{"_id":"5720fe5d4f1c1b0a61a91e72","slug":"11-karod-kharch-phir-bhee-taalaabon-ke-kanth-sookhe","type":"story","status":"publish","title_hn":"11 करोड़ खर्च फिर भी तालाबों के कंठ सूखे ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
11 करोड़ खर्च फिर भी तालाबों के कंठ सूखे
अमर उजाला ब्यूरो, एटा
Updated Wed, 27 Apr 2016 11:33 PM IST
विज्ञापन
आदर्श तालाब प्यासे
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जनपद में पांच वर्ष पूर्व खुदवाए गए आदर्श तालाब प्यासे हैं। इन तालाबों में पानी भरने के प्रयास आज तक नहीं किए गए।
जिले में जल स्तर बढ़ाने के लिए वित्तीय वर्ष 2010-11 में तालाबों की खुदाई कराई गई थी। उस समय की 389 ग्राम पंचायतों में आदर्श तालाब तैयार कराने की व्यवस्था की गई। एक तालाब के निर्माण पर तीन लाख रुपये खर्च निर्धारित किया गया। यह धन तो ग्राम पंचायतों ने खर्च कर लिया, लेकिन आदर्श तालाब के निर्माण के नाम पर खानापूरी की गई। इन तालाबों में नहरों नलकूपों के माध्यम से पानी आज तक नहीं भरवाया गया। अधिकांश तालाबों के आसपास पेड-पौधों का अभाव है। बेंच आदि भी तालाबों के आसपास नजर नहीं आती। तालाबों के निर्माण पर खर्च हुए 11 करोड़ 67 लाख रुपये यूं ही व्यर्थ चले गए। पानी न होने से ये तालाब आज न तो जल स्तर बढ़ाने के काम आ रहे और न ही ग्रामीणों के पिकनिक स्पॉट ही बन सके।
उपले पाथने के काम आ रहे तालाब
कासगंज। अधिकांश तालाब अतिक्रमण का शिकार है। ग्रामीण इन तालाबों में उपले पाथने का काम करते हैं। जनपद के कुंवरपुर, ढोलना, फरीदपुर सहित अधिकांश तालाबों के हालात एक जैसे है। बच्चे यहां खेलते नजर आते हैं।
तालाबों की जांच कराई जाएगी, जो भी तालाब सूखे मिलेंगे या उनमें कब्जा आदि मिलेगा उसको हटवाकर भरवाने की व्यवस्था कराई जाएगी।
-रमेश चंद्र परियोजना निदेशक डीआरडीए
विज्ञापन
जिले में जल स्तर बढ़ाने के लिए वित्तीय वर्ष 2010-11 में तालाबों की खुदाई कराई गई थी। उस समय की 389 ग्राम पंचायतों में आदर्श तालाब तैयार कराने की व्यवस्था की गई। एक तालाब के निर्माण पर तीन लाख रुपये खर्च निर्धारित किया गया। यह धन तो ग्राम पंचायतों ने खर्च कर लिया, लेकिन आदर्श तालाब के निर्माण के नाम पर खानापूरी की गई। इन तालाबों में नहरों नलकूपों के माध्यम से पानी आज तक नहीं भरवाया गया। अधिकांश तालाबों के आसपास पेड-पौधों का अभाव है। बेंच आदि भी तालाबों के आसपास नजर नहीं आती। तालाबों के निर्माण पर खर्च हुए 11 करोड़ 67 लाख रुपये यूं ही व्यर्थ चले गए। पानी न होने से ये तालाब आज न तो जल स्तर बढ़ाने के काम आ रहे और न ही ग्रामीणों के पिकनिक स्पॉट ही बन सके।
उपले पाथने के काम आ रहे तालाब
कासगंज। अधिकांश तालाब अतिक्रमण का शिकार है। ग्रामीण इन तालाबों में उपले पाथने का काम करते हैं। जनपद के कुंवरपुर, ढोलना, फरीदपुर सहित अधिकांश तालाबों के हालात एक जैसे है। बच्चे यहां खेलते नजर आते हैं।
विज्ञापन
तालाबों की जांच कराई जाएगी, जो भी तालाब सूखे मिलेंगे या उनमें कब्जा आदि मिलेगा उसको हटवाकर भरवाने की व्यवस्था कराई जाएगी।
-रमेश चंद्र परियोजना निदेशक डीआरडीए