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विंग कमांडर के मां बाप सिरसा रवाना
देवरिया
Updated Wed, 26 Oct 2016 11:26 PM IST
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आरके तिवारी (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
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सुधीर श्रीवास्तव
देवरिया। हरियाणा के सिरसा में वायुसेना अधिकारी आरके तिवारी की मौत की खबर उनके गांव भटनी के नोनापार में पहुंचते ही बूढ़े मां-बाप दहाड़े मार कर रोने लगे। 82 वर्षीय मां सुमित्रा देवी को चक्कर आ गया तो 85 वर्षीय पिता महातम तिवारी की आंखों से आंसू बंद होने का नाम नहीं ले रहा था। गांव के लोगों की जुबां पर सिर्फ सैन्य अधिकारी के मिलनसार व्यवहार की चर्चा थी।
लोग यह कहने से नहीं चूक रहे थे कि जब वह गांव आते थे तो बुजुर्गों का आशीर्वाद लेना नहीं भूलते थे। भतीजे आशुतोष नाथ तिवारी को चाचा की मौत में साजिश नजर आ रही है। उनका कहना है कि चाचा की मौत पर लगातार गलत सूचनाएं दी गईं। पहले कहा गया कि खुदकुशी कर ली है, फिर कहा गया हत्या हुई है। बाद में कहा गया आने पर सही जानकारी दी जाएगी। उन्होंने कहा कि सिरसा में पोस्टिंग के बाद चाचा ने कहा था कि यहां ईमानदार लोगों की जगह नहीं है। उन्होंने कहा कि उनके चाचा इतने कमजोर दिल के नहीं थे कि खुदकुशी कर लें।
बेटे की मौत के बाद भतीजा अपने बूढ़े बाबा-दादी को निजी वाहन से लेकर दिल्ली रवाना हो गया है। महातम तिवारी के दो पुत्रों में आरके तिवारी छोटे थे। वह वायुसेना में विंग कमांडर थे। सुरेंद्र नाथ तिवारी बड़े बेटे हैं और बैतालपुर के थापर इंटर कॉलेज में प्रधानाचार्य हैं। मां-बाप की जिम्मेदारी सुरेंद्र पर है। आरके तिवारी का परिवार दिल्ली में रहता है। उनके दो बेटियां हैं।
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एक 11 साल तो दूसरी सात साल की है। भतीजे आशुतोष ने बताया कि चाचा आरके तिवारी की पहले पोस्टिंग दिल्ली में थी। पठानकोट हमले की बाद उन्हें सिरसा भेज दिया गया। चाचा वहां के सुरक्षा अधिकारी थे लेकिन सिरसा रास नहीं आ रहा था। इस बात की जानकारी उन्होंने रक्षा मंत्रालय को दे रखी थी। फिर भी दूसरे स्थान पर नहीं भेजा गया।
आशुतोष ने बताया कि वह बाबा-दादी के साथ रक्षा मंत्री से मिलेगा। चाचा के साथ हुई अनहोनी से पर्दा उठाने की मांग करेगा। यदि न्याय नहीं मिला तो परिवार के साथ रक्षा मंत्रालय पर धरना देगा। नोनापार के लोग सैन्य अधिकारी की मौत से सदमे में हैं। आरके तिवारी के मां-बाप और अन्य सदस्यों के दिल्ली रवाना हो जाने की वजह से उनके घर पर बिरानगी छाई है। गांव के कुछ लोग उनके घर के बाहर देर रात तक बैठे थे।
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देवरिया। हरियाणा के सिरसा में वायुसेना अधिकारी आरके तिवारी की मौत की खबर उनके गांव भटनी के नोनापार में पहुंचते ही बूढ़े मां-बाप दहाड़े मार कर रोने लगे। 82 वर्षीय मां सुमित्रा देवी को चक्कर आ गया तो 85 वर्षीय पिता महातम तिवारी की आंखों से आंसू बंद होने का नाम नहीं ले रहा था। गांव के लोगों की जुबां पर सिर्फ सैन्य अधिकारी के मिलनसार व्यवहार की चर्चा थी।
लोग यह कहने से नहीं चूक रहे थे कि जब वह गांव आते थे तो बुजुर्गों का आशीर्वाद लेना नहीं भूलते थे। भतीजे आशुतोष नाथ तिवारी को चाचा की मौत में साजिश नजर आ रही है। उनका कहना है कि चाचा की मौत पर लगातार गलत सूचनाएं दी गईं। पहले कहा गया कि खुदकुशी कर ली है, फिर कहा गया हत्या हुई है। बाद में कहा गया आने पर सही जानकारी दी जाएगी। उन्होंने कहा कि सिरसा में पोस्टिंग के बाद चाचा ने कहा था कि यहां ईमानदार लोगों की जगह नहीं है। उन्होंने कहा कि उनके चाचा इतने कमजोर दिल के नहीं थे कि खुदकुशी कर लें।
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बेटे की मौत के बाद भतीजा अपने बूढ़े बाबा-दादी को निजी वाहन से लेकर दिल्ली रवाना हो गया है। महातम तिवारी के दो पुत्रों में आरके तिवारी छोटे थे। वह वायुसेना में विंग कमांडर थे। सुरेंद्र नाथ तिवारी बड़े बेटे हैं और बैतालपुर के थापर इंटर कॉलेज में प्रधानाचार्य हैं। मां-बाप की जिम्मेदारी सुरेंद्र पर है। आरके तिवारी का परिवार दिल्ली में रहता है। उनके दो बेटियां हैं।
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एक 11 साल तो दूसरी सात साल की है। भतीजे आशुतोष ने बताया कि चाचा आरके तिवारी की पहले पोस्टिंग दिल्ली में थी। पठानकोट हमले की बाद उन्हें सिरसा भेज दिया गया। चाचा वहां के सुरक्षा अधिकारी थे लेकिन सिरसा रास नहीं आ रहा था। इस बात की जानकारी उन्होंने रक्षा मंत्रालय को दे रखी थी। फिर भी दूसरे स्थान पर नहीं भेजा गया।
आशुतोष ने बताया कि वह बाबा-दादी के साथ रक्षा मंत्री से मिलेगा। चाचा के साथ हुई अनहोनी से पर्दा उठाने की मांग करेगा। यदि न्याय नहीं मिला तो परिवार के साथ रक्षा मंत्रालय पर धरना देगा। नोनापार के लोग सैन्य अधिकारी की मौत से सदमे में हैं। आरके तिवारी के मां-बाप और अन्य सदस्यों के दिल्ली रवाना हो जाने की वजह से उनके घर पर बिरानगी छाई है। गांव के कुछ लोग उनके घर के बाहर देर रात तक बैठे थे।