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Etah News: हिंदू साम्राज्य स्थापना दिवस पर वीर शिवाजी महाराज के आदर्शों को किया याद
Tue, 09 Jun 2026 11:08 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Tue, 09 Jun 2026 11:08 PM IST
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शहीद पार्क में छत्रपति शिवाजी के चित्र पर माल्यार्पण करते स्वयं सेवक। स्रोत स्वयं
एटा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पर्वों के अंतर्गत द्वितीय पर्व हिंदू साम्राज्य स्थापना दिवस का आयोजन मंगलवार को शहीद भगत सिंह शाखा शहीद पार्क में स्वयंसेवकों की ओर से किया गया। जिसकी अध्यक्षता राजेंद्र सिंह सोलंकी ने की जबकि संचालन मुनेश सिसौदिया ने किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ नारायण सिंह सोलंकी ने मराठा साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज के चित्र पर पुष्प अर्पित कर किया। इस अवसर पर वक्ताओं ने शिवाजी महाराज के व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए उनके शौर्य, साहस और राष्ट्रभक्ति को स्मरण किया।
मुख्य वक्ता संजीव गोयल ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने हिंदू साम्राज्य की स्थापना कर भारतीय इतिहास में स्वर्णिम अध्याय लिखा। उन्होंने अपने पराक्रम, कुशल नेतृत्व और संगठन क्षमता के बल पर एक सशक्त साम्राज्य की नींव रखी। शिवाजी महाराज का जीवन राष्ट्रभक्ति, स्वाभिमान व जनकल्याण की भावना का प्रतीक है। राजेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज एक साहसी, दूरदर्शी व कुशल योद्धा थे। वर्ष 1674 में रायगढ़ किले में उनका राज्याभिषेक हुआ जहां उन्हें छत्रपति की उपाधि प्रदान की गई। उन्होंने सभी धर्मों का सम्मान किया व सुशासन और न्यायपूर्ण व्यवस्था स्थापित की। उनके आदर्श आज भी समाज को प्रेरित करते हैं। वक्ताओं ने कहा कि शिवाजी महाराज के शौर्य, साहस व राष्ट्रसेवा की गाथाएं आज भी युवाओं को देशभक्ति और समाजसेवा के लिए प्रेरित करती हैं। रतन प्रकाश सक्सेना, प्रदीप गुप्ता, पंकज, शिवदास, शिवराज सिंह, सुमन उपाध्याय, राजीव गुप्ता, सहित अन्य स्वयंसेवक मौजूद रहे।
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कार्यक्रम का शुभारंभ नारायण सिंह सोलंकी ने मराठा साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज के चित्र पर पुष्प अर्पित कर किया। इस अवसर पर वक्ताओं ने शिवाजी महाराज के व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए उनके शौर्य, साहस और राष्ट्रभक्ति को स्मरण किया।
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मुख्य वक्ता संजीव गोयल ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने हिंदू साम्राज्य की स्थापना कर भारतीय इतिहास में स्वर्णिम अध्याय लिखा। उन्होंने अपने पराक्रम, कुशल नेतृत्व और संगठन क्षमता के बल पर एक सशक्त साम्राज्य की नींव रखी। शिवाजी महाराज का जीवन राष्ट्रभक्ति, स्वाभिमान व जनकल्याण की भावना का प्रतीक है। राजेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज एक साहसी, दूरदर्शी व कुशल योद्धा थे। वर्ष 1674 में रायगढ़ किले में उनका राज्याभिषेक हुआ जहां उन्हें छत्रपति की उपाधि प्रदान की गई। उन्होंने सभी धर्मों का सम्मान किया व सुशासन और न्यायपूर्ण व्यवस्था स्थापित की। उनके आदर्श आज भी समाज को प्रेरित करते हैं। वक्ताओं ने कहा कि शिवाजी महाराज के शौर्य, साहस व राष्ट्रसेवा की गाथाएं आज भी युवाओं को देशभक्ति और समाजसेवा के लिए प्रेरित करती हैं। रतन प्रकाश सक्सेना, प्रदीप गुप्ता, पंकज, शिवदास, शिवराज सिंह, सुमन उपाध्याय, राजीव गुप्ता, सहित अन्य स्वयंसेवक मौजूद रहे।
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