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डीपीटी व हैपेटाइटिस के नहीं लगेंगे टीके
ब्यूरो अमर उजाला, एटा
Updated Tue, 03 Nov 2015 06:35 PM IST
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बच्चों को जानलेवा बीमारियों से बचाव के लिए होने वाले टीकाकरण में स्वास्थ्य विभाग ने नई वैक्सीन के प्रयोग के लिए अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। विभाग ने एएनएम को प्रशिक्षण देकर वैक्सीन से संबंधित जानकारी दी, जिससे उन्हें टीकाकरण के समय दिक्कत न हो।
चिकित्साधीक्षक डा. कृष्ण अवतार ने कहा कि टीकाकरण अभियान के तहत अभी तक डीपीटी एवं हैपेटाइटिस की 3-3 खुराक बच्चों को दी जाती रही है। इनके स्थान पर अब पैंटावैलेंट वैक्सीन दी जाएगी।
इस वैक्सीन के माध्यम से गलघोंटू, काली खांसी, टिटनेस, पीलिया, के अलावा हीमोफिलस इन्फ्ल्यूएंजी टाइप बी से होने वाले निमोनिया व मैनेनजाइटिस से बचाने की क्षमता रखता है। इस वैक्सीन की तीन सुईयां ही बच्चों को लगाई जांएगी।
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बच्चों को बच्चों को हैपेटाइटिस बी की वर्थ डोज, डीपीटी का पहला व दूसरा बूस्टर टीकारण में यथावत बना रहेगा। यह वैक्सीन 6 हफ्ते से एक वर्ष तक के बच्चों को ही लगेंगे।
जिन बच्चों को डीपीटी व हैपेटाइटिस की डोज दी जा चुकी है उनका टीकाकरण इसी से पूरा होगा। उनको पैंटावैलेंट वैक्सीन नहीं दी जाएगी। उन्होंने बताया कि शीघ्र ही इस वैक्सीन का प्रयोग विभाग शुरू कर देगा।
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चिकित्साधीक्षक डा. कृष्ण अवतार ने कहा कि टीकाकरण अभियान के तहत अभी तक डीपीटी एवं हैपेटाइटिस की 3-3 खुराक बच्चों को दी जाती रही है। इनके स्थान पर अब पैंटावैलेंट वैक्सीन दी जाएगी।
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इस वैक्सीन के माध्यम से गलघोंटू, काली खांसी, टिटनेस, पीलिया, के अलावा हीमोफिलस इन्फ्ल्यूएंजी टाइप बी से होने वाले निमोनिया व मैनेनजाइटिस से बचाने की क्षमता रखता है। इस वैक्सीन की तीन सुईयां ही बच्चों को लगाई जांएगी।
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बच्चों को बच्चों को हैपेटाइटिस बी की वर्थ डोज, डीपीटी का पहला व दूसरा बूस्टर टीकारण में यथावत बना रहेगा। यह वैक्सीन 6 हफ्ते से एक वर्ष तक के बच्चों को ही लगेंगे।
जिन बच्चों को डीपीटी व हैपेटाइटिस की डोज दी जा चुकी है उनका टीकाकरण इसी से पूरा होगा। उनको पैंटावैलेंट वैक्सीन नहीं दी जाएगी। उन्होंने बताया कि शीघ्र ही इस वैक्सीन का प्रयोग विभाग शुरू कर देगा।