{"_id":"67d1c5098251d057d80acd5c","slug":"50000-plants-were-planted-on-the-highway-not-even-500-grew-etah-news-c-163-1-eta1001-130888-2025-03-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Etah News: हाईवे पर 50000 पौधे रोपे, 500 भी नहीं पनपे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Etah News: हाईवे पर 50000 पौधे रोपे, 500 भी नहीं पनपे
Wed, 12 Mar 2025 11:01 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Wed, 12 Mar 2025 11:01 PM IST
विज्ञापन
राजा का रामपुर में ढाका की जमीन की जांच-पड़ताल करती वन विभाग की टीम।
- फोटो : राजा का रामपुर में ढाका की जमीन की जांच-पड़ताल करती वन विभाग की टीम।
एटा। जिले के अंदर से गुजर रहे 45 किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग-34 पर हरियाली के सपनों में जिम्मेदार ही बाधा बने हुए हैं। यहां करीब 50 हजार पौधे रोपे जा चुके हैं, लेकिन 500 भी पनपकर पेड़ नहीं बन सके। पौधों की देखभाल और संरक्षण के कोई इंतजाम नहीं किए जा रहे।
अलीगढ़-कानपुर हाईवे का 45 किलोमीटर का क्षेत्र जिले में आता है। हर वर्ष हाईवे के दोनों और किनारों पर पौधरोपण किया जाता है। इसके बाद भी अभी तक किसी प्रकार की हरियाली हाईवे के आसपास दिखाई नहीं दे रही है। पौधे लगाए जाते हैं और कुछ समय बाद ही या तो वह स्वयं ही सूख जाते हैं या फिर उनको पशु खा जाते हैं। जिम्मेदारों की लापरवाही की वजह से सूखे हुए पौधों की जगह नए पौधे भी नहीं रोपे गए हैं। हाईवे पर आज भी कई स्थानों पर जगह वीरान पड़ी हुई है और जहां पौधे लगे वो सूख चुके हैं। इनके रखरखाव के लिए किसी की कोई जिम्मेदारी सामने नहीं आ रही है।
हाईवे निर्माण से पहले दोनों और फलदार और छाया वाले वृक्ष देते थे सुकून
इस 45 किलोमीटर लंबे हाईवे पर फोरलेन निर्माण से पहले जगह-जगह जामुन, आम, नीम, पीपल और बरगद के अलावा अन्य फलों वाले व छायादार वृक्ष लगे हुए थे। इसके चलते इधर से गुजरने वाले राहगीरों को सुकून और शीतलता मिलती थी। हाईवे निर्माण के लिए इन वृक्षों को काट दिया गया और पौधों का रोपण सिर्फ खानापूर्ति के लिए किया गया।
विज्ञापन
किनारे खाली, कहां गए रोपे गए पौधे
हाईवे निर्माण के बाद 2021-22 में डिवाइडर पर 24975 और सड़क के दोनों और 5083 पौधे रोपे गए थे। 2022-23 में डिवाइडर पर 3750 और सड़क के दोनों ओर 4000 पौधे गए। 2023-24 में डिवाइडर पर 6118 और सड़क के दोनों और 3142 पौधों का रोपण किया गया। इसी प्रकार 2024-25 में लगभग 10000 पौधों का रोपण किया गया है। देखरेख का अभाव और जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते नाम मात्र के लिए कुछ पौधे ही खड़े दिखाई दे रहे हैं। डिवाइडर पर जरूर कुछ हरियाली दिखती है।
विज्ञापन
अलीगढ़-कानपुर हाईवे का 45 किलोमीटर का क्षेत्र जिले में आता है। हर वर्ष हाईवे के दोनों और किनारों पर पौधरोपण किया जाता है। इसके बाद भी अभी तक किसी प्रकार की हरियाली हाईवे के आसपास दिखाई नहीं दे रही है। पौधे लगाए जाते हैं और कुछ समय बाद ही या तो वह स्वयं ही सूख जाते हैं या फिर उनको पशु खा जाते हैं। जिम्मेदारों की लापरवाही की वजह से सूखे हुए पौधों की जगह नए पौधे भी नहीं रोपे गए हैं। हाईवे पर आज भी कई स्थानों पर जगह वीरान पड़ी हुई है और जहां पौधे लगे वो सूख चुके हैं। इनके रखरखाव के लिए किसी की कोई जिम्मेदारी सामने नहीं आ रही है।
विज्ञापन
हाईवे निर्माण से पहले दोनों और फलदार और छाया वाले वृक्ष देते थे सुकून
इस 45 किलोमीटर लंबे हाईवे पर फोरलेन निर्माण से पहले जगह-जगह जामुन, आम, नीम, पीपल और बरगद के अलावा अन्य फलों वाले व छायादार वृक्ष लगे हुए थे। इसके चलते इधर से गुजरने वाले राहगीरों को सुकून और शीतलता मिलती थी। हाईवे निर्माण के लिए इन वृक्षों को काट दिया गया और पौधों का रोपण सिर्फ खानापूर्ति के लिए किया गया।
विज्ञापन
किनारे खाली, कहां गए रोपे गए पौधे
हाईवे निर्माण के बाद 2021-22 में डिवाइडर पर 24975 और सड़क के दोनों और 5083 पौधे रोपे गए थे। 2022-23 में डिवाइडर पर 3750 और सड़क के दोनों ओर 4000 पौधे गए। 2023-24 में डिवाइडर पर 6118 और सड़क के दोनों और 3142 पौधों का रोपण किया गया। इसी प्रकार 2024-25 में लगभग 10000 पौधों का रोपण किया गया है। देखरेख का अभाव और जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते नाम मात्र के लिए कुछ पौधे ही खड़े दिखाई दे रहे हैं। डिवाइडर पर जरूर कुछ हरियाली दिखती है।

राजा का रामपुर में ढाका की जमीन की जांच-पड़ताल करती वन विभाग की टीम। - फोटो : राजा का रामपुर में ढाका की जमीन की जांच-पड़ताल करती वन विभाग की टीम।