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मालखानों में जमा पुराने नोटों की कराई गई गिनती

Sat, 31 Dec 2016 12:23 AM IST
Amar Ujala
Amar Ujala Updated Sat, 31 Dec 2016 12:23 AM IST
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Malkhanon made of old notes in the deposit count
बैंक - फोटो : Amar Ujala
नोटबंदी के कारण चलन से बाहर हुए पांच सौ और हजार रुपये के नोटों को बैंक में जमा करने का शुक्रवार आखिरी दिन था। ऐसे में बैंकों में पुराने नोटों को जमा करने की भीड़ दिखी। वहीं पुलिस ने नोटबंदी से पहले मालखानों में जमा पुराने नोट की गिनती करा कर अपनी रिपोर्ट शासन को भेज दी है, लेकिन पुलिस पुराने नोट का आंकड़ा नहीं बताया गया। इधर, देहातों में नोटबंदी के बाद कैश की किल्लत अब भी कायम है। बैंकों से लोगों को जरूरत के मुताबिक पैसे नहीं मिल रहे हैं। वहीं एटीएम भी कैशलेस होने से लोग परेशान हैं।
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लीड बैंक मैनेजर एलसी पॉल, केनरा बैंक के मैनेजर आर चंद्रा और एसबीआई के जनसंपर्क अधिकारी धर्मेंद्र चिनवरिया ने बताया कि नोटबंदी के आखिरी दिन भी ग्राहक 1000 और 500 रुपये के पुराने नोट जमा कराने आए। लीड बैंक मैनेजर की माने तो आखिरी दिन जिले की 142 बैंक शाखाओं, ग्रामीण बैंक, सहकारी बैंक  ौर निजी बैंकों में दो लाख रुपये से अधिक जमा हुए हैं। बैंक अधिकारियों ने बताया कि अब ग्रामीण क्षेत्र की बैंक शाखाओं और एटीएम कैश भिजवाना प्राथमिकता है। शुक्रवार को आखिरी दिन बैंकों में शस्त्र लाइसेंस के चालान जमा कराने वालों के अलावा खाते से रुपये निकालने वालों की भीड़ दिखाई दी। वहीं ग्रामीण क्षेत्र में केनरा, ग्रामीण बैंक, सहकारी बैंक, एसबीआई और सेंट्रल बैंक के एटीएम कैशलेस रहे। जबकि बैंकों से भी लोगों को जरूरत के मुताबिक कैश नहीं मिल पा रहा है।
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वहीं पुराने नोटों के जमा करने के आखिरी दिन मालखाने में रखे पुराने नोटों की थानों में गिनती कराई गई। एसएसपी राजेश कृष्ण ने बताया कि मालखानों में जमा पुराने 1000 और 500 रुपये के नोट की गिनती करा कर रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। एसएसपी ने जमा नोट का आंकडा नहीं बताया है। उन्होंने कहा कि मामला कोर्ट में लंबित है। खास बात यह है कि नोटबंदी के बाद बने हालात से अभी तक बाजार और व्यापारी उबर नहीं सके हैं। जलेसर का घंटा-घुंघरु कारोबार भी प्रभावित हुआ है। पचास दिन बाद भी उद्योग की चिमनी से धुआं नहीं निकला है।
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