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Etah News: थाने से डीएम दफ्तर तक भटकते रहे थे अधिवक्ता व परिजन, नहीं मिला न्याय
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एटा। दफ्तरों में हर रोज दो घंटे जनसुनवाई, थाना दिवस, तहसील समाधान दिवस का आयोजन इसलिए किया जाता है कि लोगों की समस्याएं सुलर्झाइं जाएं और उन्हें न्याय दिलाया जाए, लेकिन भावन नगर के अधिवक्ता और उनके परिजन पुलिस की पिटाई से घायल होने के बाद थाने से लेकर एसएसपी और डीएम दफ्तर तक भटके, अफसरों ने अधीनस्थों के खिलाफ कुछ सुनना पसंद ही नहीं किया। अब अदालत से तहसीलदार, थानाध्यक्ष सहित नौ लोगों पर रिपोर्ट दर्ज कराने के आदेश से खलबली मची हुई है।
अधिवक्ता सुरेंद्र कुमार निवासी भावन नगर ने बताया कि जमीन का विवाद गांव के दो पक्षों का था, लेकिन राजनीतिक हस्तक्षेप के चलते प्रशासन-पुलिस ने दूसरे पक्ष को संरक्षण दिया। 16 जुलाई 2022 को दोनों पक्षों में झगड़ा हुआ, लेकिन केवल हमारे पक्ष पर रिपोर्ट दर्ज की गई। इसके बाद 30 अक्तूबर को अधिकारियों ने खड़े होकर हमारी जमीन पर जबरन चकरोड डलवाई। विरोध करने पर हम लोगों की पिटाई की गई, महिलाओं को बेइज्जत किया। इसके बाद हम लोगों पर ही टीम पर पथराव, सरकारी कार्य में बाधा की रिपोर्ट दर्ज कर दी गई। जबकि हमारी ओर से 16 लोग घायल हुए। थाने में उसकी तहरीर ही नहीं ली।
अगले दिन 31 अक्तूबर को परिवार के महिला-पुरुष बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों को साथ लेकर एसएसपी से मिले। रिपोर्ट दर्ज कराना तो दूर डॉक्टरी मुआयना तक के लिए नहीं लिखा गया। उसी दिन एडीएम प्रशासन के आदेश पर 16 घायलों का चिकित्सकीय परीक्षण किया गया। इसके बाद 2 अक्तूबर, 9 अक्तूबर, 1 दिसंबर को मिलकर और रजिस्ट्री कर मुकदमा दर्ज करने की मांग करते रहे। डीआईजी, आईजी, डीजीपी, मुख्यमंत्री तक को रजिस्ट्री भेजीं, लेकिन हमारी रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। मजबूर होकर 5 दिसंबर को न्यायालय में प्रार्थना पत्र दायर किया।
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अधिवक्ता सुरेंद्र कुमार निवासी भावन नगर ने बताया कि जमीन का विवाद गांव के दो पक्षों का था, लेकिन राजनीतिक हस्तक्षेप के चलते प्रशासन-पुलिस ने दूसरे पक्ष को संरक्षण दिया। 16 जुलाई 2022 को दोनों पक्षों में झगड़ा हुआ, लेकिन केवल हमारे पक्ष पर रिपोर्ट दर्ज की गई। इसके बाद 30 अक्तूबर को अधिकारियों ने खड़े होकर हमारी जमीन पर जबरन चकरोड डलवाई। विरोध करने पर हम लोगों की पिटाई की गई, महिलाओं को बेइज्जत किया। इसके बाद हम लोगों पर ही टीम पर पथराव, सरकारी कार्य में बाधा की रिपोर्ट दर्ज कर दी गई। जबकि हमारी ओर से 16 लोग घायल हुए। थाने में उसकी तहरीर ही नहीं ली।
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अगले दिन 31 अक्तूबर को परिवार के महिला-पुरुष बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों को साथ लेकर एसएसपी से मिले। रिपोर्ट दर्ज कराना तो दूर डॉक्टरी मुआयना तक के लिए नहीं लिखा गया। उसी दिन एडीएम प्रशासन के आदेश पर 16 घायलों का चिकित्सकीय परीक्षण किया गया। इसके बाद 2 अक्तूबर, 9 अक्तूबर, 1 दिसंबर को मिलकर और रजिस्ट्री कर मुकदमा दर्ज करने की मांग करते रहे। डीआईजी, आईजी, डीजीपी, मुख्यमंत्री तक को रजिस्ट्री भेजीं, लेकिन हमारी रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। मजबूर होकर 5 दिसंबर को न्यायालय में प्रार्थना पत्र दायर किया।
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