बाबा विश्वनाथ मंदिर के लोकार्पण पर भी सूने रहे कई घाट: प्रधानमंत्री की मौजूदगी में भी होती रही बिजली कटौती
काशी घूमने आए औरंगाबाद के एक पर्यटक ने कहा कि इतने प्रमुख अवसर पर तुलसी घाट, हनुमान और दरभंगा घाट जैसे दर्जनों प्रमुख घाटों पर रंगाई-पुताई न करके भी प्रशासन ने केवल यही दिखाने की कोशिश की कि जहां तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नजरें जाएं, वहां तक रंगाई-पुताई और रोशनी कर दी जाए, बाकी घाट किसी भी स्थिति में पड़े रहें...
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प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार को बाबा विश्वनाथ मंदिर का लोकार्पण कर दिया। इस अवसर पर पूरी वाराणसी नगरी अध्यात्म के रंग में सराबोर रही। चौड़ी साफ-सुथरी सड़कें, हर चौराहे पर सजी लाइटिंग और गंगा के तट पर दिवाली जैसा माहौल लोगों को अनुपम आध्यात्मिक सुख से परिचित करा रहा था। लोग इसे सनातन धर्म के सांस्कृतिक पुनर्जागरण के तौर पर देख रहे हैं। लेकिन इस पवित्र अवसर पर भी रामचरित मानस के रचयिता बाबा तुलसीदास का घाट हो या हनुमान घाट, हरिश्चंद्र घाट हो या राजा घाट फीके-फीके रह गए। इन घाटों की रंगाई-पुताई करने की जरूरत नहीं समझी गई, जबकि ललित घाट से लेकर दशाश्वमेध घाट तक के मुख्य कार्यक्रम स्थल पर खूब चमक-दमक दिखाई देती रही।
कार्यक्रम में चार पीठों के शंकराचार्य के न होने पर उठे सवाल
आईआईटी, बीएचयू के प्रोफेसर विश्वंभर नाथ मिश्र ने अमर उजाला से कहा कि काशी अनादि और अनंत काल से यहां पर विद्यमान रही है। ऐसे में यदि कोई यह दावा करे कि वह बाबा विश्वनाथ मंदिर का लोकार्पण कर रहा है, तो यह हास्यास्पद है। लोकार्पण किसी नई चीज का किया जाता है, जो अनादि-अनंत है, उसका लोकार्पण कैसे किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि काशी अध्यात्म की नगरी है, अध्यात्म दिखाई देने वाली चीज नहीं, अनुभव करने वाली चीज है। इसे पांच सितारा होटलों, चौड़ी सड़कों और बड़े-बड़े महलों के निर्माण से नहीं समझा जा सकता। इसके लिए व्यक्ति को आध्यात्मिक होना पड़ता है, जिसके लिए अध्यात्म के ज्ञान की आवश्यकता होती है। उन्होंने इस कार्यक्रम में चार पीठों के शंकराचार्य के न होने पर भी सवाल उठाए।
बेरोजगारी और महंगाई से जनता परेशान
तुलसी घाट के प्रमुख विश्वंभर नाथ मिश्र ने कहा कि यूपी सरकार और प्रधानमंत्री मोदी जनता की वास्तविक समस्याओं का समाधान नहीं कर रहे हैं, बल्कि अपनी जिम्मेदारियों से बचने के लिए धर्म के मुद्दे के पहाड़ के पीछे छिपने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसी बनारस में इस समय भी लाखों युवा बेरोजगार हैं, लोगों के सामने महंगाई का संकट है, लोगों का जीना मुहाल हो गया है, लेकिन सरकार इन वास्तविक समस्याओं का समाधान करने की बजाय महलों का निर्माण करा रही है। इससे काशी की वास्तविक समस्याओं का समाधान नहीं हो सकता।
मंदिर के लोकार्पण समारोह के अवसर पर ललिता घाट और दशाश्वमेध घाट तो खूब रंग रोगन और रोशनी से नहाए रहे, लेकिन इसके आगे के सभी घाटों पर कोई रंगाई-पुताई नहीं की गई। हालांकि बेसिक शिक्षा विभाग और अन्य संस्थाओं को जिम्मेदारियां देकर सभी घाटों पर दीप जलाने का काम कर उन्हें प्रकाशित अवश्य कर दिया गया।
कई घाटों पर अभी चल रहा है निर्माण कार्य
स्थानीय लोगों ने अमर उजाला को बताया कि दशाश्वमेध घाट जैसे प्रमुख स्थल पर भी अब तक पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था नहीं थी। कुछ लाइटें प्रधानमंत्री मोदी के कार्यक्रम के दिन लगाई गईं, जबकि अन्य घाटों पर अभी भी पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था नहीं है। घाट के एक नाविक सुनील निषाद ने अमर उजाला को बताया कि दशाश्वमेध घाट पर अभी भी निर्माण कार्य जारी है, ललिता घाट पर भी अभी कार्य पूरा नहीं हुआ है, लेकिन इसके बाद भी अभी ही लोकार्पण कार्यक्रम संपन्न करा दिया गया। यह सरकार की चुनावी मजबूरी को दिखाता है। यदि लोकार्पण करना था तो इसके पहले इस पूरे निर्माण कार्य को पूरा करा दिया जाना चाहिए था।
काशी घूमने आए औरंगाबाद के एक पर्यटक ने कहा कि इतने प्रमुख अवसर पर तुलसी घाट, हनुमान और दरभंगा घाट जैसे दर्जनों प्रमुख घाटों पर रंगाई-पुताई न करके भी प्रशासन ने केवल यही दिखाने की कोशिश की कि जहां तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नजरें जाएं, वहां तक रंगाई-पुताई और रोशनी कर दी जाए, बाकी घाट किसी भी स्थिति में पड़े रहें। इनकी सुध नहीं ली गई।
पीएम की मौजूदगी में भी कटती रही लाइट
यूपी सरकार दावा करती है कि प्रदेश के प्रमुख क्षेत्रों में 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। लेकिन जिस समय प्रधानमंत्री वाराणसी नगरी में उपस्थित हैं, उस समय भी वाराणसी कैंट जैसे प्रमुख इलाके में बार-बार इलेक्ट्रिसिटी कट लगता रहा। इस पर एक स्थानीय दुकानदार सौरभ चौरसिया ने कहा कि यदि प्रधानमंत्री के होने पर भी शहर की लाइट इतनी बार काटी जा रही है तो बाकी के दिनों में क्या स्थिति रहती होगी, इसकी कल्पना की जा सकती है। उन्होंने बताया कि गर्मी के दिनों में बिना जनरेटर के एक भी दिन गुजारा करना संभव नहीं होता। सरकार को इस समस्या का समाधान करना चाहिए।
हालांकि, काशी दर्शन के लिए आने वाले भक्त एक बात के लिए केंद्र सरकार को अवश्य श्रेय देते नजर आए कि बनारस में भी अब गंगा लगभग उतनी ही साफ और स्वच्छ दिखाई पड़ रही है जैसी कि वे ऋषिकेश या हरिद्वार में दिखाई पड़ती है। लोगों का कहना है कि सड़कों को चौड़ा करने, प्रमुख भवनों के विश्व स्तरीय निर्माण करने और गंगा की साफ-सफाई के कारण यहां आने वाले राष्ट्रीय- अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की संख्या में भारी वृद्धि होगी। इससे काशी और काशीवासियों का विकास होगा।