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Etah News: नौकरी के नाम पर 6 लाख की ठगी, जांच के पुलिस ने लिए रुपये
Wed, 05 Feb 2025 11:21 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Wed, 05 Feb 2025 11:21 PM IST
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सांकेतिक
- फोटो : सांकेतिक
अवागढ़। थाना क्षेत्र के गांव मंडपुरा निवासी नरेश कुमार शर्मा ने नगला श्रीकृष्ण थाना सकरौली निवासी शिशुपाल यादव के खिलाफ ठगी का केस दर्ज कराया। वहीं जांच के नाम पर पुलिस पर भी रुपये लेने का आरोप लगाया है।
गांव मंडपुरा निवासी नरेश कुमार शर्मा ने बताया कि लगभग 2 वर्ष पूर्व उसकी मुलाकात शिशुपाल यादव से हुई। शिशुपाल यादव ने मुझे बताया कि स्वास्थ्य विभाग में उसकी अच्छी जान पहचान है और नौकरी लगवा देगा। जब नौकरी लगवाने के बारे में पूछा तो शिशुपाल यादव ने कहा कि डेढ़ लाख रुपये लगेंगे। 50 हजार पहले दे देना एक लाख बाद में देना। जिसके बाद मैंने उसके ऊपर विश्वास करके 50000 रुपये दे दिए। इसके बाद अन्य लोगों से कहा तो मेरे मिलने वाले 12 लोगों ने भी 50-50 हजार करके 6 लाख रुपये शिशुपाल को दे दिए।
इसके बाद आरोपी ने सभी को फर्जी आईडी और नियुक्ति पत्र देते हुए कहा कि आप लोग प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अवागढ़ चले जाओ। वहां अपना ज्वाइनिंग लेटर दिखाकर नौकरी करना शुरू कर दीजिए। वहां पहुंचने पर पता चला कि सब कुछ फर्जी है और सरकारी नौकरी नहीं लगी है। तब सब लोगों ने मिलकर नरेश कुमार के ऊपर दबाव डाला तो उसने झूठे केस में फंसाने की धमकी दी। इसके बाद थाने में शिकायत की गई कोई सुनवाई नहीं हुई तो एसएसपी के यहां प्रार्थना पत्र दिया और आईजीआरएस पर भी शिकायत दर्ज कराई।
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नरेश ने आरोप लगाया कि जांच करने पहुंचे एक पुलिस उपनिरीक्षक ने 10000 रुपये और दूसरे पुलिस उपनिरीक्षक ने 24000 रुपये रिश्वत के लिए लेकिन, कोई काम करके नहीं दिया। बल्कि जांच को प्रभावित करते हुए शिशुपाल के पक्ष में ही बात कही। मामले में सीओ जलेसर नितीश गर्ग का कहना है कि जांच पूरी हो चुकी है। पुलिस पर लगाए गए आरोपों की जांच कराई जा रही है जो भी तथ्य निकलकर सामने आएंगे, उनके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
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गांव मंडपुरा निवासी नरेश कुमार शर्मा ने बताया कि लगभग 2 वर्ष पूर्व उसकी मुलाकात शिशुपाल यादव से हुई। शिशुपाल यादव ने मुझे बताया कि स्वास्थ्य विभाग में उसकी अच्छी जान पहचान है और नौकरी लगवा देगा। जब नौकरी लगवाने के बारे में पूछा तो शिशुपाल यादव ने कहा कि डेढ़ लाख रुपये लगेंगे। 50 हजार पहले दे देना एक लाख बाद में देना। जिसके बाद मैंने उसके ऊपर विश्वास करके 50000 रुपये दे दिए। इसके बाद अन्य लोगों से कहा तो मेरे मिलने वाले 12 लोगों ने भी 50-50 हजार करके 6 लाख रुपये शिशुपाल को दे दिए।
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इसके बाद आरोपी ने सभी को फर्जी आईडी और नियुक्ति पत्र देते हुए कहा कि आप लोग प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अवागढ़ चले जाओ। वहां अपना ज्वाइनिंग लेटर दिखाकर नौकरी करना शुरू कर दीजिए। वहां पहुंचने पर पता चला कि सब कुछ फर्जी है और सरकारी नौकरी नहीं लगी है। तब सब लोगों ने मिलकर नरेश कुमार के ऊपर दबाव डाला तो उसने झूठे केस में फंसाने की धमकी दी। इसके बाद थाने में शिकायत की गई कोई सुनवाई नहीं हुई तो एसएसपी के यहां प्रार्थना पत्र दिया और आईजीआरएस पर भी शिकायत दर्ज कराई।
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नरेश ने आरोप लगाया कि जांच करने पहुंचे एक पुलिस उपनिरीक्षक ने 10000 रुपये और दूसरे पुलिस उपनिरीक्षक ने 24000 रुपये रिश्वत के लिए लेकिन, कोई काम करके नहीं दिया। बल्कि जांच को प्रभावित करते हुए शिशुपाल के पक्ष में ही बात कही। मामले में सीओ जलेसर नितीश गर्ग का कहना है कि जांच पूरी हो चुकी है। पुलिस पर लगाए गए आरोपों की जांच कराई जा रही है जो भी तथ्य निकलकर सामने आएंगे, उनके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।