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Etah News: पांच महीने में नहीं हो सकी शैक्षिक दस्तावेज की जांच
Sun, 14 Jul 2024 11:17 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Sun, 14 Jul 2024 11:17 PM IST
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एटा। अवागढ़ बाल विकास परियोजना की मुख्य सेविका पर फर्जी शैक्षिक अभिलेखों से नौकरी करने का आरोप लगा। इसकी जांच शुरू की गई, जो जिले के बाद निदेशालय स्तर तक पहुंच गई, लेकिन पांच महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी न तो जांच पूरी हुई न इसका कोई नतीजा निकल सका है।
आगरा निवासी एक व्यक्ति ने 2 फरवरी को जिला कार्यक्रम अधिकारी बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग को शिकायत प्रस्तुत की। बताया कि अवागढ़ बाल विकास परियोजना में मुख्य सेविका के पद पर मंजू कुमारी नौकरी कर रही हैं, जो उसके ही गांव की ही रहने वाली हैं। नौकरी प्राप्त करने के लिए उन्होंने फर्जी शैक्षिक प्रमाण पत्र तैयार और वर्तमान में सेवाएं दे रहीं हैं। उनके सभी शैक्षिक अभिलेखों की जांच कराए जाने की मांग की। कोई जांच व कार्रवाई न होने पर 24 मई को जिलाधिकारी को भी शिकायती पत्र दिया। इस पर जांच तो शुरू की गई, लेकिन जिला स्तर की जांच में बिना कुछ भी स्पष्ट किए निदेशालय को पत्र भेज दिया गया।
इसके बाद निदेशालय ने जांच शुरू की। इस पर भी अब तक कुछ नहीं हुआ है। जिला कार्यक्रम अधिकारी संजय सिंह का कहना है कि संबंधित शिक्षण संस्थान को मंजू कुमारी के शैक्षिक अभिलेख सत्यापन के लिए भेजे गए थे। वहां से लिखकर आया था कि यह उनके यहां से संबंधित नहीं हैं। ऐसे में कुछ स्पष्ट नहीं हो सका। जिसके बाद निदेशालय को यह पत्र भेज दिया गया। वहां से जांच की जा रही है। अभी तक किसी तरह की कार्रवाई के निर्देश नहीं मिले हैं।
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आगरा निवासी एक व्यक्ति ने 2 फरवरी को जिला कार्यक्रम अधिकारी बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग को शिकायत प्रस्तुत की। बताया कि अवागढ़ बाल विकास परियोजना में मुख्य सेविका के पद पर मंजू कुमारी नौकरी कर रही हैं, जो उसके ही गांव की ही रहने वाली हैं। नौकरी प्राप्त करने के लिए उन्होंने फर्जी शैक्षिक प्रमाण पत्र तैयार और वर्तमान में सेवाएं दे रहीं हैं। उनके सभी शैक्षिक अभिलेखों की जांच कराए जाने की मांग की। कोई जांच व कार्रवाई न होने पर 24 मई को जिलाधिकारी को भी शिकायती पत्र दिया। इस पर जांच तो शुरू की गई, लेकिन जिला स्तर की जांच में बिना कुछ भी स्पष्ट किए निदेशालय को पत्र भेज दिया गया।
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इसके बाद निदेशालय ने जांच शुरू की। इस पर भी अब तक कुछ नहीं हुआ है। जिला कार्यक्रम अधिकारी संजय सिंह का कहना है कि संबंधित शिक्षण संस्थान को मंजू कुमारी के शैक्षिक अभिलेख सत्यापन के लिए भेजे गए थे। वहां से लिखकर आया था कि यह उनके यहां से संबंधित नहीं हैं। ऐसे में कुछ स्पष्ट नहीं हो सका। जिसके बाद निदेशालय को यह पत्र भेज दिया गया। वहां से जांच की जा रही है। अभी तक किसी तरह की कार्रवाई के निर्देश नहीं मिले हैं।
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