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Deoria News: बेकाबू गुस्सा ले रहा अपनों की जान

Wed, 13 Dec 2023 01:05 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया Updated Wed, 13 Dec 2023 01:05 AM IST
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Uncontrollable anger taking lives of loved ones
देवरिया। एकौना क्षेत्र के बेलवा दुबौली की घटना भले ही दो माह पुरानी है, पर अभी लोग भूले नहीं हैं। बनियापार टोला निवासी बलराम का अपने पौत्र राजू से हैंडपंप पर पानी भरने को लेकर हुए विवाद हो गया। इससे नाराज राजू ने लाठी-डंडे से पीट कर बाबा बलराम को मौत के घाट उतार दिया था। छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा होने की बच्चों की आदत को नासमझी मानने वाले अभिभावकों के लिए यह घटना एक सबक है।
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शुरुआत में इसे बचपना मानकर की जाने वाली अनदेखी बाद में इन्हें अपनों का कातिल बना दे रही है। देवरिया में ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं। रिश्तों को कलंकित करने वाली घटनाओं को याद कर लोगों का मन अपनों से डरने लगा है।
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मामूली बात पर भाई को मार डाला



एक माह पूर्व बरियापुर थाना क्षेत्र के सरैया गांव निवासी बिजली निगम के कर्मचारी अरविंद यादव की हत्या उसके सगे छोटे भाई ने सिर पर रॉड से वार कर दिया। इतना ही नहीं कमरे के फर्श पर फैले खून को रात में धुलाई कर शव को बोरे में कस कर फेंक दिया।
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पत्नी का गला दबाकर मार डाला

40 दिन पूर्व सदर कोतवाली के तिलई बेलवा गांव में रिंकी देवी की हत्या कर दी गई। मामले में पुलिस ने पति पिंटू यादव पर केस दर्ज किया। मामूली बात से नाराज पति ने पत्नी की पिटाई किया फिर गला दबाकर मार डाला था।

गुस्सा कंट्रोल न होना भी एक बीमारी है, इसे नजरअंदाज न करें

गुस्सा आना भी एक मानसिक बीमारी है। अभिभावकों पर इस पर खास ध्यान देना चाहिए। क्योंकि युवा या किशोर अचानक गुस्से में आत्मघाती कदम नहीं उठा सकते। बचपन से उनके स्वभाव में धीरे-धीरे बदलाव होता है। अभिभावक इसे नजरअंदाज करते हैं। इसलिए बड़े-छोटे का ख्याल भूलकर पीड़ित अपनों को मौत के घाट उतारने लगता है या खुदकुशी कर लेता हैं। माता-पिता को इस पर ध्यान देने की जरूरत है। - डॉ. दिव्य दीपक श्रीवास्तव, मनोरोग विशेषज्ञ



संयुक्त परिवार का टूटना रिश्तों में कड़वाहट घोल रहा है। बड़ों के बीच तनाव को देखते हुए किशोर और युवा भी इस राह पर चल रहे हैं। एकाकी परिवार होने के कारण सोच भी सीमित होती जा रही है। अपने मन की बात भी लोग एक दूसरे से नहीं कह पा रहे हैं। इसकी वजह से ऐसी घटनाएं हो रही हैं। छोटी-छोटी ऐसी बातें भी थाने तक पहुंच रही हैं, जो पहले गांवों में लोग मिल-बैठकर सुलझा लेते थे।

-डॉ. संकल्प शर्मा, एसपी


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