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Etah News: गमों की कैद से बाहर निकाल लेती है, गरीब मां भी बच्चों को पाल लेती है...
Sat, 03 Feb 2024 11:25 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Sat, 03 Feb 2024 11:25 PM IST
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एटा। राजकीय जिला कृषि एवं औद्योगिक विकास प्रदर्शनी में शुक्रवार की रात कवियत्रियों ने समा बांधा। अखिल भारतीय विराट कवियत्री सम्मेलन में दर्शक देर रात तक बेहतरीन रचनाएं सुनते रहे।
कार्यक्रम का उद्घाटन पालिकाध्यक्ष सुधा गुप्ता ने फीता काटकर किया। अशोक सिकरवार, गिरीश चंद्र शर्मा व नीरज गुप्ता ने सामूहिक रूप से दीप प्रज्वलन किया। अध्यक्षता वरिष्ठ कवियत्री व्यंजना शुक्ला ने की। संचालन हास्य कवि लटूरी लट्ठ ने किया। कवियित्री श्रद्धा मौर्य ने पढ़ा कि जलने वालों सुनो तुम्हीं ने चिंगारी सुलगाई, मंदिर वहीं बनाया तारीख भी बताई। माधुरी किरण ने सुनाया- गमों की कैद से बाहर निकाल लेती है, गरीब मां भी बच्चों को पाल लेती है। अमीर लोगों की कारें रुकती हैं सिग्नल पे, गरीबी भीड़ से रास्ता निकाल लेती है। निशा चौधरी ने सुनाया मुस्कराते हुए शर्म को ओढ़कर, मुझमें सिमटा कहीं स्वयं को छोड़कर। जिंदगी का गणित यों सरल कर दिया, उसने खुद से मुझे आज खुद जोड़कर।
प्रीति त्रिपाठी ने सुनाया जरा सा मुस्कुरा दो तुम तो मेरी शाम बन जाए, कदम रख दो तो मेरा आशियां भी धाम बन जाए। वंदना विशेष ने गुनगुनाया कि प्यार जीवन में बेइंतहां मिल गया, ये जमीं तो जमीं आसमां मिल गया। अब तुम्हारे सिवा कुछ नहीं चाहिए, तुमको पाया तो सारा जहां मिल गया। वर्तिका तोमर ने छंद गाया कि जीवन की गति जानन वारो, ये एक हमारो प्यारो कन्हैया। रूप अलौकिक प्यार की भाषा, में बतरावे प्यारो कन्हैया। व्यंजना शुक्ला ने काव्यपाठ के साथ कार्यक्रम का समापन किया। अंत में लटूरी लट्ठ ने कहा, पैंतीस वर्ष पहले की फोटो डीपी पर चिपकाई है.. मैसेंजर से हसते-हसते वाट्सएप पर आई है। कार्यक्रम के संयोजक राकेश कंज ने सबको धन्यवाद दिया। महेंद्रपाल शर्मा एडवोकेट, हिमांशू सक्सेना, रामखिलाड़ी, सुनील दत्त शाक्य, दीपकांत त्रिपाठी, विजेंद्र सिंह आदि काव्य प्रेमी मौजूद रहे।
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कार्यक्रम का उद्घाटन पालिकाध्यक्ष सुधा गुप्ता ने फीता काटकर किया। अशोक सिकरवार, गिरीश चंद्र शर्मा व नीरज गुप्ता ने सामूहिक रूप से दीप प्रज्वलन किया। अध्यक्षता वरिष्ठ कवियत्री व्यंजना शुक्ला ने की। संचालन हास्य कवि लटूरी लट्ठ ने किया। कवियित्री श्रद्धा मौर्य ने पढ़ा कि जलने वालों सुनो तुम्हीं ने चिंगारी सुलगाई, मंदिर वहीं बनाया तारीख भी बताई। माधुरी किरण ने सुनाया- गमों की कैद से बाहर निकाल लेती है, गरीब मां भी बच्चों को पाल लेती है। अमीर लोगों की कारें रुकती हैं सिग्नल पे, गरीबी भीड़ से रास्ता निकाल लेती है। निशा चौधरी ने सुनाया मुस्कराते हुए शर्म को ओढ़कर, मुझमें सिमटा कहीं स्वयं को छोड़कर। जिंदगी का गणित यों सरल कर दिया, उसने खुद से मुझे आज खुद जोड़कर।
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प्रीति त्रिपाठी ने सुनाया जरा सा मुस्कुरा दो तुम तो मेरी शाम बन जाए, कदम रख दो तो मेरा आशियां भी धाम बन जाए। वंदना विशेष ने गुनगुनाया कि प्यार जीवन में बेइंतहां मिल गया, ये जमीं तो जमीं आसमां मिल गया। अब तुम्हारे सिवा कुछ नहीं चाहिए, तुमको पाया तो सारा जहां मिल गया। वर्तिका तोमर ने छंद गाया कि जीवन की गति जानन वारो, ये एक हमारो प्यारो कन्हैया। रूप अलौकिक प्यार की भाषा, में बतरावे प्यारो कन्हैया। व्यंजना शुक्ला ने काव्यपाठ के साथ कार्यक्रम का समापन किया। अंत में लटूरी लट्ठ ने कहा, पैंतीस वर्ष पहले की फोटो डीपी पर चिपकाई है.. मैसेंजर से हसते-हसते वाट्सएप पर आई है। कार्यक्रम के संयोजक राकेश कंज ने सबको धन्यवाद दिया। महेंद्रपाल शर्मा एडवोकेट, हिमांशू सक्सेना, रामखिलाड़ी, सुनील दत्त शाक्य, दीपकांत त्रिपाठी, विजेंद्र सिंह आदि काव्य प्रेमी मौजूद रहे।
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