डूबा घर का सूर्यांश: खेलते-खेलते बाल्टी में गिरा, अगले माह था बर्थडे; पिता पार्टी के लिए रोज जोड़ते थे पैसा
पिता लाल साहब मेहनत मजदूरी कर परिवार की जिविका चलाता है। बेटे सूर्यांश का एक माह बाद जन्मदिन पड़ने वाला था। वह पहले से ही उसको कपड़ा और खिलौना खरीद वाले और पार्टी देने के लिए रुपये इकठ्ठा कर रहा था।
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दरवाजे पर खेलते समय दो वर्षीय मासूम पानी भरे प्लास्टिक की बाल्टी में गिर पड़ा। जानकारी होने पर परिजन आनन-फानन में मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे। जहां डॉक्टर ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद परिवार में चीख-पुकार मच गई। बड़ी संख्या में मौके पर जुटे लोग परिवार का ढांढस बंधा रहे थे।
यूपी के देवरिया स्थित खुखुंदू थाना क्षेत्र के सुरहां गांव निवासी लाल साहब की तीन साल पहले शादी हुई थी। एक साल बाद जब घर में बेटा पैदा हुआ तो बच्चे की किलकारियों से पूरा घर गूंज उठा। परिवार में सभी के चेहरे पर मुस्कान दिखने लगी थी, चहुंओर खुशहाली का माहौल था। एक साल बाद दादी जयमाला देवी ने मासूम का नामकरण किया। दादी और मां किरिंकी देवी ने बेटे का नाम सुर्यांश रखा।
सोमवार को दादी कहीं रिश्तेदारी और दादा गांव में ही कही घूमने गए थे। घर पर केवल किरिंकी देवी और मासूम सुर्यांश था। मां बच्चे को नीचे खेलता हुआ छोड़ घर के काम में लग गई। जैसे कुछ देर बीता वह बेटे को इधर-उधर खोजने लगी। इसी बीच पिता लाल साहब भी घर पहुंच गए। पूरे मोहल्ले में खोजबीन करने पर जब सुर्यांश कही नहीं मिला तो मां घर में लगे नलके के पास पहुंची तो वहीं प्लास्टिक की बाल्टी में सिर के बल सुर्यांश गिरा मिला। बाल्टी में पानी भरा हुआ था। आनन-फानन में पिता बाइक से लेकर खुखुंदू एक प्राइवेट चिकित्सक और फिर मेडिकल कॉलेज देवरिया पहुंचे। जहां डॉक्टर ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया। पिता जैसे ही शव लेकर घर पहुंचे मां अपने कलेजे के टुकड़े को गोद में लेकर रोने बिलखने लगी। मां को रोता देख वहां मौजूद हर किसी की आंखों से आंसू टपकने लगा। इंस्पेक्टर दिलीप सिंह ने बताया कि घटना की सूचना मिली है। बाल्टी में डूबने से बच्चे की मौत हुई है।
रिस्तेदारी से लौटी दादी पति के गले लिपट बोली- बाबू कहां गइल
अनहोनी की सूचना मिलते ही घर पहुंची सुर्यांश की दादी जयमाला देवी अपने पति मुनेश्वर के गले लिपट कर दहाड़े मारकर रोने लगी और चिल्लाते हुए बोलू हमार बाबू कहां गइल। यह दृश्य देख मौके पर जुटी महिलाओं की आंखें नम हो गईं। दादी को विश्वास ही नहीं हो रहा था कि उनका लाडला पोता अब इस दुनिया में नहीं है। वह सबसे यही कह रही थी कि हम रहल होती त हमरी बाबू... हमरी लाल के कुछ ना भइल रहित।
पिता बेटे का जन्मदिन मनाने की कर रहा था तैयारी
पिता लाल साहब मेहनत मजदूरी कर परिवार की जिविका चलाता है। बेटे सूर्यांश का एक माह बाद जन्मदिन पड़ने वाला था। वह पहले से ही उसको कपड़ा और खिलौना खरीद वाले और पार्टी देने के लिए रुपये इकठ्ठा कर रहा था। ठंड से इन दिनों रोज काम नहीं मिलने से जिस दिन काम मिलता था उसमें से खर्चे के बाद कुछ रुपये बचाकर बेटे को जन्मदिन पर उपहार देने के लिए पत्नी किरिंकी देवी को देता था। उसे क्या पता था कि उसका बेटे का जन्मदिन मनाने का यह सपना अधूरा रह जाएगा। दादा मुनेश्वर भी मेहनत मजदूरी कर इस बार पोते का जन्मदिन धूमधाम से मनाने की तैयारी में लगे थे। घटना के बाद पिता और दादा यही कहकर रो रहे थे कि अब हमनी के के के जन्मदिन मनावल जाई। घटना के बाद पूरे गांव का माहौल गमगीन दिखा।