{"_id":"572a32a74f1c1b12215cd14d","slug":"shreemadbhaagavat-katha-mein-vishv-shaanti-kee-kaamana","type":"story","status":"publish","title_hn":"श्रीमद्भागवत कथा में विश्व शांति की कामना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
श्रीमद्भागवत कथा में विश्व शांति की कामना
अमर उजाला ब्यूरो, एटा
Updated Wed, 04 May 2016 11:04 PM IST
विज्ञापन
श्रीमद्भागवत कथा
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सहावर गेट अमांपुर बस अड्डे पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा में बुधवार को कथावाचक ने गोवर्धन पूजा लीला, इंद्र अभिमान चूर लीला का वर्णन किया। कथा पंडाल में 56 भोग सजाया गया। देर सांय तक भक्त भक्तिमय भजनों एवं कथा श्रवण का पुण्य अर्जित करते रहे।
कथावाचक मक्खन लाल शास्त्री ने सर्वप्रथम विश्व शांति कल्याण की कामना की, देवों का आह्वान किया। कथावाचक ने गोवर्धन पूजा की लीला का वर्णन करते हुए कहा कि रामचरित मानस में गोस्वामी तुलसीदास ने साफ लिखा है कि निर्मल मन सो मोह पावा, मोहे कपट, छल, छिद्र न भावा। अर्थात भगवान उस मनुष्य पर अपनी कृपा नहीं बरसाते जिसके मन में छल कपट है। भगवान इंद्र को अभिमान हो गया कि उससे शक्तिशाली इस दुनिया में कोई नहीं, और जब ब्रज वासियों ने श्रीकृष्ण के कहने पर 56 भोग गोवर्धन महाराज को अर्पित कर दिया तो इंद्र ने क्रोधित होकर मूसलाधार बारिश ब्रज में की, जब पूरे ब्रज में प्रलय और हाहाकार मचा तो भगवान ने स्वयं अपने हाथ की छल्ली अंगुली पर सात दिन तक गोवर्धन पर्वत को धारण कर ब्रज वासियों की रक्षा की। जब इंद्र ब्रज वासियों का कुछ नहीं कर सके तो वह स्वयं भगवान की शरण में आए और भगवान ने उन पर कृपा की। आकर्षक 56 भोग भी कथा पंडाल में आयोजकों ने सजाया। गोवर्धन भगवान के दर्शन एवं आरती की। कथा के दौरान संजय पुण्ढीर, भजन लाल, नाथूराम, पद्म सिंह, जागन सिंह, सीताराम, धनीराम वर्मा, बाबी कश्यप, राजेश कुमार, बाबी लाल, शैलेंद्र नीरज, जितेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
कथावाचक मक्खन लाल शास्त्री ने सर्वप्रथम विश्व शांति कल्याण की कामना की, देवों का आह्वान किया। कथावाचक ने गोवर्धन पूजा की लीला का वर्णन करते हुए कहा कि रामचरित मानस में गोस्वामी तुलसीदास ने साफ लिखा है कि निर्मल मन सो मोह पावा, मोहे कपट, छल, छिद्र न भावा। अर्थात भगवान उस मनुष्य पर अपनी कृपा नहीं बरसाते जिसके मन में छल कपट है। भगवान इंद्र को अभिमान हो गया कि उससे शक्तिशाली इस दुनिया में कोई नहीं, और जब ब्रज वासियों ने श्रीकृष्ण के कहने पर 56 भोग गोवर्धन महाराज को अर्पित कर दिया तो इंद्र ने क्रोधित होकर मूसलाधार बारिश ब्रज में की, जब पूरे ब्रज में प्रलय और हाहाकार मचा तो भगवान ने स्वयं अपने हाथ की छल्ली अंगुली पर सात दिन तक गोवर्धन पर्वत को धारण कर ब्रज वासियों की रक्षा की। जब इंद्र ब्रज वासियों का कुछ नहीं कर सके तो वह स्वयं भगवान की शरण में आए और भगवान ने उन पर कृपा की। आकर्षक 56 भोग भी कथा पंडाल में आयोजकों ने सजाया। गोवर्धन भगवान के दर्शन एवं आरती की। कथा के दौरान संजय पुण्ढीर, भजन लाल, नाथूराम, पद्म सिंह, जागन सिंह, सीताराम, धनीराम वर्मा, बाबी कश्यप, राजेश कुमार, बाबी लाल, शैलेंद्र नीरज, जितेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन