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Etah News: ढाई घंटे नहीं आई एंबुलेंस, सांस के मरीज ने तोड़ा दम
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शहर के जीटी रोड से गुजरती 108 एंबुलेंस। संवाद
एटा। एंबुलेंस के लिए परिजन 108 नंबर पर बार-बार कॉल करते रहे लेकिन ढाई घंटे तक एंबुलेंस नहीं आई। इसकी वजह से सांस रोग से पीड़ित मरीज ने दम तोड़ दिया।
रविवार की रात करीब 2 बजे श्यामवीर सिंह (55) निवासी कासिमपुर की अचानक तबीयत खराब हो गई। उन्हें सांस लेने में परेशानी होने लगी। उन्हें मेडिकल कॉलेज ले जाने के लिए परिजन ने 108 नंबर पर एंबुलेंस के लिए फोन किया। फोन पर बात भी हो गई और एक घंटे के अंदर एंबुलेंस पहुंचने का आश्वासन दिया गया। न पहुंचने पर फिर दो-तीन बार कॉल किया। इस बीच ढाई घंटा बीत गया
इसके बाद परिजन वाहन की व्यवस्था कर उनको मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में सुबह करीब 4ः45 बजे लेकर आए। यहां चिकित्सक ने परीक्षण के बाद मृत घोषित कर दिया। भतीजे प्रदीप ने बताया कि रात 2 से लेकर 3ः30 बजे तक एंबुलेंस के लिए फोन करते रहे लेकिन एंबुलेंस नहीं आई। इसके बाद निजी वाहन से उन्हें इमरजेंसी लेकर आए थे।
15 मिनट का है रेस्पोंस टाइम
108 सेवा की एंबुलेंस पीड़ित के घर या घटनास्थल तक पहुंचने के लिए 15 मिनट का रेस्पोंस टाइम निर्धारित किया गया। कॉल पर बात होने के बाद इतने समय में एंबुलेंस पहुंचाने का दावा स्वास्थ्य विभाग की ओर से किया जाता है। वहीं 102 एंबुलेंस के मामले में यह समय नगर क्षेत्र में 15 और ग्रामीण क्षेत्र में 20 मिनट का है।
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1 जनवरी को भी सामने आई थी लापरवाही
सरकारी एंबुलेंस सेवा की यह लापरवाही कोई नई नहीं है। हाल ही में 1 जनवरी को सड़क हादसे में घायल एक युवक ढाई घंटे तक एंबुलेंस न आने से तड़पता रहा था। बाद में परिजन किसी प्राइवेट वाहन से उसे मेडिकल कॉलेज के हड्डी रोग विभाग तक लेकर पहुंचे।
एंबुलेंस के लिए 108 पर फोन किया गया और बात हुई लेकिन एंबुलेंस नहीं पहुंची। इस मामले की जानकारी की जाएगी और लापरवाही बरतने के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। -लोकमन, एंबुलेंस प्रभारी
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रविवार की रात करीब 2 बजे श्यामवीर सिंह (55) निवासी कासिमपुर की अचानक तबीयत खराब हो गई। उन्हें सांस लेने में परेशानी होने लगी। उन्हें मेडिकल कॉलेज ले जाने के लिए परिजन ने 108 नंबर पर एंबुलेंस के लिए फोन किया। फोन पर बात भी हो गई और एक घंटे के अंदर एंबुलेंस पहुंचने का आश्वासन दिया गया। न पहुंचने पर फिर दो-तीन बार कॉल किया। इस बीच ढाई घंटा बीत गया
इसके बाद परिजन वाहन की व्यवस्था कर उनको मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में सुबह करीब 4ः45 बजे लेकर आए। यहां चिकित्सक ने परीक्षण के बाद मृत घोषित कर दिया। भतीजे प्रदीप ने बताया कि रात 2 से लेकर 3ः30 बजे तक एंबुलेंस के लिए फोन करते रहे लेकिन एंबुलेंस नहीं आई। इसके बाद निजी वाहन से उन्हें इमरजेंसी लेकर आए थे।
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15 मिनट का है रेस्पोंस टाइम
108 सेवा की एंबुलेंस पीड़ित के घर या घटनास्थल तक पहुंचने के लिए 15 मिनट का रेस्पोंस टाइम निर्धारित किया गया। कॉल पर बात होने के बाद इतने समय में एंबुलेंस पहुंचाने का दावा स्वास्थ्य विभाग की ओर से किया जाता है। वहीं 102 एंबुलेंस के मामले में यह समय नगर क्षेत्र में 15 और ग्रामीण क्षेत्र में 20 मिनट का है।
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1 जनवरी को भी सामने आई थी लापरवाही
सरकारी एंबुलेंस सेवा की यह लापरवाही कोई नई नहीं है। हाल ही में 1 जनवरी को सड़क हादसे में घायल एक युवक ढाई घंटे तक एंबुलेंस न आने से तड़पता रहा था। बाद में परिजन किसी प्राइवेट वाहन से उसे मेडिकल कॉलेज के हड्डी रोग विभाग तक लेकर पहुंचे।
एंबुलेंस के लिए 108 पर फोन किया गया और बात हुई लेकिन एंबुलेंस नहीं पहुंची। इस मामले की जानकारी की जाएगी और लापरवाही बरतने के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। -लोकमन, एंबुलेंस प्रभारी