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शीतगृह फुल, कहां रखा जाए किसानों का आलू
Amar Ujala
Updated Tue, 28 Feb 2017 11:57 PM IST
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शीतगृह फुल, कहां रखा जाए किसानों का आलू
- फोटो : Amar Ujala
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पिछले साल आलू पर मंदी की मार झेल चुके किसान के सामने इस बार भी संकट बना हुआ है। आलू भंडारण के लिए जिले में पर्याप्त स्थान शीत गृहों में नहीं है। वहीं बाहरी मंडियों में भी आलू की मांग नहीं निकल रही। जिसके चलते स्थानीय बाजार में थोक सब्जी मंडी में आलू तीन रुपये किलो बिक रहा है तो फुटकर बाजार में पांच रुपये किलो आलू की बिक्री हो रही है। खेेतों में पैदावार कम निकलने से जहां किसान मायूस था, वहीं उचित कीमत न मिलने के कारण भी किसान अपने आप को ठगा महसूस कर रहा है।
जिले में करीब 15 से 16 लाख क्विंटल आलू का उत्पादन होता है। 11 से 12 लाख क्विंटल आलू के भंडारण की क्षमता जनपद के शीत गृहों में है। अब तक करीब सात लाख क्विंटल आलू का भंडारण क्षमता के अनुरूप हो चुका है। तमाम आलू व्यापारी अग्रिम रूप से आलू भंडारण की बुकिंग करा रहे हैं, लेकिन शीत गृह संचालक 60 फीसदी आलू का भंडारण हो जाने बुकिंग लेना बंद कर दिया है। किसान शीत गृह में आलू का भंडारण करना उचित मान रहे हैं क्योंकि आगामी समय में शायद आलू की अच्छी कीमत मिल जाए जिससे फसल की लागत लौट आए, क्योंकि वर्तमान में आलू का बाजार मूल्य काफी कम है जिससे किसानों के हाथ में लागत भी नहीं पड़ रही। सब्जी कारोबारी बहादुर लाल ने बताया कि थोक मंडी में पचास किलो के आलू का कट्टा डेढ़ सौ रुपये में बिक रहा है। वहीं फुटकर सब्जी मंडी के आलू कारोबारी कुमरेश ने बताया कि आलू का फुटकर भाव पांच रुपये तक का है। उन्होंने बताया कि बाहर की मंडियों में आलू की मांग नहीं है जिससे आलू की कीमतें कम बनीं हुईं हैं। जिले में दो लाख क्विंटल आलू शीत गृहों के बाहर रहने का अनुमान लगाया जा रहा है
बंगाल से नहीं निकल रही आलू की मांग
कासगंज। शीत गृह संचालक मुकेश शर्मा का कहना है कि इस इलाके का आलू बंगाल में बहुत जाता था, लेकिन बंगाल में यहां के आलू की मांग नहीं निकल रही क्योंकि बंगाल में ही आलू की पैदावार अच्छी है। जिस कीमत पर यहां आलू बिक रहा है वहीं कीमत बंगाल में है। उन्होंने बताया कि पूर्वांचल में भी आलू की अच्छी पैदावार है जिसके चलते नेपाल में भी आलू की खपत नहीं हो रही। ऐसी स्थिति में आलू किसान परेशान हैं। उन्होंने बताया कि शीत गृहों में अब तक 60 फीसदी भंडारण हो चुका है।
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किसान हैं भगवान के भरोसे
कासगंज। आलू किसानों ने सब कुछ भगवान के भरोसे छोड़ रखा है। तैय्यबपुर कमालपुर के किसान संदीप कुमार का कहना है कि सबकुछ भगवान भरोसे है। आलू का भंडारण तो शीत गृहों में ही हो सकता है। मजबूरी है कि इस समय आलू के रेट नहीं मिल पा रहे। किसान रामचंद्र का कहना है कि बाजार में आलू की कीमत सही नहीं है कोल्ड स्टोर में लंबी लाइनें लगीं हैं। वह सुबह से आलू लेकर खड़े, लेकिन अभी तक नंबर नहीं आया। किसान जितेंद्र कुमार का कहना है कि नोट बंदी के कारण ज्यादातर किसानों ने आलू की फसल बो दी क्योंकि अन्य फसलों के लिए उसके पास पैसे का इंतजाम नहीं था, ऐसे में आलू की पैदावार अधिक हो गई है और इसी के चलते बाजार में कीमतें कम हैं।
जिले में करीब 15 से 16 लाख क्विंटल आलू का उत्पादन होता है। 11 से 12 लाख क्विंटल आलू के भंडारण की क्षमता जनपद के शीत गृहों में है। अब तक करीब सात लाख क्विंटल आलू का भंडारण क्षमता के अनुरूप हो चुका है। तमाम आलू व्यापारी अग्रिम रूप से आलू भंडारण की बुकिंग करा रहे हैं, लेकिन शीत गृह संचालक 60 फीसदी आलू का भंडारण हो जाने बुकिंग लेना बंद कर दिया है। किसान शीत गृह में आलू का भंडारण करना उचित मान रहे हैं क्योंकि आगामी समय में शायद आलू की अच्छी कीमत मिल जाए जिससे फसल की लागत लौट आए, क्योंकि वर्तमान में आलू का बाजार मूल्य काफी कम है जिससे किसानों के हाथ में लागत भी नहीं पड़ रही। सब्जी कारोबारी बहादुर लाल ने बताया कि थोक मंडी में पचास किलो के आलू का कट्टा डेढ़ सौ रुपये में बिक रहा है। वहीं फुटकर सब्जी मंडी के आलू कारोबारी कुमरेश ने बताया कि आलू का फुटकर भाव पांच रुपये तक का है। उन्होंने बताया कि बाहर की मंडियों में आलू की मांग नहीं है जिससे आलू की कीमतें कम बनीं हुईं हैं। जिले में दो लाख क्विंटल आलू शीत गृहों के बाहर रहने का अनुमान लगाया जा रहा है
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बंगाल से नहीं निकल रही आलू की मांग
कासगंज। शीत गृह संचालक मुकेश शर्मा का कहना है कि इस इलाके का आलू बंगाल में बहुत जाता था, लेकिन बंगाल में यहां के आलू की मांग नहीं निकल रही क्योंकि बंगाल में ही आलू की पैदावार अच्छी है। जिस कीमत पर यहां आलू बिक रहा है वहीं कीमत बंगाल में है। उन्होंने बताया कि पूर्वांचल में भी आलू की अच्छी पैदावार है जिसके चलते नेपाल में भी आलू की खपत नहीं हो रही। ऐसी स्थिति में आलू किसान परेशान हैं। उन्होंने बताया कि शीत गृहों में अब तक 60 फीसदी भंडारण हो चुका है।
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किसान हैं भगवान के भरोसे
कासगंज। आलू किसानों ने सब कुछ भगवान के भरोसे छोड़ रखा है। तैय्यबपुर कमालपुर के किसान संदीप कुमार का कहना है कि सबकुछ भगवान भरोसे है। आलू का भंडारण तो शीत गृहों में ही हो सकता है। मजबूरी है कि इस समय आलू के रेट नहीं मिल पा रहे। किसान रामचंद्र का कहना है कि बाजार में आलू की कीमत सही नहीं है कोल्ड स्टोर में लंबी लाइनें लगीं हैं। वह सुबह से आलू लेकर खड़े, लेकिन अभी तक नंबर नहीं आया। किसान जितेंद्र कुमार का कहना है कि नोट बंदी के कारण ज्यादातर किसानों ने आलू की फसल बो दी क्योंकि अन्य फसलों के लिए उसके पास पैसे का इंतजाम नहीं था, ऐसे में आलू की पैदावार अधिक हो गई है और इसी के चलते बाजार में कीमतें कम हैं।