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Deoria News: ट्राॅमा सेंटर में भूमि का पेंच, निर्माण कार्य पर असर
Thu, 16 May 2024 02:26 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Thu, 16 May 2024 02:26 AM IST
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मेडिकल कॉलेज में निर्माणाधीन ट्रामा सेंटर।संवाद
- फोटो
नक्शे के मुताबिक करीब 1500 वर्ग फीट जमीन न मिलने से एक ब्लाॅक का काम रुका
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। मेडिकल कॉलेज में छह माह पहले 25 करोड़ की लागत से ट्राॅमा सेंटर बनना शुरू हुआ। लेकिन, जमीन का पेंच फंसने के कारण निर्माण कार्य पर असर पड़ रहा है। अब तक 20 से 25 प्रतिशत कार्य ही हो सका है। एक ब्लॉक का काम रुका है।
इस हिस्से पर नक्शे में रजिस्ट्रेशन कक्ष सहित ऊपर की मंजिल पर ओटी बनना है। करीब 1500 वर्ग फीट जमीन कम होने से दिक्कत आ रही है। जबकि एक ब्लाॅक के ग्राउंड फ्लोर की छत तकरीबन हो गई। सीएमओ निर्देश के मुताबिक अपने परिसर की जमीन देने की बात कह रहे हैं, जबकि मेडिकल कॉलेज प्रशासन नक्शे के मुताबिक पूरी जमीन की मांग कर रहा है। ऐसे में इसके पूरा होने में समय लग सकता है। हालांकि, इसके बन जाने से मरीजों को सहूलियत होगी।
महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज में गंभीर मरीजों के इलाज की सुविधा नहीं है। इमरजेंसी से लेकर वार्ड में भर्ती गंभीर मरीजों को रेफर करना पड़ रहा है। इससे तीमारदारों को इलाज के लिए अधिक धन खर्च करना पड़ता है। साथ ही समय बर्बाद होता है। इसे देखते हुए शासन स्तर से ट्राॅमा सेंटर निर्माण के लिए स्वीकृति देने के बाद धन अवमुक्त कर दिया गया है।
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इमरजेंसी के पास करीब 1393 वर्ग मीटर भूमि चिह्नित की गई। अक्तूबर 2023 में निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया। इसमें करीब 500 वर्ग मीटर भूमि सीएमओ कार्यालय परिसर की है। जहां ऑफिस का मुख्य गेट, स्टोर, जेनरेटर और वाहन पार्क हैं। सीएमओ कार्यालय ने परिसर की भूमि देने से मना कर दिया, जिससे कुछ दिन निर्माण कार्य रुक गया। इसके बाद दूसरी तरफ एक ब्लाॅक का निर्माण कार्य शुरू हुआ। तकरीबन ग्राउंड फ्लोर की छत का कार्य पूरा हो गया है। यहां रैंप, वार्ड आदि बनना है।
इसी बीच शासन और डीएम के निर्देश पर स्टोर तक की जमीन ट्राॅमा सेंटर के लिए दे दी गई। उधर नींव की खोदाई कर दी गई है, लेकिन शेष करीब 1500 वर्ग फीट और जमीन की मांग की जा रही है। इस पर एतराज जताया जा रहा है।
कार्यदायी संस्था ने इधर कार्य रोक दिया है। मानचित्र में इस क्षेत्र में ग्राउंड फ्लोर पर रजिस्ट्रेशन कक्ष, वेटिंग एरिया और ऊपर के प्रथम व द्वितीय मंजिल पर दो-दो ओटी का निर्माण होना है। कार्य शुरू होने के बाद से 18 माह में निर्माण पूरा करने का समय निर्धारित किया गया है, लेकिन सात माह बीत जाने के बाद अब तक 20 से 25 प्रतिशत कार्य ही हो सका है। भूमि का मामला नहीं सुलझा तो ट्राॅमा सेंटर का निर्माण अधूरा रह सकता है।
ट्राॅमा सेंटर के तीन मंजिले भवन में होंगे 70 बेड
मेडिकल कॉलेज में निर्माणाधीन ट्राॅमा सेंटर तीन मंजिला होगा। इसमें 70 बेड होंगे। इसमें ट्राॅमा के मरीजों के लिए 30 बेड का वार्ड होगा। जबकि 20 बेड का बर्न और 20 बेड का टॉक्सिकोलॉजी वार्ड स्थापित होगा। यहां कुल चार ओटी होगा, जिसमें मॉड्यूलर और माइनर ओटी होगा। इसके अलावा मेडिकल पाइपलाइन, ऑक्सीजन, वेंटिलेटर, इंफ्यूजन पंप, मॉनीटर सहित अन्य अत्याधुनिक उपकरण होंगे। बर्न वार्ड पूरी तरह एसी युक्त होगा। यहां प्लास्टर, एमआरआई, एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, ईसीजी, सीटी स्कैन जांच की भी सुविधा होगी। विशेषज्ञ चिकित्सकों के अलावा ट्रेंड पैरामेडिकल रहेंगे। इसका निर्माण होने से गंभीर रूप से घायल व अन्य गंभीर मरीजों, आग से झुलसे तथा प्वाइजनिंग के मरीजों के लिए इलाज की सुविधा उपलब्ध होगी। उन्हें बाहर नहीं जाना पड़ेगा।
कोट
ट्रॉमा सेंटर स्थापित होना अच्छी बात है। इससे मरीजों के इलाज में सुविधा होगी। शासन और प्रशासन के निर्देश पर भूमि उपलब्ध करा दी गई है। अब और भूमि मांगी जा रही है। इस संबंध में अभी कुछ कहा नहीं गया है। जितनी भूमि की जरूरत है उतनी मोडिफाइड भी की जा सकती है।
-डॉ. राजेश झा, सीएमओ
कोट
मेडिकल कॉलेज में ट्राॅमा सेंटर का निर्माण कार्य चल रहा है। निर्माण कार्य को 18 माह से पहले पूरा होने की उम्मीद है। नक्शा के मुताबिक, सीएमओ कार्यालय परिसर स्थित स्टोर की जमीन मिली है। जितनी भूमि कम पड़ रही है। उसके लिए बात की जाएगी। जल्द समस्या का समाधान हो जाएगा।
-डॉ. राजेश कुमार बरनवाल, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
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नक्शे के मुताबिक करीब 1500 वर्ग फीट जमीन न मिलने से एक ब्लाॅक का काम रुका
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। मेडिकल कॉलेज में छह माह पहले 25 करोड़ की लागत से ट्राॅमा सेंटर बनना शुरू हुआ। लेकिन, जमीन का पेंच फंसने के कारण निर्माण कार्य पर असर पड़ रहा है। अब तक 20 से 25 प्रतिशत कार्य ही हो सका है। एक ब्लॉक का काम रुका है।
इस हिस्से पर नक्शे में रजिस्ट्रेशन कक्ष सहित ऊपर की मंजिल पर ओटी बनना है। करीब 1500 वर्ग फीट जमीन कम होने से दिक्कत आ रही है। जबकि एक ब्लाॅक के ग्राउंड फ्लोर की छत तकरीबन हो गई। सीएमओ निर्देश के मुताबिक अपने परिसर की जमीन देने की बात कह रहे हैं, जबकि मेडिकल कॉलेज प्रशासन नक्शे के मुताबिक पूरी जमीन की मांग कर रहा है। ऐसे में इसके पूरा होने में समय लग सकता है। हालांकि, इसके बन जाने से मरीजों को सहूलियत होगी।
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महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज में गंभीर मरीजों के इलाज की सुविधा नहीं है। इमरजेंसी से लेकर वार्ड में भर्ती गंभीर मरीजों को रेफर करना पड़ रहा है। इससे तीमारदारों को इलाज के लिए अधिक धन खर्च करना पड़ता है। साथ ही समय बर्बाद होता है। इसे देखते हुए शासन स्तर से ट्राॅमा सेंटर निर्माण के लिए स्वीकृति देने के बाद धन अवमुक्त कर दिया गया है।
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इमरजेंसी के पास करीब 1393 वर्ग मीटर भूमि चिह्नित की गई। अक्तूबर 2023 में निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया। इसमें करीब 500 वर्ग मीटर भूमि सीएमओ कार्यालय परिसर की है। जहां ऑफिस का मुख्य गेट, स्टोर, जेनरेटर और वाहन पार्क हैं। सीएमओ कार्यालय ने परिसर की भूमि देने से मना कर दिया, जिससे कुछ दिन निर्माण कार्य रुक गया। इसके बाद दूसरी तरफ एक ब्लाॅक का निर्माण कार्य शुरू हुआ। तकरीबन ग्राउंड फ्लोर की छत का कार्य पूरा हो गया है। यहां रैंप, वार्ड आदि बनना है।
इसी बीच शासन और डीएम के निर्देश पर स्टोर तक की जमीन ट्राॅमा सेंटर के लिए दे दी गई। उधर नींव की खोदाई कर दी गई है, लेकिन शेष करीब 1500 वर्ग फीट और जमीन की मांग की जा रही है। इस पर एतराज जताया जा रहा है।
कार्यदायी संस्था ने इधर कार्य रोक दिया है। मानचित्र में इस क्षेत्र में ग्राउंड फ्लोर पर रजिस्ट्रेशन कक्ष, वेटिंग एरिया और ऊपर के प्रथम व द्वितीय मंजिल पर दो-दो ओटी का निर्माण होना है। कार्य शुरू होने के बाद से 18 माह में निर्माण पूरा करने का समय निर्धारित किया गया है, लेकिन सात माह बीत जाने के बाद अब तक 20 से 25 प्रतिशत कार्य ही हो सका है। भूमि का मामला नहीं सुलझा तो ट्राॅमा सेंटर का निर्माण अधूरा रह सकता है।
ट्राॅमा सेंटर के तीन मंजिले भवन में होंगे 70 बेड
मेडिकल कॉलेज में निर्माणाधीन ट्राॅमा सेंटर तीन मंजिला होगा। इसमें 70 बेड होंगे। इसमें ट्राॅमा के मरीजों के लिए 30 बेड का वार्ड होगा। जबकि 20 बेड का बर्न और 20 बेड का टॉक्सिकोलॉजी वार्ड स्थापित होगा। यहां कुल चार ओटी होगा, जिसमें मॉड्यूलर और माइनर ओटी होगा। इसके अलावा मेडिकल पाइपलाइन, ऑक्सीजन, वेंटिलेटर, इंफ्यूजन पंप, मॉनीटर सहित अन्य अत्याधुनिक उपकरण होंगे। बर्न वार्ड पूरी तरह एसी युक्त होगा। यहां प्लास्टर, एमआरआई, एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, ईसीजी, सीटी स्कैन जांच की भी सुविधा होगी। विशेषज्ञ चिकित्सकों के अलावा ट्रेंड पैरामेडिकल रहेंगे। इसका निर्माण होने से गंभीर रूप से घायल व अन्य गंभीर मरीजों, आग से झुलसे तथा प्वाइजनिंग के मरीजों के लिए इलाज की सुविधा उपलब्ध होगी। उन्हें बाहर नहीं जाना पड़ेगा।
कोट
ट्रॉमा सेंटर स्थापित होना अच्छी बात है। इससे मरीजों के इलाज में सुविधा होगी। शासन और प्रशासन के निर्देश पर भूमि उपलब्ध करा दी गई है। अब और भूमि मांगी जा रही है। इस संबंध में अभी कुछ कहा नहीं गया है। जितनी भूमि की जरूरत है उतनी मोडिफाइड भी की जा सकती है।
-डॉ. राजेश झा, सीएमओ
कोट
मेडिकल कॉलेज में ट्राॅमा सेंटर का निर्माण कार्य चल रहा है। निर्माण कार्य को 18 माह से पहले पूरा होने की उम्मीद है। नक्शा के मुताबिक, सीएमओ कार्यालय परिसर स्थित स्टोर की जमीन मिली है। जितनी भूमि कम पड़ रही है। उसके लिए बात की जाएगी। जल्द समस्या का समाधान हो जाएगा।
-डॉ. राजेश कुमार बरनवाल, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज