रामभरोसे चलते हैं। इसकी वजह से मुफ्त शिक्षा और मुफ्त का खाना जैसी योजनाएं भी बच्चों को सरकारी स्कूलों के प्रति आकर्षित नहीं कर पा रही हैं। प्राइवेट शिक्षण संस्थानों में भी अंग्रेजी माध्यम स्कूल पहली पसंद है जबकि परिषदीय स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा फिलहाल दूर की कौड़ी है।
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सरकारी टीचरों को मिलता वेतन भरपूर
- परिषदीय विद्यालयों के वेतन भत्तों में प्राथमिक मेें ग्रेड पे- 13500 रुपया है, जिसमें सभी अन्य भत्ते मिलाकर 28 हजार रुपया नए शिक्षक का बनता है। इसी तरह जूनियर हाईस्कूल का वेतन ग्रेड पे 17140 रुपया है, जिसमें सभी भत्तों सहित 35000 रुपये के लगभग होता है।
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मामुली पगार पर कड़ी मेहनत करते प्राइवेट स्कूलों के टीचर
एटा। प्राइवेट स्कूलों के शिक्षकों को तीन हजार से दस हजार रुपया तक वेतन प्रबंधकों द्वारा दिया जाता है। उसके बाद भी इन विद्यालयों के शिक्षकों द्वारा ऐसी शिक्षा दी जाती है जो कि सरकारी स्कूलों के शिक्षकों द्वारा दिए जाने का प्रयास भी नहीं किया जाता।

क्या कहते हैं राज्य पुरस्कृत शिक्षक
 - न्यायालय का आदेश स्वागत योग्य है, लेकिन मंत्री अधिकारियों एवं कर्मचारियों के बच्चों के नामांकन तो हो सकते हैं, लेकिन उनका ठहराव होना भी आवश्यक है। जो बहुत ही कठिन कार्य है। इसके लिए भी हाईकोर्ट को सख्त निर्देश देने होंगे।
- शशिकांत माथुर, राज्य पुरस्कृत शिक्षक, अलीगंज, एटा।

- न्यायालय का आदेश स्वागत योग है। यदि आदेश का पालन होता है तो उनके विभाग की छवि सुधरेगी और समाज में गिरी हुई छवि सुधरेगी और सम्मान भी बढ़ेगा।
- दयानंद श्रीवास्तव, राष्ट्रपति पुरस्कृत शिक्षक।

न्यायालय का आदेश का पालन होते ही सरकारी स्कूली शिक्षा में व्यापक सुधार होगा। प्राइवेट शिक्षा पर असर पड़ेगा और लोगों के दिलों में बेसिक शिक्षा का गिरा हुआ विश्वास वापस आएगा।

- केपी गौतम राज्य पुरस्कृत शिक्षक, अवागढ़, एटा।  

न्यायालय का आदेश स्वागत योग्य है। यदि ऐसा होता है तो सरकारी शिक्षा में व्यापक पैमाने पर सुधार होगा।  
- परवेज जुवैरी, जिला उपाध्यक्ष समाजवादी, एटा।

सरकारी स्कूल में पढ़कर बने अफसर
एटा। जीआईसी से नौवीं से 12वीं तक पढ़ाई कर आज इस मुकाम पर पहुंचे है। मूलरूप से मैनपुरी के रहने वाले राजेश कुमार वर्तमान में एटा में जिला दूरसंचार प्रबंधक के पद पर तैनात हैं। वे कहते हैं कि जब वह पढ़ते थे उस समय जीआईसी का नाम था। मैनपुरी शिकोहाबाद के बच्चे यहां पढ़ने आते थे। शिक्षा भी अच्छी थी। यदि हाईकोर्ट के आदेश का पालन होता है तो बेसिक स्कूलों की दशा सुधरेगी।
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