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नौकरी लगवाने के नाम पर साढ़े पांच लाख ठगे
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एटा। मिनिस्ट्री ऑफ लेबर डिपार्टमेंट में नौकरी लगवाने के नाम पर शातिर ठग ने एक युवक से साढ़े लाख रुपये की ठगी कर ली। शातिर ठग ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर नियुक्ति पत्र भी थमा दिया। पीड़ित को बाद में पता चला कि वह ठगी के शिकार हो गए तो रकम मांगी गई, लेकिन वापस नहीं करने पर मुकदमा दर्ज कराया गया है।
कोतवाली नगर में अभय सिंह पुत्र महीपाल सिंह निवासी नगला डिलाई थाना निधौलीकलां ने नौकरी लगवाने के नाम पर साढ़े पांच लाख रुपये की ठगी का आरोप विनोद ज्वैल पुत्र जीएल ज्वैल निवासी अंकुर अपार्टमेंट आईपी एक्सटेंशन नई दिल्ली पर लगाया है। आरोप है कि सिविल लाइन स्थित एक मिलने वालों के यहां विनोद ज्वैल ने मिनिस्ट्री ऑफ लेवर डिपार्टमेंट भारत सरकार में असिस्टेंट पद पर नौकरी लगवाने का भरोसा दिया था। झांसे में लेकर 21 अक्तूबर 2019 को डेढ़ लाख रुपये नकद व तीन लाख रुपये का चेक ले लिया।
शुरू कर दी गई है, जांच के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
रेलवे में नौकरी के नाम पर युवक से पांच लाख रुपये
एटा। रेलवे में नौकरी लगवाने के नाम पर ठगी करने वाला एक गैंग काम कर रहा है। गैंग के तार लखनऊ और कोलकाता तक जुड़े बताए हैं। जिले में ठगी के शिकार लोग अब रिपोर्ट दर्ज कराने की तैयारी में हैं। फैसल पुत्र शमसुद्दीन ने बताया कि वह विकास भवन में कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर अस्थाई नौकरी कर रहा था। वहां कार्यरत साथी युवक के सकीट निवासी मामा रामनरेश से 2016 उनकी मुलाकात हुई। आरोप है कि रामनरेश ने कहा कि वह मंत्री के कोटे से रेलवे में उनकी नौकरी लगवा देगा। ग्रुप डी कोटे में नौकरी के नाम पर आठ लाख और ग्रु्प सी में पांच लाख रुपये मांगे, बात सात लाख रुपये में तय हुई। फैसल ने दोस्त रिंकू ठाकुर निवासी लालपुर को भी इसके लिए तैयार कर लिया। फैसल ने पांच लाख, 20 हजार रुपये और रिंकू ठाकुर ने सात लाख रुपये कई बार में रामनरेश को दिए।
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बताया कि उनका 14 दिसंबर 2017 को लखनऊ में मेडिकल टेस्ट हुआ। यहां प्रदेश के अलीगढ़, मेरठ, फीरोजाबाद, हाथरस और कासगंज आदि जिलों के 40 युवक पहुंचे। इसके बाद उन्हें तीन माह की ट्रेनिंग के लिए कोलकाता भेज दिया। वहां उन्हें एक कोचिंग सेंटर में एक ही पढ़ाया जाता था। इससे उन्हें शक हुआ। फैसल का आरोप है कि 28 फरवरी 18 को उन्हें नियुक्ति का लेटर भी पकड़ा दिया, पर नौकरी नहीं लगी। आरोपी ने 11 बार फोन नंबर बदले। रुपये लौटाने के नाम पर आनाकानी कर रहा है। दो अक्तूबर 19 को आरोपी उन्हें क्वालिटी शोरूम के सामने पकड़ लिया। यहां उसने तीन माह में रुपये लौटाने का ऐफिडेविट और दो ब्लैंक चेक दिए। तीन माह से उसका इंतजार कर रहे हैं। अब पीड़ित रिपोर्ट दर्ज कराने का मन बना रहे हैं।
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कोतवाली नगर में अभय सिंह पुत्र महीपाल सिंह निवासी नगला डिलाई थाना निधौलीकलां ने नौकरी लगवाने के नाम पर साढ़े पांच लाख रुपये की ठगी का आरोप विनोद ज्वैल पुत्र जीएल ज्वैल निवासी अंकुर अपार्टमेंट आईपी एक्सटेंशन नई दिल्ली पर लगाया है। आरोप है कि सिविल लाइन स्थित एक मिलने वालों के यहां विनोद ज्वैल ने मिनिस्ट्री ऑफ लेवर डिपार्टमेंट भारत सरकार में असिस्टेंट पद पर नौकरी लगवाने का भरोसा दिया था। झांसे में लेकर 21 अक्तूबर 2019 को डेढ़ लाख रुपये नकद व तीन लाख रुपये का चेक ले लिया।
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शुरू कर दी गई है, जांच के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
रेलवे में नौकरी के नाम पर युवक से पांच लाख रुपये
एटा। रेलवे में नौकरी लगवाने के नाम पर ठगी करने वाला एक गैंग काम कर रहा है। गैंग के तार लखनऊ और कोलकाता तक जुड़े बताए हैं। जिले में ठगी के शिकार लोग अब रिपोर्ट दर्ज कराने की तैयारी में हैं। फैसल पुत्र शमसुद्दीन ने बताया कि वह विकास भवन में कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर अस्थाई नौकरी कर रहा था। वहां कार्यरत साथी युवक के सकीट निवासी मामा रामनरेश से 2016 उनकी मुलाकात हुई। आरोप है कि रामनरेश ने कहा कि वह मंत्री के कोटे से रेलवे में उनकी नौकरी लगवा देगा। ग्रुप डी कोटे में नौकरी के नाम पर आठ लाख और ग्रु्प सी में पांच लाख रुपये मांगे, बात सात लाख रुपये में तय हुई। फैसल ने दोस्त रिंकू ठाकुर निवासी लालपुर को भी इसके लिए तैयार कर लिया। फैसल ने पांच लाख, 20 हजार रुपये और रिंकू ठाकुर ने सात लाख रुपये कई बार में रामनरेश को दिए।
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बताया कि उनका 14 दिसंबर 2017 को लखनऊ में मेडिकल टेस्ट हुआ। यहां प्रदेश के अलीगढ़, मेरठ, फीरोजाबाद, हाथरस और कासगंज आदि जिलों के 40 युवक पहुंचे। इसके बाद उन्हें तीन माह की ट्रेनिंग के लिए कोलकाता भेज दिया। वहां उन्हें एक कोचिंग सेंटर में एक ही पढ़ाया जाता था। इससे उन्हें शक हुआ। फैसल का आरोप है कि 28 फरवरी 18 को उन्हें नियुक्ति का लेटर भी पकड़ा दिया, पर नौकरी नहीं लगी। आरोपी ने 11 बार फोन नंबर बदले। रुपये लौटाने के नाम पर आनाकानी कर रहा है। दो अक्तूबर 19 को आरोपी उन्हें क्वालिटी शोरूम के सामने पकड़ लिया। यहां उसने तीन माह में रुपये लौटाने का ऐफिडेविट और दो ब्लैंक चेक दिए। तीन माह से उसका इंतजार कर रहे हैं। अब पीड़ित रिपोर्ट दर्ज कराने का मन बना रहे हैं।