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इन दस बुराइयों को मारो तो होगा रावण का अंत
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जीटी रोड पर डंपिंग ग्राउंड के बाहर सड़क किनारे लगा कूड़े का ढेर ।संवाद
- फोटो : ETAH
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एटा/कासगंज। बुराइयों के प्रतीक रावण का पुतला शुक्रवार को फूंका जाएगा, लेकिन समाज में व्याप्त बुराइयों को मारे बिना रावण का अंत मुश्किल है। महिला अपराध, घरेलू विवाद, भ्रष्टाचार आदि अपराधों के अलावा प्रदूषण, गंदगी जैसी बुराइयों को खत्म करने के लिए हर व्यक्ति के सहयोग और दृढ़ इच्छाशक्ति की जरूरत है।
दहेज हत्या : दहेज का दंश समाज में जड़ों तक समाया हुआ है। हर साल सैकड़ों मुकदमे दर्ज होते हैं और तमाम विवाहिताएं मौत के घाट उतार दी जाती हैं। इस साल भी अगस्त तक 19 विवाहिताओं की जान दहेज रूपी राक्षस ले चुका है।
दुष्कर्म : पुरुषों की गंदी सोच के रूप में इस राक्षस का रूप हर साल विकराल होता जा रहा है। अगस्त तक महिलाओं-बच्चियों के साथ दुष्कर्म की 75 वारदातें अंजाम दी गईं। सबसे अधिक 11 घटनाएं शहर में हुई हैं।
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अन्य महिला संबंधी अपराध: एक ओर हम साल में दो बार नवरात्र के दौरान देवी रूपों को पूजते हैं। घर में कन्याओं को बुलाकर उनका पूजन करते हैं। इसके बावजूद उन्हें सम्मान और सुरक्षा देने में पीछे हट जाते हैं। साल में महिला संबंधी दर्ज 213 अपराध इस बात की हकीकत बयां करते हैं।
कन्या भ्रूण हत्या : सभ्य समाज की बड़ी बुराई होने के बावजूद इसे अभी तक पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सका है। जिले में 1000 पुरुषों पर 879 महिलाएं हैं। ऐसा नहीं है कि इतना बड़ा अंतर सामान्य हो। पिछले महीने ही यहां हरियाणा की टीम ने छापेमारी कर भ्रूण लिंग जांच का रैकेट पकड़ा था।
मिलावटखोरी : समाज को दीमक की तरह खोखला करने वाली यह बुराई दिनोंदिन बढ़ रही है। हर तरह के खाद्य और पेय पदार्थों में मिलावट के चलते लोग बीमारियों में जकड़ रहे हैं। इस साल अप्रैल से अब तक खाद्य और पेय पदार्थों की जांच में 32 मानक पर खरे नहीं पाए गए।
भ्रष्टाचार : आधुनिक युग के रावण का यह विकराल रूप है, जो बहुत तेजी के साथ बढ़ रहा है। साल में ही दर्जन भर ऑडियो-वीडियो सरकारी अफसरों-कर्मचारियों से संबंधित भ्रष्टाचार के वायरल हो चुके हैं। इसके बावजूद लगाम नहीं लग पा रही।
नशे की दुनिया : नशे की दुनिया बड़ी सामाजिक बुराई बनी हुई है। नशाखोरी से लेकर नशे के कारोबार में बढ़ोतरी हो रही है। पुलिस रिकॉर्ड में बड़ी संख्या में कारोबारी पकड़ जाते हैं, लेकिन कारोबार में कमी नहीं आ सकी।
कूड़ा : शहर के लिए कूड़े के ढेरों का बढ़ता आकार गंदगी के रूप में अभिशाप बनता जा रहा है। हर दिन करीब 55 मीट्रिक टन कूड़ा शहर से निकलता है। जिसके निस्तारण के उचित इंतजाम नहीं हैं। जीटी रोड स्थित डंपिंग ग्राउंड पर करीब 55 हजार मीट्रिक टन कूड़े के ढेर लगे हैं।
जाम : हर चौराहे और तिराहे पर जाम के रावण से रोज सामना होता है। इस रावण के जन्म में सरकारी व्यवस्थाओं के अलावा हम और आप भी जिम्मेदार हैं। नियमों का पालन नहीं करते। जल्दबाजी के चक्कर में जाम का कारण बनते हैं।
बाल श्रम : बाल श्रम रूपी यह रावण शहर में चाय की दुकान, होटल और ढाबों पर सभ्य समाज की कड़वी हकीकत दिखाता है। बाल श्रम अपराध है। इसे बढ़ावा न दें। बच्चों को पढ़ाएं। उन्हें आगे बढ़ने का मौका दें।
बुराइयों के खात्मे पर ही दशहरा सार्थक
दशहरा का शाब्दिक अर्थ है दस को हराने वाला। यह पर्व हमें अपने अंदर के दशानन को पहचानने और उसको दमन करने का संदेश देता है। बिना इनका दमन किए विजय दशमी सार्थक नहीं हो सकती। - ज्ञानेंद्र रावत, लेखक एवं पर्यावरविद, एटा
शिक्षा के प्रति जागरूक हों। समाज में बेरोजगारी बढ़ रही है। उसके पीछे कारण है कि तमाम लोग शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़े हुए हैं। हमें जागरूक होकर समाज को शिक्षित बनाने के लिए आगे आना चाहिए। - मुनेश राजपूत, जिला महामंत्री, प्राशि संघ, कासगंज
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दहेज हत्या : दहेज का दंश समाज में जड़ों तक समाया हुआ है। हर साल सैकड़ों मुकदमे दर्ज होते हैं और तमाम विवाहिताएं मौत के घाट उतार दी जाती हैं। इस साल भी अगस्त तक 19 विवाहिताओं की जान दहेज रूपी राक्षस ले चुका है।
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दुष्कर्म : पुरुषों की गंदी सोच के रूप में इस राक्षस का रूप हर साल विकराल होता जा रहा है। अगस्त तक महिलाओं-बच्चियों के साथ दुष्कर्म की 75 वारदातें अंजाम दी गईं। सबसे अधिक 11 घटनाएं शहर में हुई हैं।
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अन्य महिला संबंधी अपराध: एक ओर हम साल में दो बार नवरात्र के दौरान देवी रूपों को पूजते हैं। घर में कन्याओं को बुलाकर उनका पूजन करते हैं। इसके बावजूद उन्हें सम्मान और सुरक्षा देने में पीछे हट जाते हैं। साल में महिला संबंधी दर्ज 213 अपराध इस बात की हकीकत बयां करते हैं।
कन्या भ्रूण हत्या : सभ्य समाज की बड़ी बुराई होने के बावजूद इसे अभी तक पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सका है। जिले में 1000 पुरुषों पर 879 महिलाएं हैं। ऐसा नहीं है कि इतना बड़ा अंतर सामान्य हो। पिछले महीने ही यहां हरियाणा की टीम ने छापेमारी कर भ्रूण लिंग जांच का रैकेट पकड़ा था।
मिलावटखोरी : समाज को दीमक की तरह खोखला करने वाली यह बुराई दिनोंदिन बढ़ रही है। हर तरह के खाद्य और पेय पदार्थों में मिलावट के चलते लोग बीमारियों में जकड़ रहे हैं। इस साल अप्रैल से अब तक खाद्य और पेय पदार्थों की जांच में 32 मानक पर खरे नहीं पाए गए।
भ्रष्टाचार : आधुनिक युग के रावण का यह विकराल रूप है, जो बहुत तेजी के साथ बढ़ रहा है। साल में ही दर्जन भर ऑडियो-वीडियो सरकारी अफसरों-कर्मचारियों से संबंधित भ्रष्टाचार के वायरल हो चुके हैं। इसके बावजूद लगाम नहीं लग पा रही।
नशे की दुनिया : नशे की दुनिया बड़ी सामाजिक बुराई बनी हुई है। नशाखोरी से लेकर नशे के कारोबार में बढ़ोतरी हो रही है। पुलिस रिकॉर्ड में बड़ी संख्या में कारोबारी पकड़ जाते हैं, लेकिन कारोबार में कमी नहीं आ सकी।
कूड़ा : शहर के लिए कूड़े के ढेरों का बढ़ता आकार गंदगी के रूप में अभिशाप बनता जा रहा है। हर दिन करीब 55 मीट्रिक टन कूड़ा शहर से निकलता है। जिसके निस्तारण के उचित इंतजाम नहीं हैं। जीटी रोड स्थित डंपिंग ग्राउंड पर करीब 55 हजार मीट्रिक टन कूड़े के ढेर लगे हैं।
जाम : हर चौराहे और तिराहे पर जाम के रावण से रोज सामना होता है। इस रावण के जन्म में सरकारी व्यवस्थाओं के अलावा हम और आप भी जिम्मेदार हैं। नियमों का पालन नहीं करते। जल्दबाजी के चक्कर में जाम का कारण बनते हैं।
बाल श्रम : बाल श्रम रूपी यह रावण शहर में चाय की दुकान, होटल और ढाबों पर सभ्य समाज की कड़वी हकीकत दिखाता है। बाल श्रम अपराध है। इसे बढ़ावा न दें। बच्चों को पढ़ाएं। उन्हें आगे बढ़ने का मौका दें।
बुराइयों के खात्मे पर ही दशहरा सार्थक
दशहरा का शाब्दिक अर्थ है दस को हराने वाला। यह पर्व हमें अपने अंदर के दशानन को पहचानने और उसको दमन करने का संदेश देता है। बिना इनका दमन किए विजय दशमी सार्थक नहीं हो सकती। - ज्ञानेंद्र रावत, लेखक एवं पर्यावरविद, एटा
शिक्षा के प्रति जागरूक हों। समाज में बेरोजगारी बढ़ रही है। उसके पीछे कारण है कि तमाम लोग शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़े हुए हैं। हमें जागरूक होकर समाज को शिक्षित बनाने के लिए आगे आना चाहिए। - मुनेश राजपूत, जिला महामंत्री, प्राशि संघ, कासगंज