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11 माह में 15 महिलाअो से दरिंदगी
ब्यूरो अमर उजाला एटा
Updated Mon, 15 Dec 2014 11:16 PM IST
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आधी आबादी की सुरक्षा का सवाल आज भी बना हुआ है। 11 माह में 15 महिलाएं जिले में दुष्कर्म की शिकार हुई। वहीं 80 किशोरियों का अपहरण के मामले सामने आए। मंगलवार को निर्भया कांड की बरसी है। इस घटना से भी समाज ने कोई सबक नहीं लिया।
निर्भया कांड के बाद पास्को एक्ट भी बनाया गया लेकिन हालात में कोई सुधार नहीं आया। छात्राओं, महिलाओं पर अश्लील फब्तियां कसने और छेड़छाड़ की घटनाएं नहीं रुक रही हैं। छात्राओं का पीछा करने के मामले भी बढ़ रहे हैं। दुष्कर्म के मामले भी तेजी से बड़ रहे हैं। अपराध रोकने के लिए बने कानूनों का खौफ भी लोगों पर नजर नहीं आता। पुलिस भी दुष्कर्म के मामले आसानी से दर्ज नहीं करती।
तीन वषों के आंकड़े 30 नवंबर तक
अपराध 2012 2013 2014
बलात्कार 12 13 15
अपहरण 49 72 80
शीलभंग 30 35 48
हत्या 10 11 3
छेड़खानी 5 7 4
महिलाओं की कुल आबादी 789257
0-6 वर्ष तक की बालिकाएं 136262
7-17 वर्ष तक की आयु की बालिकाएं 232237
18-40 वर्ष तक की आयु की युवतियां 271627
महिलाओं की सुरक्षा के इंतजाम
महिला थाना प्रभारी 1
कांस्टेबिल 35
हेल्प लाइन का नहीं होता उपयोग
महिलाओं की सुरक्षा के लिए महिला हेल्प लाइन बनी हुई है। इसके प्रति जागरुक करने को पुलिस गंभीर नहीं रहती। बालिका कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम नहीं होते। आज तक एक भी शिकायत इस हेल्प लाइन पर दर्ज नहीं हुई है।
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महिलाओं के साथ होने वाले उत्पीड़न को रोकने के लिए मात्र कानून बनाने से ही काम नहीं चलेगा। कानून का सही पालन होना भी जरूरी है। सुरक्षा के प्रति पुलिस प्रशासन गंभीर नहीं है। समाज में भी जागरूकता लाने की जरूरत है।
-प्रवीन दीक्षित
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निर्भया कांड के बाद पास्को एक्ट भी बनाया गया लेकिन हालात में कोई सुधार नहीं आया। छात्राओं, महिलाओं पर अश्लील फब्तियां कसने और छेड़छाड़ की घटनाएं नहीं रुक रही हैं। छात्राओं का पीछा करने के मामले भी बढ़ रहे हैं। दुष्कर्म के मामले भी तेजी से बड़ रहे हैं। अपराध रोकने के लिए बने कानूनों का खौफ भी लोगों पर नजर नहीं आता। पुलिस भी दुष्कर्म के मामले आसानी से दर्ज नहीं करती।
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तीन वषों के आंकड़े 30 नवंबर तक
अपराध 2012 2013 2014
बलात्कार 12 13 15
अपहरण 49 72 80
शीलभंग 30 35 48
हत्या 10 11 3
छेड़खानी 5 7 4
महिलाओं की कुल आबादी 789257
0-6 वर्ष तक की बालिकाएं 136262
7-17 वर्ष तक की आयु की बालिकाएं 232237
18-40 वर्ष तक की आयु की युवतियां 271627
महिलाओं की सुरक्षा के इंतजाम
महिला थाना प्रभारी 1
कांस्टेबिल 35
हेल्प लाइन का नहीं होता उपयोग
महिलाओं की सुरक्षा के लिए महिला हेल्प लाइन बनी हुई है। इसके प्रति जागरुक करने को पुलिस गंभीर नहीं रहती। बालिका कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम नहीं होते। आज तक एक भी शिकायत इस हेल्प लाइन पर दर्ज नहीं हुई है।
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महिलाओं के साथ होने वाले उत्पीड़न को रोकने के लिए मात्र कानून बनाने से ही काम नहीं चलेगा। कानून का सही पालन होना भी जरूरी है। सुरक्षा के प्रति पुलिस प्रशासन गंभीर नहीं है। समाज में भी जागरूकता लाने की जरूरत है।
-प्रवीन दीक्षित