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सौभाग्य की कामना से हर नदी के लिए अलग सिंदूर
विजय सक्सेना/महाकुंभ नगर (इलाहाबाद)
Updated Thu, 17 Jan 2013 10:15 AM IST
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महाकुंभ के दौरान लोग सिर्फ मोक्ष के लिए ही नहीं आते बल्कि लंबी आयु की कामना के लिए भी आते हैं। बात महिलाओं की हो तो वे अखंड सौभाग्यवती और पति, बच्चों की लंबी आयु के लिए गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन संगम पर एक विशेष अराधना करती हैं। इसके लिए वे तीनों नदियों में अलग-अलग रंग का सिंदूर चढ़ाती हैं। साथ ही पति, बच्चों की रक्षा की भी कामना करती हैं।
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सौभाग्य की कामना
संगम से श्रद्धालुओं की सनातन आस्था जुड़ी है। गंगा, यमुना, सरस्वती उनके लिए सिर्फ नदियां नहीं, तीन देवियां हैं। महिलाएं सौभाग्य की कामना कर इन नदियों में सिंदूर चढ़ाती हैं। गंगा का रंग पहले सफेद था लेकिन वर्तमान में प्रदूषण के कारण यह मटमैला हो गया, वहीं यमुना का रंग नीला है। पुराणों में ऐसी मान्यता है कि अदृश्य सरस्वती का रंग दूध जैसा सफेद है। सुहागिन महिलाएं गंगा को लाल रंग का सिंदूर चढ़ाती हैं तो यमुना में पीले रंग का सिंदूर चढ़ाया जाता है। अदृश्य सरस्वती के लिए खास तौर पर कत्थई रंग के सिंदूर का प्रयोग किया जाता है।
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परंपरा
यह परंपरा सदियों पुरानी है। स्थानीय तीर्थ पुरोहित भी स्वीकारते हैं कि आज भी ग्रामीण परिवेश की महिलाएं इस परंपरा को बखूबी निभा रही हैं। यहां तीनों नदियों में सिंदूर चढ़ाने आईं अयोध्या की सुंदरी देवी एवं ललिता ने बताया कि वह हर साल माघ के महीने में सिंदूर चढ़ाने आती हैं और ऐसा करने से उन्हें आनंद की अनुभूति होती है।
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पंडित चंद्रशेखर तिवारी कहते हैं कि नदियों के संगम में जहां गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का वास है तो वहीं सिंदूर में इन तीनों देवियों की आकृति भी नजर आती है। लोग भले ही गंगा जल में दूध चढ़ाते हों लेकिन सिंदूर चढ़ाने का यह रिवाज अपने आप में निराला है।