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ककोड़ा मेले की तैयारियां तेज
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 04 Nov 2016 10:52 PM IST
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ककोड़ा मेले
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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गंगा के बदायूं और कासगंज के तट पर लगने वाले ककोड़ा मेले की तैयारियां शुरू होने लगी है। बदायूं तट पर तैयारियों में तेजी है, जबकि कासगंज तट पर मेले की तैयारियों को लेकर अभी सुस्ती बनी हुई है। ककोड़ा मेला का इतिहास 800 वर्ष पुराना है। मेले की शुरूआत उझानी के नवाब अब्दुला ने की थी। तब से यह मेला निरंतर जारी है।
मान्यता है कि बदायूं के उझानी क्षेत्र के नवाब अब्दुला कुष्ठ रोग से पीड़ित थे जब उन्हें चिकित्सा से कोई लाभ नहीं मिला तो स्वप्न में ककोड़ा देवी ने उसे निरंतर गंगा स्नान पर पूजा करने का स्वप्न दिया। इस स्वप्न पर नवाब अब्दुला ने गंगा स्नान कर देवी की पूजा अर्चना की। जिससे कुष्ठ रोग सही हो गया। तभी से नवाब ने ककोड़ा में मेला लगाने की परंपरा शुरू की। मान्यता है कि ककोड़ा देवी की शक्ति यहां विद्यमान है। अंग्रेजी हुकूमत के समय में भी अंग्रेज शासकों ने इस मेले को विस्तार दिया और मेले लगाने का एक नक्शा बनाया। तभी से यहां तबूंओं का शहर मेला क्षेत्र में बनाया जाने लगा। यह परंपरा आज भी जारी है।
मूलत: यह मेला बदायूं जिले का है, लेकिन गंगा का एक तट कासगंज जनपद में है। जहां मेले की व्यवस्थाएं जिला पंचायत करती है। जो भव्यता बदायूं तट पर मेले की रहती है, ऐसी भव्यता कासगंज तट पर नहीं रहती। कासगंज तट पर कार्तिक पूर्णिमा से दो दिन पूर्व ही व्यवस्थाएं बनाई जाती है, जबकि बदायूं तट पर यह व्यवस्थाएं अभी से शुरू हो गई है। तमाम दुकानदार अपनी दुकानें लगाने लगे है। बदायूं के प्रशासनिक अधिकारी भी निरंतर निरीक्षण का व्यवस्थाओं का जायजा ले रहे है।
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मान्यता है कि बदायूं के उझानी क्षेत्र के नवाब अब्दुला कुष्ठ रोग से पीड़ित थे जब उन्हें चिकित्सा से कोई लाभ नहीं मिला तो स्वप्न में ककोड़ा देवी ने उसे निरंतर गंगा स्नान पर पूजा करने का स्वप्न दिया। इस स्वप्न पर नवाब अब्दुला ने गंगा स्नान कर देवी की पूजा अर्चना की। जिससे कुष्ठ रोग सही हो गया। तभी से नवाब ने ककोड़ा में मेला लगाने की परंपरा शुरू की। मान्यता है कि ककोड़ा देवी की शक्ति यहां विद्यमान है। अंग्रेजी हुकूमत के समय में भी अंग्रेज शासकों ने इस मेले को विस्तार दिया और मेले लगाने का एक नक्शा बनाया। तभी से यहां तबूंओं का शहर मेला क्षेत्र में बनाया जाने लगा। यह परंपरा आज भी जारी है।
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मूलत: यह मेला बदायूं जिले का है, लेकिन गंगा का एक तट कासगंज जनपद में है। जहां मेले की व्यवस्थाएं जिला पंचायत करती है। जो भव्यता बदायूं तट पर मेले की रहती है, ऐसी भव्यता कासगंज तट पर नहीं रहती। कासगंज तट पर कार्तिक पूर्णिमा से दो दिन पूर्व ही व्यवस्थाएं बनाई जाती है, जबकि बदायूं तट पर यह व्यवस्थाएं अभी से शुरू हो गई है। तमाम दुकानदार अपनी दुकानें लगाने लगे है। बदायूं के प्रशासनिक अधिकारी भी निरंतर निरीक्षण का व्यवस्थाओं का जायजा ले रहे है।
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