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Deoria News: अधिकारी नहीं लिपिक की मर्जी से होता है बीएसए दफ्तर में काम
Fri, 27 Feb 2026 01:28 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Fri, 27 Feb 2026 01:28 AM IST
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देवरिया। बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में अधिकारी नहीं लिपिक की मर्जी से काम होता है। बीएसए कार्यालय में एडेड स्कूलों की मान्यता से लेकर नियुक्ति तक में धांधली की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। शिक्षा विभाग के जानकारों में इसको लेकर काफी कुछ कहा सुना जा रहा है।
शिक्षक की आत्महत्या के प्रकरण के बाद रोज नए-नए मामले खुल रहे हैं। चर्चा है कि बीएसए के एक करीबी लिपिक की विभाग में खूब चलती रही है। पटल चाहे जिसका हो मर्जी उसी लिपिक की चलती रही है। फाइल जिसके पास हो घूमकर चहेते बाबू के पास चली जाती थी। वहां से मौखिक पास होने के बाद ही बीएसए के समक्ष पेश होती रही है। इसके चलते उस बाबू की विभाग में खूब हनक रही है। आलम यह है कि काम किसी बाबू का हो, नाम इस चहेते बाबू का ही चलता रहा है। हालात यह हैं कि बीएसए पर गोरखपुर में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद चर्चित बाबू कई दिन गायब रहे। बृहस्पतिवार को वह कार्यालय में पहुंचे। इसको लेकर भी खूब चर्चा रही है। बताया जा रह है कि इस बाबू को बीएसए को साधने में महारत हासिल है।
कोई भी बीएसए जिले में आता है, यह बाबू और इसका करीबी अन्य बाबू अधिकारी के करीब पहुंच जाते हैं। वहीं एडेड स्कूलों का जानकार एक बाबू जिसके पास पटल हो या न हो, एडेड स्कूलों के प्रकरण में उसी का ज्ञान चलता है। अधिकारी उसके बगैर मुश्किल से ही एडेड के प्रकरण में आगे बढ़ पाते हैं।
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शिक्षक की आत्महत्या के प्रकरण के बाद रोज नए-नए मामले खुल रहे हैं। चर्चा है कि बीएसए के एक करीबी लिपिक की विभाग में खूब चलती रही है। पटल चाहे जिसका हो मर्जी उसी लिपिक की चलती रही है। फाइल जिसके पास हो घूमकर चहेते बाबू के पास चली जाती थी। वहां से मौखिक पास होने के बाद ही बीएसए के समक्ष पेश होती रही है। इसके चलते उस बाबू की विभाग में खूब हनक रही है। आलम यह है कि काम किसी बाबू का हो, नाम इस चहेते बाबू का ही चलता रहा है। हालात यह हैं कि बीएसए पर गोरखपुर में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद चर्चित बाबू कई दिन गायब रहे। बृहस्पतिवार को वह कार्यालय में पहुंचे। इसको लेकर भी खूब चर्चा रही है। बताया जा रह है कि इस बाबू को बीएसए को साधने में महारत हासिल है।
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कोई भी बीएसए जिले में आता है, यह बाबू और इसका करीबी अन्य बाबू अधिकारी के करीब पहुंच जाते हैं। वहीं एडेड स्कूलों का जानकार एक बाबू जिसके पास पटल हो या न हो, एडेड स्कूलों के प्रकरण में उसी का ज्ञान चलता है। अधिकारी उसके बगैर मुश्किल से ही एडेड के प्रकरण में आगे बढ़ पाते हैं।
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