{"_id":"682788d13a9e8556ed08d5f4","slug":"vishwamitra-got-angry-vashishtha-explained-deoria-news-c-208-1-sdn1004-153697-2025-05-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Deoria News: विश्वामित्र हुए क्रोधित, वशिष्ठ ने समझाया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Deoria News: विश्वामित्र हुए क्रोधित, वशिष्ठ ने समझाया
Sat, 17 May 2025 12:19 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Sat, 17 May 2025 12:19 AM IST
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी देसही देवरिया। देसही देवरिया विकास खंड परिसर में चल रहे शतचंडी महायज्ञ के सातवें दिन शुक्रवार को रामलीला मंडली के कलाकारों ने महर्षि विश्वामित्र का अयोध्या आगमन, राम और लक्ष्मण को ने साथ ले जाने की मांग, तड़का वध आदि प्रसंग का मंचन किया।
रामलीला मंडली के कलाकारों ने मंचन में दिखाया कि महर्षि विश्वामित्र एक दिन अयोध्या पहुंचे। राजदरबार में राजा दशरथ ने उनका आदर-सत्कार किया।
विश्वामित्र ने अयोध्या आगमन का प्रयोजन बताया। कहा कि मैं आपसे कुछ मांगने आया हूं।
मैं जानता हूं कि रघुवंशी किसी को निराश नहीं करते। राजा दशरथ ने कहा कि आपका यहां आना मेरे लिए परम सौभाग्य है।
मैं आपकी सेवा में जो बन पड़ेगा, करूंगा।
विश्वामित्र ने कहा कि वन में राक्षसों के उत्पात से उनका जगत कल्याणार्थ यज्ञ सफल नहीं हो पा रहा, इसलिए आप हमें राम और लक्ष्मण को दे दीजिए। दशरथ हतप्रभ रह गए। दोनों कुमारों के सुकुमार रूप का हवाला देकर उन्होंने ऐसा करने से मना कर दिएया। महर्षि अतिक्रोधित हो उठे।
गुरु वशिष्ठ ने दशरथ को समझाया। दशरथ ने राम और लक्ष्मण को उनके साथ जाने दिया। राम और लक्ष्मण ने ताड़का सहित तमाम राक्षसों का संहार कर यज्ञ को सफल बनाया। हर तरफ उनकी जय जयकार होने लगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
रामलीला मंडली के कलाकारों ने मंचन में दिखाया कि महर्षि विश्वामित्र एक दिन अयोध्या पहुंचे। राजदरबार में राजा दशरथ ने उनका आदर-सत्कार किया।
विश्वामित्र ने अयोध्या आगमन का प्रयोजन बताया। कहा कि मैं आपसे कुछ मांगने आया हूं।
मैं जानता हूं कि रघुवंशी किसी को निराश नहीं करते। राजा दशरथ ने कहा कि आपका यहां आना मेरे लिए परम सौभाग्य है।
मैं आपकी सेवा में जो बन पड़ेगा, करूंगा।
विश्वामित्र ने कहा कि वन में राक्षसों के उत्पात से उनका जगत कल्याणार्थ यज्ञ सफल नहीं हो पा रहा, इसलिए आप हमें राम और लक्ष्मण को दे दीजिए। दशरथ हतप्रभ रह गए। दोनों कुमारों के सुकुमार रूप का हवाला देकर उन्होंने ऐसा करने से मना कर दिएया। महर्षि अतिक्रोधित हो उठे।
विज्ञापन
गुरु वशिष्ठ ने दशरथ को समझाया। दशरथ ने राम और लक्ष्मण को उनके साथ जाने दिया। राम और लक्ष्मण ने ताड़का सहित तमाम राक्षसों का संहार कर यज्ञ को सफल बनाया। हर तरफ उनकी जय जयकार होने लगी।
विज्ञापन