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Etah News: नीलकंठ आलू में मौजूद कैरोटीन एंथोसायनिन तत्व कैंसर से लड़ने में सक्षम
Tue, 23 Apr 2024 01:03 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Tue, 23 Apr 2024 01:03 AM IST
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एटा। जिले में औषधीय गुण वाले कुफरी नीलकंठ प्रजाति के आलू की खेती शुरू की गई है। बैंगनी रंग का यह आलू किसानों को अच्छी पैदावार तो देगा ही साथ ही खाने वालों की सेहत का भी ध्यान रखेगा। यह आलू शरीर के हानिकारक तत्वों को निष्क्रिय करता है और इसमें मौजूद कैरोटीन एंथोसायनिन तत्व कैंसर और शुगर जैसी बीमारियों के प्रति रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का भी काम करते हैं। इसकी बाजार में भी मांग होने लगी है। इसको लेकर किसान बेहद खुश नजर आ रहे हैं।
जिले के तहसील अलीगंज क्षेत्र में कुछ किसानों ने नीलकंठ आलू की प्रजाति को पैदा करना शुरू कर दिया है। इसके बेहतर परिणाम बताए जा रहे हैं। आलू एक ऐसी सब्जी है जिसको सबसे ज्यादा खाया जाता है। इसकी अहमियत इससे समझी जा सकती है कि इस आलू की मांग समय के साथ निरंतर बढ़ती जा रही है। सामान्य आलू की अपेक्षा नीलकंठ प्रजाति दोगुनी दर पर बिक्री होता है, इसकी वजह से किसानों के लिए लाभ का सौदा साबित हो रहा है।
जिले में सामान्य आलू की प्रजातियां ही पैदा की जा रहीं थीं। इस बार आलू के अच्छे भाव मिल रहे थे किसान पहले से ही खुश थे। जिले के किसान आमतौर पर पुखराज व सूर्या प्रजाति के आलू की खेती करते हैं। इस बार जिले में ट्रायल के तौर पर कुफरी नीलकंठ आलू की खेती शुरू की गई है। यह आलू बैंगनी रंग का होता है। इसकी पैदावार सामान्य बीज से बेहतर होती है।
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कुफरी आलू की बाजार में है मांग
तहसील अलीगंज क्षेत्र के गांव कठिंगरा निवासी राकेश कुमार शाक्य ने पहली बार आलू किया है। इनका कहना है कि नीलकंठ आलू की बाजार में काफी मांग है, इसके चलते जैविक तरीके से आलू की पैदावार की है। वैज्ञानिकों के अनुसार कैंसर व शुगर जैसी समस्याओं को लेकर रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। इसके लिए पहली बार कुफरी नीलकंठ आलू की पैदावार की है।
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नीलकंठ आलू की खासियत
उद्यान निरीक्षक रवेंद्र कुमार मिश्रा ने बताया कि कुफरी नीलकंठ में 100 ग्राम आलू में एंथोसायनिन तत्व की मात्रा 100 माइक्रोग्राम तथा कैटोटिनायडस की मात्रा 300 माइक्रोग्राम होती है। सामान्य आलू में एंथोसायनिन 15 माइक्रोग्राम तक तथा कैटोटिनायडस 70 माइक्रोग्राम तक होता है। इन तत्वों को सामान्य भाषा में एंटी ऑक्सीडेंट भी कहते हैं। इसके साथ ही कैंसर जैसी बीमारी और शुगर से लड़ने की क्षमता भी अधिक बताई जाती है। औषधीय गुणों से भरपूर होने के चलते आलू की मांग बाजार में बढ़ने लगी है।
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जिले के तहसील अलीगंज क्षेत्र में कुछ किसानों ने नीलकंठ आलू की प्रजाति को पैदा करना शुरू कर दिया है। इसके बेहतर परिणाम बताए जा रहे हैं। आलू एक ऐसी सब्जी है जिसको सबसे ज्यादा खाया जाता है। इसकी अहमियत इससे समझी जा सकती है कि इस आलू की मांग समय के साथ निरंतर बढ़ती जा रही है। सामान्य आलू की अपेक्षा नीलकंठ प्रजाति दोगुनी दर पर बिक्री होता है, इसकी वजह से किसानों के लिए लाभ का सौदा साबित हो रहा है।
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जिले में सामान्य आलू की प्रजातियां ही पैदा की जा रहीं थीं। इस बार आलू के अच्छे भाव मिल रहे थे किसान पहले से ही खुश थे। जिले के किसान आमतौर पर पुखराज व सूर्या प्रजाति के आलू की खेती करते हैं। इस बार जिले में ट्रायल के तौर पर कुफरी नीलकंठ आलू की खेती शुरू की गई है। यह आलू बैंगनी रंग का होता है। इसकी पैदावार सामान्य बीज से बेहतर होती है।
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कुफरी आलू की बाजार में है मांग
तहसील अलीगंज क्षेत्र के गांव कठिंगरा निवासी राकेश कुमार शाक्य ने पहली बार आलू किया है। इनका कहना है कि नीलकंठ आलू की बाजार में काफी मांग है, इसके चलते जैविक तरीके से आलू की पैदावार की है। वैज्ञानिकों के अनुसार कैंसर व शुगर जैसी समस्याओं को लेकर रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। इसके लिए पहली बार कुफरी नीलकंठ आलू की पैदावार की है।
नीलकंठ आलू की खासियत
उद्यान निरीक्षक रवेंद्र कुमार मिश्रा ने बताया कि कुफरी नीलकंठ में 100 ग्राम आलू में एंथोसायनिन तत्व की मात्रा 100 माइक्रोग्राम तथा कैटोटिनायडस की मात्रा 300 माइक्रोग्राम होती है। सामान्य आलू में एंथोसायनिन 15 माइक्रोग्राम तक तथा कैटोटिनायडस 70 माइक्रोग्राम तक होता है। इन तत्वों को सामान्य भाषा में एंटी ऑक्सीडेंट भी कहते हैं। इसके साथ ही कैंसर जैसी बीमारी और शुगर से लड़ने की क्षमता भी अधिक बताई जाती है। औषधीय गुणों से भरपूर होने के चलते आलू की मांग बाजार में बढ़ने लगी है।