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Etah News: ब्लॉक मारहरा के पंचायत सचिवालयों में लगे रहते हैं ताले
Tue, 30 Jan 2024 05:33 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Tue, 30 Jan 2024 05:33 PM IST
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मिरहची। ब्लॉक क्षेत्र के पंचायत सचिवालयों में नियम कानून को ताक पर रखा जा रहा है। जिम्मेदार अधिकारियों की घोर लापरवाही के कारण ग्रामीणों की सहूलियत के लिए बनाए गए पंचायत भवनों में ताले लटके हुए हैं। ग्राम पंचायतों में अधिकतर पंचायत भवन बंद ही रहते हैं। इसकी वजह से पंचायत सहायक बैठते नहीं हैं। ग्रामीणों की प्राथमिक स्तर की अधिकांश समस्याओं का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। ऐसे में उन्हें काफी दूरी तय कर ब्लॉक के चक्कर लगाना मजबूरी बन गई है।
सरकार का दावा था कि ग्रामीणों को सारी सुविधाएं एक ही छत के नीचे मुहैया कराई जाएंगी। जिसके लिए सरकार ने प्रत्येक गांव में मिनी सचिवालय बनवाए थे। करोड़ों रुपये की लागत से पंचायत सचिवालय की इमारतें तो खड़ी कर दी गईं, लेकिन ग्रामीणों को कोई खास राहत नहीं मिली। ब्लॉक के गांव गोबरा, मोहम्मदपुर का पंचायत सचिवालय बंद ही रहता है। पड़ताल में यह खुलासा हुआ कि जिन गांव के पंचायत सचिवालय खुले हुए थे। उनमें कोई कर्मचारी ही नहीं मिला।
पवन कुमार, आलेश कुमार, धर्मवीर, ताराचंद, पुष्पेंद्र कुमार, किशन पप्पू , मुन्नालाल, लाखन सिंह आदि ने बताया क्षेत्र के अधिकांश पंचायत भवनों पर ज्यादातर ताला ही लटका रहता है। पंचायत भवन पर न तो विकास कार्यों को लेकर कभी बैठक की जाती है, न ही ग्रामीणों को प्राथमिक स्तर की सुविधाएं मिल पाती हैं। ऐसे में ग्रामीणों को कई किलोमीटर की दूरी तय कर ब्लॉक कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ता है। पंचायत भवन पर पंचायत सहायक के रूप में तैनात कर्मी भी वहां नहीं बैठते हैं। वह घर बैठे मानदेय ले रहे हैं।
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इस समय जिलाधिकारी के आदेश के क्रम में सभी पंचायत सहायकों की ड्यूटी खसरा सर्वे में लगा दी गई है इसलिए अधिकतर पंचायत सचिवालय बंद हैं। सर्वे का कार्य पूरा होने के बाद पंचायत सहायक बैठना शुरू कर देंगे। -प्रभु दयाल, प्रभारी खंड विकास अधिकारी
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सरकार का दावा था कि ग्रामीणों को सारी सुविधाएं एक ही छत के नीचे मुहैया कराई जाएंगी। जिसके लिए सरकार ने प्रत्येक गांव में मिनी सचिवालय बनवाए थे। करोड़ों रुपये की लागत से पंचायत सचिवालय की इमारतें तो खड़ी कर दी गईं, लेकिन ग्रामीणों को कोई खास राहत नहीं मिली। ब्लॉक के गांव गोबरा, मोहम्मदपुर का पंचायत सचिवालय बंद ही रहता है। पड़ताल में यह खुलासा हुआ कि जिन गांव के पंचायत सचिवालय खुले हुए थे। उनमें कोई कर्मचारी ही नहीं मिला।
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पवन कुमार, आलेश कुमार, धर्मवीर, ताराचंद, पुष्पेंद्र कुमार, किशन पप्पू , मुन्नालाल, लाखन सिंह आदि ने बताया क्षेत्र के अधिकांश पंचायत भवनों पर ज्यादातर ताला ही लटका रहता है। पंचायत भवन पर न तो विकास कार्यों को लेकर कभी बैठक की जाती है, न ही ग्रामीणों को प्राथमिक स्तर की सुविधाएं मिल पाती हैं। ऐसे में ग्रामीणों को कई किलोमीटर की दूरी तय कर ब्लॉक कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ता है। पंचायत भवन पर पंचायत सहायक के रूप में तैनात कर्मी भी वहां नहीं बैठते हैं। वह घर बैठे मानदेय ले रहे हैं।
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इस समय जिलाधिकारी के आदेश के क्रम में सभी पंचायत सहायकों की ड्यूटी खसरा सर्वे में लगा दी गई है इसलिए अधिकतर पंचायत सचिवालय बंद हैं। सर्वे का कार्य पूरा होने के बाद पंचायत सहायक बैठना शुरू कर देंगे। -प्रभु दयाल, प्रभारी खंड विकास अधिकारी