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ट्रेन और स्टेशन पर अव्यवस्थाएं
ब्यूरो अमर उजाला एटा
Updated Thu, 26 Feb 2015 12:01 AM IST
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एटा-टूंडला रेलवे ट्रैक पर पिछले छह दशक से एक ही ट्रेन दौड़ रही है। उसमें भी अव्यवस्थाओं का बोलबाला है। रेलवे स्टेशन पर भी कोई व्यवस्था नहीं है। ट्रेन में जहां सीटें खराब हैं, वहीं पंखे भी सभी नहीं चलते हैं। स्टेशन पर लगी बैंचें टूट रही हैं, पानी की टंकी के लीकेज होने से पानी बेकार बहता है।
ट्रेन में सफर कर टूंडला से एटा आए यात्री प्रदीप ने बताया कि विभाग की ओर से ट्रेन में कोई सुविधा नहीं है। ट्रेन में गंदगी रहती है। साथ ही लकड़ी की सीटें भी टूट रही हैं। एटा से जलेसर जाने के लिए ट्रेन का इंतजार कर रहे सुबोध कुमार ने बताया कि रेलवे स्टेशन पर अव्यवस्थाओं का बोलबाला है। यहां पड़ी बैंचें टूटी पड़ी हैं। इसके अलावा पेयजल के भी उचित इंतजाम नहीं हैं। जलेसर निवासी प्रकाश सिंह बघेल एडवोकेट व जगदीश प्रसाद वार्ष्णेय ने बताया कि ट्रेन से एटा से टूंडला पहुंचने में दो से ढाई घंटे का समय लग जाता है। इस दौरान बीच में पड़ने वाले स्टेशन भी गंदगी आदि नजर आती है। साथ ही सुविधाएं भी नहीं हैं। मजबूरी है कि एक ही ट्रेन होने के चलते इसमें सफर करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि भीषण गर्मी में भी जहां ट्रेन में लगे सभी पंखे चलते नहीं हैं, वहीं स्टेशन पर भी पंखे बंद नजर आते हैं। ठंडा पानी भी पीने को कम ही नसीब होता है।
रेलवे स्टेशन पर अव्यवस्थाओं को समय-समय पर दूर कराया जाता है। स्टेशन पर लगीं पानी की टंकियां अभी सही कराई गई हैं। ट्रेन की सफाई की जिम्मेदारी टूंडला स्टाफ की है।
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- एसएस मीणा, स्टेशन अधीक्षक
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ट्रेन में सफर कर टूंडला से एटा आए यात्री प्रदीप ने बताया कि विभाग की ओर से ट्रेन में कोई सुविधा नहीं है। ट्रेन में गंदगी रहती है। साथ ही लकड़ी की सीटें भी टूट रही हैं। एटा से जलेसर जाने के लिए ट्रेन का इंतजार कर रहे सुबोध कुमार ने बताया कि रेलवे स्टेशन पर अव्यवस्थाओं का बोलबाला है। यहां पड़ी बैंचें टूटी पड़ी हैं। इसके अलावा पेयजल के भी उचित इंतजाम नहीं हैं। जलेसर निवासी प्रकाश सिंह बघेल एडवोकेट व जगदीश प्रसाद वार्ष्णेय ने बताया कि ट्रेन से एटा से टूंडला पहुंचने में दो से ढाई घंटे का समय लग जाता है। इस दौरान बीच में पड़ने वाले स्टेशन भी गंदगी आदि नजर आती है। साथ ही सुविधाएं भी नहीं हैं। मजबूरी है कि एक ही ट्रेन होने के चलते इसमें सफर करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि भीषण गर्मी में भी जहां ट्रेन में लगे सभी पंखे चलते नहीं हैं, वहीं स्टेशन पर भी पंखे बंद नजर आते हैं। ठंडा पानी भी पीने को कम ही नसीब होता है।
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रेलवे स्टेशन पर अव्यवस्थाओं को समय-समय पर दूर कराया जाता है। स्टेशन पर लगीं पानी की टंकियां अभी सही कराई गई हैं। ट्रेन की सफाई की जिम्मेदारी टूंडला स्टाफ की है।
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