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छह घंटे डीआईजी की पड़ताल, नतीजा शून्य
ब्यूरो अमर उजाला एटा
Updated Wed, 04 Mar 2015 11:29 PM IST
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मंगलवार को जिला जेल में हुए बवाल के बाद बुधवार दोपहर डीआईजी जेल आगरा जांच के लिए पहुंचे। मगर घंटों पड़ताल के बाद भी यह पता नहीं लगा पाए कि बैरक के अंदर मोबाइल फोन कैसे पहुंचा। इस दौरान डीआईजी के मोबाइल पर कई बार कॉल की गई, मगर फोन नहीं उठा। दूसरी ओर जेल प्रशासन ने तीन बंदियों को दूसरी जेलों में भेज दिया है। वहीं एक बंदीरक्षक को हटाया गया है। अन्य लंबे समय से जमे बंदी रक्षकों की सूची डीएम ने मांगते हुए इस घटना में जेल प्रशासन की लापरवाही मानते हुए अपनी रिपोर्ट शासन को भेज दी है।
बता दें कि मंगलवार सुबह बंदी मनोज पर मोबाइल, सिम मिलने के बाद बवाल हो गया था। बंदियों द्वारा किए गए पथराव में जेलर, डिप्टी जेलर सहित चार सिपाही व पुलिस लाठीचार्ज में छह बंदी घायल हो गए थे। सूचना पर डीएम, एसएसपी के साथ पूरा पुलिस-प्रशासन, पीएसी मौके पर पहुंच गई थी। दो घंटे बाद स्थिति काबू में की। मंडलायुक्त चंद्रकांत व डीआईजी अलीगढ़ गोविंद अग्रवाल भी मौके पर पहुंच गए थे और मामले की जांच डीएम को सौंपी थी।
इधर, बताते हैं कि हाथ में गंभीर चोट होने के चलते जेलर एएन त्रिपाठी को आगरा अस्पताल भेज दिया है।
वहीं बुधवार दोपहर करीब 12 बजे डीआईजी जेल केदारनाथ जिला जेल पहुंचे। सायं तक जेल में जांच को रुके रहे। इस दौरान जेल प्रशासन के साथ बैठक की, वहीं घटना के संबंध में अन्य जानकारियां भी हासिल कीं, लेकिन यह अभी तक नहीं पता लग पाया है कि बैरक में मोबाइल व सिम कहां से पहुंचा। दूसरी ओर जेल में निरुद्ध बंदी मनोज को आगरा, राजेश को अलीगढ़ व पंकज को बदायूं कारागार भेजा है। जेल अधीक्षक ओपी कटियार ने बताया कि जेल में मोबाइल कैसे पहुंचा, इसकी जांच चल रही है।
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तो नहीं खुलती पोल
बताते हैं कि रुटीन चेकिंग के दौरान जेल के अंदर तैनात बंदीरक्षक ही चेकिंग करते थे, मगर मंगलवार को जेल के बाहर पहरा देने वाले बंदी रक्षकों ने चेकिंग की थी। इसके चलते यह मोबाइल मिला। इसके बाद एक बंदी ने सिपाही के साथ मारपीट कर दी। इसके बाद जेल में बवाल हो गया।
तीन सिपाही दूसरी जेलों में शिफ्ट कर दिए हैं। शिकायत मिलने पर एक बंदीरक्षक पुष्पेंद्र को हटा दिया गया है। जेल अधीक्षक से ऐसे बंदी रक्षकों की सूची मांगी है जो लंबे समय से एक ही स्थान पर तैनात हैं। जांच में जेल प्रशासन की ही लापरवाही सामने आई है। वहीं उसने घटना की सूचना भी देरी से दी। इसके चलते यह बवाल हुआ। उन्होंने रिपोर्ट शासन को भेज दी है।
-निधि केसरवानी, जिलाधिकारी
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बता दें कि मंगलवार सुबह बंदी मनोज पर मोबाइल, सिम मिलने के बाद बवाल हो गया था। बंदियों द्वारा किए गए पथराव में जेलर, डिप्टी जेलर सहित चार सिपाही व पुलिस लाठीचार्ज में छह बंदी घायल हो गए थे। सूचना पर डीएम, एसएसपी के साथ पूरा पुलिस-प्रशासन, पीएसी मौके पर पहुंच गई थी। दो घंटे बाद स्थिति काबू में की। मंडलायुक्त चंद्रकांत व डीआईजी अलीगढ़ गोविंद अग्रवाल भी मौके पर पहुंच गए थे और मामले की जांच डीएम को सौंपी थी।
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इधर, बताते हैं कि हाथ में गंभीर चोट होने के चलते जेलर एएन त्रिपाठी को आगरा अस्पताल भेज दिया है।
वहीं बुधवार दोपहर करीब 12 बजे डीआईजी जेल केदारनाथ जिला जेल पहुंचे। सायं तक जेल में जांच को रुके रहे। इस दौरान जेल प्रशासन के साथ बैठक की, वहीं घटना के संबंध में अन्य जानकारियां भी हासिल कीं, लेकिन यह अभी तक नहीं पता लग पाया है कि बैरक में मोबाइल व सिम कहां से पहुंचा। दूसरी ओर जेल में निरुद्ध बंदी मनोज को आगरा, राजेश को अलीगढ़ व पंकज को बदायूं कारागार भेजा है। जेल अधीक्षक ओपी कटियार ने बताया कि जेल में मोबाइल कैसे पहुंचा, इसकी जांच चल रही है।
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तो नहीं खुलती पोल
बताते हैं कि रुटीन चेकिंग के दौरान जेल के अंदर तैनात बंदीरक्षक ही चेकिंग करते थे, मगर मंगलवार को जेल के बाहर पहरा देने वाले बंदी रक्षकों ने चेकिंग की थी। इसके चलते यह मोबाइल मिला। इसके बाद एक बंदी ने सिपाही के साथ मारपीट कर दी। इसके बाद जेल में बवाल हो गया।
तीन सिपाही दूसरी जेलों में शिफ्ट कर दिए हैं। शिकायत मिलने पर एक बंदीरक्षक पुष्पेंद्र को हटा दिया गया है। जेल अधीक्षक से ऐसे बंदी रक्षकों की सूची मांगी है जो लंबे समय से एक ही स्थान पर तैनात हैं। जांच में जेल प्रशासन की ही लापरवाही सामने आई है। वहीं उसने घटना की सूचना भी देरी से दी। इसके चलते यह बवाल हुआ। उन्होंने रिपोर्ट शासन को भेज दी है।
-निधि केसरवानी, जिलाधिकारी