{"_id":"607dc9548ebc3ebd096833cb","slug":"democracy-is-alive-with-their-lofty-intentions-etah-news-agr489201079","type":"story","status":"publish","title_hn":"इनके बुलंद इरादों से जिंदा है लोकतंत्र","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इनके बुलंद इरादों से जिंदा है लोकतंत्र
विज्ञापन
जैथरा में गोद में उठाकर वृद्धा को वोट डालने ले जाता युवक ।
- फोटो : ETAH
एटा। उम्र 102 साल, पैर और शरीर साथ नहीं दे रहा कि चल सकें, लेकिन हसरत है कि लोकतंत्र के यज्ञ में आहुति देने से न चूकें। नाती ने इच्छा पूरी की तो अम्मा उसकी गोद में मतदान केंद्र तक पहुंच गईं। बैठकर अपनी बारी का इंतजार किया और वोट देकर ही वापस आईं। सही मायने में ऐसे लोगों के बुलंद इरादों से लोकतंत्र जिंदा है।
जैथरा क्षेत्र के गांव मोहकमपुर की रहने वाली रज्जो देवी की उम्र 102 साल हो गई है। अपने नाती की गोद में जब पोलिंग बूथ पर पहुंचीं तो सभी की निगाहें उनकी ओर थीं। हैरानी थी तो उनके उत्साह को देखकर लोगों को गर्व भी महसूस हो रहा था। वोट डालने के बाद रज्जो देवी ने बताया कि वह हर चुनाव में मतदान करती आई हैं। इस बार कमजोरी ज्यादा होने की वजह से चलकर नहीं आ सकीं, लेकिन तसल्ली है कि वोट नहीं छूटा।
शीतलपुर क्षेत्र के गांव भागपुर में 80 साल की त्रिवेणी देवी की शारीरिक स्थिति भी कुछ ऐसी ही थी। उनके नाती साइकिल पर बैठाकर मतदान केंद्र तक ले आए। गांव बरौली की रहने वाली 70 साल की कुंता देवी बीमारी की वजह से चलने में असमर्थ थीं तो पुत्र की गोद में मतदान केंद्र पहुंच गईं। बोलीं, वोट डालकर बड़ा सुकून मिला है। कोई लेकर नहीं आता तो मतदान न कर पाने की टीस रह जाती। इन जैसे अन्य भी कई महिला और पुरुष मतदाता नजर आए, जिन्होंने अपनी शारीरिक लाचारी को दरकिनार कर लोकतंत्र के महोत्सव में भागीदारी की।
विज्ञापन
विज्ञापन
जैथरा क्षेत्र के गांव मोहकमपुर की रहने वाली रज्जो देवी की उम्र 102 साल हो गई है। अपने नाती की गोद में जब पोलिंग बूथ पर पहुंचीं तो सभी की निगाहें उनकी ओर थीं। हैरानी थी तो उनके उत्साह को देखकर लोगों को गर्व भी महसूस हो रहा था। वोट डालने के बाद रज्जो देवी ने बताया कि वह हर चुनाव में मतदान करती आई हैं। इस बार कमजोरी ज्यादा होने की वजह से चलकर नहीं आ सकीं, लेकिन तसल्ली है कि वोट नहीं छूटा।
विज्ञापन
शीतलपुर क्षेत्र के गांव भागपुर में 80 साल की त्रिवेणी देवी की शारीरिक स्थिति भी कुछ ऐसी ही थी। उनके नाती साइकिल पर बैठाकर मतदान केंद्र तक ले आए। गांव बरौली की रहने वाली 70 साल की कुंता देवी बीमारी की वजह से चलने में असमर्थ थीं तो पुत्र की गोद में मतदान केंद्र पहुंच गईं। बोलीं, वोट डालकर बड़ा सुकून मिला है। कोई लेकर नहीं आता तो मतदान न कर पाने की टीस रह जाती। इन जैसे अन्य भी कई महिला और पुरुष मतदाता नजर आए, जिन्होंने अपनी शारीरिक लाचारी को दरकिनार कर लोकतंत्र के महोत्सव में भागीदारी की।
विज्ञापन