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Etah News: मां महागौरी से सदा सुहागिन रहने का मांगा वरदान

Tue, 16 Apr 2024 11:53 PM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा Updated Tue, 16 Apr 2024 11:53 PM IST
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Asked for boon from Mother Mahagauri to remain married forever
एटा। चैत्र नवरात्रि का आठवां दिन भक्तों के लिए बेहद खास होता है। मंगलवार को मां दुर्गा के आठवें स्वरूप महागौरी की पूजा व आराधना की गई। हिंदू धर्म में महाअष्टमी का विशेष महत्व होता है, कहा जाता है कि मां महागौरी की सच्चे मन और श्रद्धा से पूजा करने वाले के पाप मिट जाते हैं और महिलाओं को अखंड सुहाग सौभाग्य की प्राप्ति होती है। मां गौरी मनोवांछित फलों को देने वाली और शरीर में उत्पन्न नाना प्रकार के रोग, शोक, व्याधि आदि का अंत कर जीवन को आरोग्यता से पूर्ण करती हैं।
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जीटी रोड स्थित जनता दुर्गा मंदिर के पुजारी चंद्रप्रकाश गुप्ता उर्फ गांधी ने बताया कि चैत्र नवरात्रि में बहुत से भक्त 9 दिन का उपवास रखते हैं और कुछ सिर्फ प्रतिपदा यानि अष्टमी तिथि के दिन ही व्रत रखते हैं। देवीभगवत पुराण के अनुसार, नवरात्रि के 8वें दिन की पूजा मां दुर्गा के मूल भाव की पूजा होती है।
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महादेव के साथ उनकी पत्नी के रूप में महागौरी सदैव विराजमान होती हैं, यही कारण है कि उन्हें शिवा नाम से भी पुकारा जाता है। कहा कि मां महागौरी का स्वरूप उज्जवल कोमल, श्वेत वर्ण, श्वेत वस्त्रधारी है. अपने भक्तों के लिए मां अन्नपूर्णा स्वरूप हैं। उनकी चार भुजाएं हैं और मां बैल की सवारी करती हैं।
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मान्यता है कि मां की पूजा करने से ही हर तरह के दुख नष्ट हो जाते हैं। नवरात्रि की महाअष्टमी के दिन अगर भक्त के हृदय में सच्ची साधना की अभिलाषा विद्यमान हो, तो भगवती उसे जीवन के समस्त सुख-सुविधा प्रदान करती है।

परमकृपालु मां महागौरी कठिन तपस्या कर गौरवर्ण को प्राप्त कर भगवती महागौरी के नाम से सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में विख्यात हुईं। महागौरी मां दुर्गा की शक्ति का आठवां विग्रह स्वरूप हैं। कहा कि शास्त्रों में वर्णित इनकी उपासना से भक्त के जन्म-जन्मांतर के पाप धुल जाते हैं और मार्ग से भटका हुआ भी संमार्ग पर आ जाता है। महागौरी की उत्पत्ति कथा मां पार्वती से ही जुड़ता है। पार्वती के रूप में इन्होंने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए बड़ी कठोर तपस्या की थी। कठोर तप के कारण उनकी देह क्षीण और वर्ण काला पड़ गया था।
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