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मां-बेटी मौत मामला: ससुराल वालों का देहातीपन पसंद नहीं थी टॉपर पद्मा को, अक्सर होता था विवाद

Sat, 15 Apr 2023 05:54 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया।
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया। Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Sat, 15 Apr 2023 05:54 PM IST
सार

उसकी बुआ जामवंती देवी ने बताया कि पति के चरित्र पर वह शक करती थी। पूरे परिवार का व्यवहार उसके प्रति अच्छा नहीं था। कपरवार गांव निवासी जनार्दन तिवारी की बेटी पदमा उर्फ वर्षा की शादी 2016 में बढ़या फुलवरिया गांव निवासी सत्यप्रकाश तिवारी के साथ हुई थी।

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Topper Padma did not like the rusticity of in-laws
पदमा उर्फ वर्षा गोद में बेटी आराध्या - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

देवरिया जिले में उग्रसेन पुल से बुधवार को बेटी संग नदी में छलांग लगाकर जान देने वाली पदमा के मायके वाले उच्च शिक्षा ग्रहण करने वाले हैं। बीएससी टाॅपर रही पदमा की मां एमए और बहनें एमए, बीएड कर चुकी हैं। जिनकी शादी हो चुकी है। पढ़ने में शुरू से मेधावी होने के नाते हाव-भाव शहर के वाशिंदे की तरह रहता था, जबकि पति सहित ससुराल के लोग कम पढ़े-लिखे देहाती अंदाज वाले हैं। शादी के बाद से ही वह ग्रामीण परिवेश में चली गई, जहां अपने ठीक से ढाल नहीं पाई।

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उसकी बुआ जामवंती देवी ने बताया कि पति के चरित्र पर वह शक करती थी। पूरे परिवार का व्यवहार उसके प्रति अच्छा नहीं था। कपरवार गांव निवासी जनार्दन तिवारी की बेटी पदमा उर्फ वर्षा की शादी 2016 में बढ़या फुलवरिया गांव निवासी सत्यप्रकाश तिवारी के साथ हुई थी। शादी के बाद से ही यह बात पदमा के मन में जरूर थी कि वह जिस पढ़े लिखे परिवेश में पली-बढ़ी थी। पदमा के भाई प्रभुनाथ ने बताया कि बहन की ससुराल का माहौल ठीक नहीं था। सभी इंटर तक की पढ़ाई किए हैं। पति के फेसबुक पर कुछ लड़कियों की तस्वीर देखकर बहन को नागवार गुजरता था।
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वह हमेशा पति के चरित्र पर शक करती थी। यहां तक जिस दिन सत्यप्रकाश बच्चे को लेने के लिए पदमा के पास हमारे घर आए थे उस दिन भी दोनों के बीच तकरार हुई थी। बेटा लेकर वह चले गए और यह मैसेज पदमा के पास पहुंचा कि अब तुम्हें मायके में ही रहना है, इससे वह आहत हो गई थी। जैसे दोनों की शादी बेमेल हो गई थी, ऐसा हम लोग भी महसूस करने लगे थे। मोबाइल में पड़े कई मैसेज से प्रमाण मिलता है कि प्रताड़ित थी। इसके कारण उसने बुधवार को नदी में कूद कर अपनी बेटी संग जान दे दी।
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उग्रसेन सेतु से 24 से अधिक लोगों की जा चुकी है जान

कपरवार गांव मायके आई पदमा ने बुधवार को उग्रसेन सेतु से दुधमुंही बच्ची आराध्या को नदी में फेंक कर नदी में छलांग लगा दिया। इससे दोनों की मौत हो गई। पुल से छलांग लगाकर अब तक 24 से अधिक महिला-पुरुष जान गंवा चुके हैं। सुसाइड प्वांइट बने उग्रसेन सेतु की जिम्मेदार सुध नहीं ले रहे हैं। हालांकि विगत वर्षों से लोगों की मांग पर तत्कालीन डीएम अनीता श्रीवास्तव ने पुल के दोनों तरफ रेलिंग के ऊपर लोहे की जाली लगवाने का निर्देश दिया था। लेकिन उनके स्थानांतरण के बाद योजना ठंडे बस्ते में चली गई।

अंतर्जनपदीय मार्ग पर बने उग्रसेन सेतु के दोनों तरफ पुलिस चौकी बनाई गई है। बावजूद लोग अक्सर भावावेश में नदी में कूदकर जान दे देते हैं। चार वर्ष पूर्व एक जुलाई को भठ्ठा गांव निवासी सोनू सिंह, मदनपुर के मनिहरपुर गांव की चानमती देवी, एक अज्ञात, 2019 में गंगाचक गांव निवासी मनीष, तलौरा की सुधा, बरहज की सुनीता, करायल की एक युवती सहित दर्जनों की नदी में कूदने से जान जा चुकी है। मौत की बढ़ती घटनाओं के बाद भी पुल के रेलिंग पर दोनों तरफ जाली नहीं लगाई जा सकी है। प्रशासन की ओर से ठोस इंतजाम नहीं किए जाने से लोगों में नाराजगी है।

एसडीएम योगेश कुमार ने कहा कि नदी में कूदने से हुई मौतों के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। रेलिंग पर जाली के लिए उच्चाधिकारियों से बात की जाएगी। जो संभव हो सकेगा, कराया जाएगा।

बरहज सीओ अंशुमन श्रीवास्तव ने कहा कि बरहज थाने पर निर्देश दे दिया गया है। घटनाओं को रोकने के लिए पुल पर पुलिस से पेट्रोलिंग कराई जाएगी।

ख्वाब और दहेज की मांग पूरी न होने पर महिलाएं दे रहीं जान
दो साल पहलेे बरहज थाना क्षेत्र के लबकनी बासू गांव में रविता देवी ने अपने ससुर से स्मार्ट फोन की मांग की। स्मार्ट फोन न मिलने पर उसने फंदा लगा कर जान दे दी थी। सदर कोतवाली के एक मोहल्ला निवासी एक महिला का पति दहेज में कार मांगा, लेकिन डिमांड न पूरा होने पर महिला को प्रताड़ित करने लगा, इसके चलते फंदा लगाकर जान दे दी। सदर कोतवाली के एक गांव निवासी युवती ने एक साल पहले स्कूटी की मांग न पूरा होने पर फंदा लगाकर आत्महत्या कर दी। महुआडीह थाना क्षेत्र की एक युवती ने जींस पैंट खरीदने को कहा। डिमांड न पूरा होने पर उसने आत्महत्या कर ली।

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