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कभी सकीट की शान हुआ करता था ये किला
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सकीट किले के बहार उगी झाणियों और बबूल- अमर उजाला
- फोटो : ETAH
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एटा/सकीट। जिले की एक एतिहासिक धरोहर अतिक्रमण के जाल में फंस गई है। सकीट क्षेत्र में स्थित सकीट किला के आसपास अवैध निर्माण ने नियमों की धज्जियां उड़ रही हैं। आलम यह है कि लोगों ने एतिहासिक धरोहर के पास मकान और अन्य निर्माण करा लिए हैं। ऐसे में पुरातत्व की कहानी कहती धरोहर का अस्तित्व समाप्त होता जा रहा है। पुरातत्व विभाग ने किले के पास निर्माण कराने वाले चार लोगों को नोटिस देकर जवाब मांगा है।
प्राचीन काल में सकीट क्षेत्र में राजा सकट सिंह का साम्राज्य था। यहां उनका किला भी बना हुआ था। बताया जाता है कि राजा के कोई संतान नहीं थी। समय बदलता गया और राजा सकट सिंह की मौत के बाद किला वीरान हो गया। काफी समय बाद किले को पुरातत्व विभाग के अधीन कर दिया गया। पुरातत्व विभाग ने किले में स्थित मामू भांजा मजार और किले के आसपास मानकों के बोर्ड लगवाए। नियमों के मुताबिक संरक्षित स्मारक से 200 मीटर क्षेत्र में कोई खनन या निर्माण नहीं हो सकता, लेकिन किले के आसपास अतिक्रमण का मकड़जाल है। किले के ऊपर कोतवाली बनी है। हरिजन बस्ती, मोहल्ला काजी और मोहल्ला चिक भी बसा हुआ है। बढ़ती आबादी क्षेत्र के साथ किले का अस्तित्व समाप्त होता जा रहा है।
मिलते रहे नोटिस, नहीं हटे अतिक्रमण
समय-समय पर पुरातत्व विभाग ने संरक्षित स्मारक की सीमा में किए गए निर्माणों को लेकर नोटिस दिए। लोगों ने नोटिस का जवाब दिया लेकिन निर्माण नहीं हट पाए। लोगों का कहना है कि वो बुजुर्गों के जमाने से यहां रह रहे हैं। हाल ही में भारत सरकार के पुरातत्व विभाग ने कालीचरन पुत्र कमल सिंह, राजवीर, शम्सुल पुत्र मुन्ना, धनीराम को नोटिस थमाए हैं।
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कोई नहीं पढ़ सका शिलालेख
सकीट किले में बने स्मारक में एक शिलालेख लगा हुआ है। जिस पर एक भाषा में कुछ शब्द उत्कीर्ण हैं। कई बार बड़े-बड़े विद्वानों ने इसे पढ़ने की कोशिश की, लेकिन कोई पढ़ नहीं सका।
अकबर के मामा-भांजे की मजार
सकीट किले में भग्न मस्जिद भी है। साथ ही किले के अंदर अकबर के मामा-भांजे की मजार भी बनी हुई है।
बबूल और झाड़ियों ने किया बदसूरत
प्राचीन किले की देखरेख और खूबसूरती को बरकरार रखने के लिए कोई पहल नहीं की जाती। किले के चारों ओर और अंदर बबूल के बड़े पेड़ और झाड़ियां हैं। अगर यह साफ हों तो किले के स्वरूप को नई पहचान मिल सकती है।
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प्राचीन काल में सकीट क्षेत्र में राजा सकट सिंह का साम्राज्य था। यहां उनका किला भी बना हुआ था। बताया जाता है कि राजा के कोई संतान नहीं थी। समय बदलता गया और राजा सकट सिंह की मौत के बाद किला वीरान हो गया। काफी समय बाद किले को पुरातत्व विभाग के अधीन कर दिया गया। पुरातत्व विभाग ने किले में स्थित मामू भांजा मजार और किले के आसपास मानकों के बोर्ड लगवाए। नियमों के मुताबिक संरक्षित स्मारक से 200 मीटर क्षेत्र में कोई खनन या निर्माण नहीं हो सकता, लेकिन किले के आसपास अतिक्रमण का मकड़जाल है। किले के ऊपर कोतवाली बनी है। हरिजन बस्ती, मोहल्ला काजी और मोहल्ला चिक भी बसा हुआ है। बढ़ती आबादी क्षेत्र के साथ किले का अस्तित्व समाप्त होता जा रहा है।
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मिलते रहे नोटिस, नहीं हटे अतिक्रमण
समय-समय पर पुरातत्व विभाग ने संरक्षित स्मारक की सीमा में किए गए निर्माणों को लेकर नोटिस दिए। लोगों ने नोटिस का जवाब दिया लेकिन निर्माण नहीं हट पाए। लोगों का कहना है कि वो बुजुर्गों के जमाने से यहां रह रहे हैं। हाल ही में भारत सरकार के पुरातत्व विभाग ने कालीचरन पुत्र कमल सिंह, राजवीर, शम्सुल पुत्र मुन्ना, धनीराम को नोटिस थमाए हैं।
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कोई नहीं पढ़ सका शिलालेख
सकीट किले में बने स्मारक में एक शिलालेख लगा हुआ है। जिस पर एक भाषा में कुछ शब्द उत्कीर्ण हैं। कई बार बड़े-बड़े विद्वानों ने इसे पढ़ने की कोशिश की, लेकिन कोई पढ़ नहीं सका।
अकबर के मामा-भांजे की मजार
सकीट किले में भग्न मस्जिद भी है। साथ ही किले के अंदर अकबर के मामा-भांजे की मजार भी बनी हुई है।
बबूल और झाड़ियों ने किया बदसूरत
प्राचीन किले की देखरेख और खूबसूरती को बरकरार रखने के लिए कोई पहल नहीं की जाती। किले के चारों ओर और अंदर बबूल के बड़े पेड़ और झाड़ियां हैं। अगर यह साफ हों तो किले के स्वरूप को नई पहचान मिल सकती है।