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उमस भरी गर्मी में बेहिसाब कटौती से हाहाकार
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उमस भरी गर्मी में बेहिसाब कटौती से हाहाकार
खुखुंदू। उपकेंद्र से जुड़े करीब 250 गांवों की विद्युत व्यवस्था इन दिनों चरमरा गई है। उमस भरी गर्मी में बेहिसाब कटौती से हाहाकार मचा हुआ है। जर्जर तार रोज टूटकर गिरने से घंटों आपूर्ति ठप हो जा रही है, वहीं दूसरी तरफ कंट्रोल से भी कटौती की जा रही है। ऐसे में उमस भरी गर्मी में दिन-रात मिलाकर उपभोक्ताओं को बमुश्किल दस घंटे भी बिजली नसीब नहीं हो रही है।
विद्युत उपकेंद्र से खुखुंदू, मुसैला, बड़हरा, बीरपुर मिश्र, परसिया, बैरौना, गड़ेर, नूनखार, सिसई, पड़री झिल्लीपार, बरसात, रजवल, एकडंगा कस्बा सहित तकरीबन ढाई सौ गांवों को आपूर्ति की जाती है। इन दिनों हालत यह है कि कब बिजली आई और चली गई। इसकी भनक उपभोक्ताओं को नहीं लग रही है, जबकि शासन स्तर से ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे बिजली देने का शेड्यूल जारी किया गया है, लेकिन यहां तो दस घंटे भी बिजली नहीं मिल रही है। निगम के कर्मचारियों की बातों पर गौर करें तो रोजाना जर्जर तार टूटकर गिर रहे हैं। इससे मेन सप्लाई रहने के बाद भी आपूर्ति प्रभावित हो जा रही है। सबसे अधिक खुखुंदू थाना बाजार से लेकर चौराहे तक और गांव में तार टूटकर गिर रहे हैं। शायद ही कोई ऐसा दिन होगा, जिस दिन तार टूटकर न गिरते हों। कर्मचारियों से जवाब मिलता है कि किसी तरह काम चलाओ। निगम के कर्मचारियों का कहना है कि बस जुगाड़ के भरोसे ही यहां बिजली आपूर्ति हो रही है। जब तक जर्जर उपकरणों को बदला नहीं जाएगा, समस्या बनी रहेगी।
रात में बहुत अधिक कटौती की जा रही है। बिजली का कोई ठिकाना ही नही रह रहा है कि कब आएगी। वैसे जब आ भी रही है तो दस मिनट बाद चली जा रही है। गर्मी के मौसम में इतनी ज्यादे कटौती का कोई औचित्य नहीं है। -नथुन राय, सेवानिवृत्त शिक्षक खुखुंदू
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प्रचंड गर्मी हैं। फिर भी बड़े पैमाने पर बिजली कटौती हो रही है। निगम इसपर थोड़ा भी ध्यान नहीं दे रहा है। नतीजतन बिजली का कोई लाभ नहीं मिल रहा है। पहले कटिया कनेक्शन होता था। वर्तमान में तो हर जगह मीटर लग चुका है। फिर भी सुधार नहीं है। -शन्निवेश द्विवेदी, व्यापार मंडल अध्यक्ष खुखुंदू बाजार
ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी इमरजेंसी रोस्टरिंग चल रही है। शेड्यूल के मुताबिक गांवों में बिजली नहीं मिल रही है। रही बात जर्जर विद्युत तारों के टूटकर गिरने से आपूर्ति प्रभावित होने की तो उसे रोस्टरिंग के दौरान सही कराया जा रहा है। इसके अलावा तारों को बदलने के लिए इस्टीमेट बनाकर भेज दिया गया है। -विवेक कुमार, सहायक अभियंता, सलेमपुर
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खुखुंदू। उपकेंद्र से जुड़े करीब 250 गांवों की विद्युत व्यवस्था इन दिनों चरमरा गई है। उमस भरी गर्मी में बेहिसाब कटौती से हाहाकार मचा हुआ है। जर्जर तार रोज टूटकर गिरने से घंटों आपूर्ति ठप हो जा रही है, वहीं दूसरी तरफ कंट्रोल से भी कटौती की जा रही है। ऐसे में उमस भरी गर्मी में दिन-रात मिलाकर उपभोक्ताओं को बमुश्किल दस घंटे भी बिजली नसीब नहीं हो रही है।
विद्युत उपकेंद्र से खुखुंदू, मुसैला, बड़हरा, बीरपुर मिश्र, परसिया, बैरौना, गड़ेर, नूनखार, सिसई, पड़री झिल्लीपार, बरसात, रजवल, एकडंगा कस्बा सहित तकरीबन ढाई सौ गांवों को आपूर्ति की जाती है। इन दिनों हालत यह है कि कब बिजली आई और चली गई। इसकी भनक उपभोक्ताओं को नहीं लग रही है, जबकि शासन स्तर से ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे बिजली देने का शेड्यूल जारी किया गया है, लेकिन यहां तो दस घंटे भी बिजली नहीं मिल रही है। निगम के कर्मचारियों की बातों पर गौर करें तो रोजाना जर्जर तार टूटकर गिर रहे हैं। इससे मेन सप्लाई रहने के बाद भी आपूर्ति प्रभावित हो जा रही है। सबसे अधिक खुखुंदू थाना बाजार से लेकर चौराहे तक और गांव में तार टूटकर गिर रहे हैं। शायद ही कोई ऐसा दिन होगा, जिस दिन तार टूटकर न गिरते हों। कर्मचारियों से जवाब मिलता है कि किसी तरह काम चलाओ। निगम के कर्मचारियों का कहना है कि बस जुगाड़ के भरोसे ही यहां बिजली आपूर्ति हो रही है। जब तक जर्जर उपकरणों को बदला नहीं जाएगा, समस्या बनी रहेगी।
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रात में बहुत अधिक कटौती की जा रही है। बिजली का कोई ठिकाना ही नही रह रहा है कि कब आएगी। वैसे जब आ भी रही है तो दस मिनट बाद चली जा रही है। गर्मी के मौसम में इतनी ज्यादे कटौती का कोई औचित्य नहीं है। -नथुन राय, सेवानिवृत्त शिक्षक खुखुंदू
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प्रचंड गर्मी हैं। फिर भी बड़े पैमाने पर बिजली कटौती हो रही है। निगम इसपर थोड़ा भी ध्यान नहीं दे रहा है। नतीजतन बिजली का कोई लाभ नहीं मिल रहा है। पहले कटिया कनेक्शन होता था। वर्तमान में तो हर जगह मीटर लग चुका है। फिर भी सुधार नहीं है। -शन्निवेश द्विवेदी, व्यापार मंडल अध्यक्ष खुखुंदू बाजार
ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी इमरजेंसी रोस्टरिंग चल रही है। शेड्यूल के मुताबिक गांवों में बिजली नहीं मिल रही है। रही बात जर्जर विद्युत तारों के टूटकर गिरने से आपूर्ति प्रभावित होने की तो उसे रोस्टरिंग के दौरान सही कराया जा रहा है। इसके अलावा तारों को बदलने के लिए इस्टीमेट बनाकर भेज दिया गया है। -विवेक कुमार, सहायक अभियंता, सलेमपुर