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बारिश के समय सहावर में कहर ढहती है बूढ़ी गंगा

Tue, 31 May 2016 11:29 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, एटा
अमर उजाला ब्यूरो, एटा Updated Tue, 31 May 2016 11:29 PM IST
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baarish ke samay sahaavar mein kahar dhahatee hai boodhee ganga
सूखी बूढ़ी गंगा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
सहावर इलाके में बूढ़ी गंगा बारिश के दौरान रौद्र रूप धारण कर लेती है। बाढ़ के हालातों में तो डेढ़ दर्जन गांव का जनजीवन पूरी तरह से ठप हो जाता है और गांव के गांव बाढ़ के पानी से घिर जाते है। पिछले समय में कई जानें बाढ़ के दौरान जा चुकी है। पशु धन हानि का सामना भी लोगों को करना पड़ा है, लेकिन बूढ़ी गंगा की उथली धारा को सही करने के सिंचाई विभाग ने कोई प्रयास नहीं किए है। 
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बूढ़ी गंगा के प्रभाव से इलाके के याकूतगंज, भरतपुर, पटना, सागरपुर, ताली, माधौनगला, खाता, फरीदपुर, नगला कुबेर, गूदरागंज, ईश्वरी नगला, सतरोई नगला, नगला रते, उजीर का नगला, नागर, भीकमपुर, कंचनपुर, जौहरी, कनोई, मड़िया, अंधा नगला, काईया, सादिकपुर, नगला चौबे, रामछितौनी, रायो, फतेहपुर, तेज नगला सहित अन्य गांव बूढ़ी गंगा की बाढ़ के शिकार होते है। इन गांव के लोगों को हर बार बाढ़ के दौरान क्षति का सामना करना पड़ता है। पहले तो बूढ़ी गंगा इन गांव के लिए वरदान होती थी क्योंकि बूढ़ी गंगा की तलहटी भी साफ थी और पानी भी रहता था। ऐसी स्थिति में लोग खेतीबाड़ी सिंचाई, बूढ़ी गंगा से करते थे लेकिन जब से बूढ़ी गंगा की धारा मृत हुई है तब से बारिश के दौरान बाढ़ के हालात पैदा होते है। गंगा की मुख्य धारा में जलस्तर बढ़ने के साथ ही बूढ़ी गंगा में भी विभिन्न इलाकों से पानी आने लगता है। जिससे बूढ़ी गंगा का उफान और तीव्र हो जाता है। पिछले समय की बाढ़ के दौरान नगला सालिग निवासी चंदन की पत्नी की डूबकर मौत हो गई थी। बाढ़ के पानी से नगला कुबेर निवासी जितेंद्र की मौत हुई थी। वहीं रामौतार, सूरजपाल, मनोज कुमार, बृजपाल, जगदीश कुमार आदि किसानों को पशु हानि का सामना करना पड़ा। इस बार भी बूढ़ी गंगा में बाढ़ के हालात पैदा हुए तो इन इलाकों में कहर के हालात पैदा हो सकत है। ग्रामीण अभी से चिंतित है। 
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नगला सादिक के जगदीश का कहना है कि बूढ़ी गंगा कई बार इलाके में तबाही मचा चुकी है लेकिन कभी किसी अधिकारी ने सुध नहीं ली। गांव वाले बहुत परेशानी उठाते है। सबसे पहले बाढ़ आने पर उनके गांव में पानी घुसता है। 
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नगला सादिक के सूरज ने बताया कि बाढ़ में गांव के लोगों की मौतें भी हुई है और पशु भी मरे है। गरीबों का सहारा बाढ़ में छिन जाता है। ऐसे में बस भगवान की रहम पर ही भरोसा रहता है। 


बाढ़ निरोधी कार्य योजना को तैयार किया जा रहा है। प्रभावित होने वाले इलाकों के लिए कार्य योजना तैयार होगी। बाढ़ चौकी बनेगी जिससे ग्रामीणों को बाढ़ के दौरान दिक्कतों का सामना न करना पड़े।
                        - हरी शर्मा, अधिशासी अभियंता सिंचाई। 
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