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Etah News: मेडिकल कॉलेज में खुला मां दूध बैंक
Wed, 16 Oct 2024 10:44 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Wed, 16 Oct 2024 10:44 PM IST
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एटा। नवजातों को अब बाहर का दूध नहीं पीना पड़ेगा। मेडिकल कॉलेज में भर्ती होने वाले बच्चों को मां का दूध पिलाने के लिए ब्रेस्ट दूध बैंक खुल गया है।
बुधवार को इसका शुभारंभ एसीएमओ डॉ. राम मोहन तिवारी व सीएमएस डॉ. सुरेश चंद्रा ने किया। बताया कि यहां स्तनपान कराने वाली महिलाएं दूध दान कर सकेंगी। ये दूध डीप फ्रीजर में सुरक्षित रखा जाएगा। जरूरतमंद नवजात शिशुओं को पीने के लिए दिया जाएगा। जिससे शिशुओं को मां का दूध मिलने पर पौष्टिक तत्व और एंटीबॉडीज मिल सकें। एसएनसीयू में भर्ती नवजातों को ड्यूटीरत नर्स समय-समय पर दूध पिलाएंगी। जरूरत के हिसाब से दूध का संग्रहण किया जाएगा। मां की इच्छा पर अन्य नवजातों को भी उनका दूध पिलाया जाएगा। डीप फ्रीजर, फ्रिज, माताओं के दूध को एकत्र करने के लिए पंचिंग मैनुअल इलेक्ट्रानिक मशीन भी लगाई गई है।
मेडिकल कॉलेज में एमसीएच विंग में सिक न्यू बॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) स्थापित है। यहां पर 16 बेड पर नवजातों को भर्ती कर इलाज किया जाता है। कई बार वार्ड में भर्ती नवजातों को बाजार से दूध मंगाकर पिलाना पड़ता है। जिससे संक्रमण का खतरा बना रहता है। जबकि जन्म के तुरंत बाद मां का दूध बहुत महत्वपूर्ण होता है। इसे देखते हुए एसएनसीयू में भर्ती नवजातों को मां का दूध देने के लिए मेडिकल कॉलेज के नए भवन में तृतीय तल पर दूध बैंक खोला गया है। लावारिस नवजात और बीमार मां के नवजात के लिए यह बैंक जीवनदायिनी बनेगा।
मां का दूध है अनमोल
सीएमएस ने बताया कि मां के दूध में कई प्रकार की एंटीबाॅडी होती हैं। यह शिशुओं की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती हैं। साथ ही बच्चों को डायबिटीज, अस्थमा और एलर्जी से बचाती हैं। वहीं, स्तनपान कराने वाली महिलाओं को ओवरी के कैंसर समेत कई अन्य बीमारियों से सुरक्षा भी मिलती है और मां तनावमुक्त रहती है।
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बुधवार को इसका शुभारंभ एसीएमओ डॉ. राम मोहन तिवारी व सीएमएस डॉ. सुरेश चंद्रा ने किया। बताया कि यहां स्तनपान कराने वाली महिलाएं दूध दान कर सकेंगी। ये दूध डीप फ्रीजर में सुरक्षित रखा जाएगा। जरूरतमंद नवजात शिशुओं को पीने के लिए दिया जाएगा। जिससे शिशुओं को मां का दूध मिलने पर पौष्टिक तत्व और एंटीबॉडीज मिल सकें। एसएनसीयू में भर्ती नवजातों को ड्यूटीरत नर्स समय-समय पर दूध पिलाएंगी। जरूरत के हिसाब से दूध का संग्रहण किया जाएगा। मां की इच्छा पर अन्य नवजातों को भी उनका दूध पिलाया जाएगा। डीप फ्रीजर, फ्रिज, माताओं के दूध को एकत्र करने के लिए पंचिंग मैनुअल इलेक्ट्रानिक मशीन भी लगाई गई है।
मेडिकल कॉलेज में एमसीएच विंग में सिक न्यू बॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) स्थापित है। यहां पर 16 बेड पर नवजातों को भर्ती कर इलाज किया जाता है। कई बार वार्ड में भर्ती नवजातों को बाजार से दूध मंगाकर पिलाना पड़ता है। जिससे संक्रमण का खतरा बना रहता है। जबकि जन्म के तुरंत बाद मां का दूध बहुत महत्वपूर्ण होता है। इसे देखते हुए एसएनसीयू में भर्ती नवजातों को मां का दूध देने के लिए मेडिकल कॉलेज के नए भवन में तृतीय तल पर दूध बैंक खोला गया है। लावारिस नवजात और बीमार मां के नवजात के लिए यह बैंक जीवनदायिनी बनेगा।
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मां का दूध है अनमोल
सीएमएस ने बताया कि मां के दूध में कई प्रकार की एंटीबाॅडी होती हैं। यह शिशुओं की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती हैं। साथ ही बच्चों को डायबिटीज, अस्थमा और एलर्जी से बचाती हैं। वहीं, स्तनपान कराने वाली महिलाओं को ओवरी के कैंसर समेत कई अन्य बीमारियों से सुरक्षा भी मिलती है और मां तनावमुक्त रहती है।
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