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Deoria News: सिस्टम लाचार...जांच-इलाज में मरीज के लिए जरूरी हैं तीमारदार
Sun, 02 Nov 2025 12:33 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Sun, 02 Nov 2025 12:33 AM IST
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मरीज को स्ट्रैचर पर ले जाते तीमारदार
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल काॅलेज में मरीजों के परिजनों को खुद स्ट्रेचर खींचना पड़ता है। अगर साथ में तीमारदार न हों तो जांच व इलाज मुश्किल हो जाता है। यह हाल तब है, जब मेडिकल काॅलेज में सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए शासन-प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी है।
प्राचार्य को भी बदल दिया गया है। इसके बावजूद हालात में सुधार होता नहीं दिख रहा है। मेडिकल काॅलेज में करीब चार सौ बेड का अस्पताल है। इनमें मेडिसिन मेल-फीमेल, सर्जरी मेल-फीमेल, हड्डी रोग और नेत्र, नाक-कान व गला रोग के अलावा स्त्री व प्रसूति रोग और बाल रोग विभाग के लिए बड़े जनरल वार्ड हैं।
इसके अलावा टीबी व सांस रोग विभाग के लिए करीब 10 बेड हैं, जो प्राइवेट वार्ड के लिए बनाए गए कमरों में चलते हैं। इनमें से सर्जरी, हड्डी रोग और मेडिसिन विभाग के गंभीर भर्ती मरीजोंं को अक्सर जांच के लिए एक्स-रे, सिटी स्कैन और अन्य जांच के लिए वार्ड से बाहर परिसर में बने केंद्रों में ले जाना पड़ता है। इसके लिए जरूरत पड़ने स्ट्रेचर और व्हीलचेयर का सहारा लेना पड़ता है। काॅलेज के नियमानुसार मरीजों को वार्ड से स्ट्रेचर और व्हीलचेयर पर वार्ड में कार्यरत मल्टीपरपज कर्मचारी को ले जाना चाहिए, पर यहां मरीज के परिजन ही लेकर जाते हैं और जांच कराकर ले आते हैं। इसमें उन्हें संबंधित जांच केंद्र की सही जानकारी नहीं होने पर इधर-उधर भटकना पड़ता है। यदि मरीज के साथ एक ही परिजन होता है तो उसे काफी मुश्किल हो जाती है।
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बेलवा बाजार की चंदा देवी (40) न्यूरो की समस्या के चलते मेडिसिन वार्ड में भर्ती हैं। शनिवार को परिजन उन्हें सिटी स्कैन कराने ले गए। उन्हें व्हीलचेयर तो मिल गया, पर कोई कर्मचारी नहीं मिला। ऐसेे में सिटी स्कैन सेंटर खोजने में काफी परेशानी हुई। एक परिजन ने बताया कि वह मुंबई रहते हैं। यहां कुछ पता नहीं, कोई कर्मचारी मिल गया होता तो आसानी रहती।
रुद्रपुर के अमौनी के सोरवीन (20) को दुर्घटना मेंं चोट लग गई है। परिजन व्हीलचेयर से घायल को लेकर ओपीडी में डाॅक्टर के पास पहुंचे। अवधपुर के राहुल (20) पांच दिन से सर्जिकल वार्ड में भर्ती हैं। उनके परिजन सिटी स्कैन के लिए खुद स्ट्रेचर खींचते दिखे।
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देवरिया। महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल काॅलेज में मरीजों के परिजनों को खुद स्ट्रेचर खींचना पड़ता है। अगर साथ में तीमारदार न हों तो जांच व इलाज मुश्किल हो जाता है। यह हाल तब है, जब मेडिकल काॅलेज में सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए शासन-प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी है।
प्राचार्य को भी बदल दिया गया है। इसके बावजूद हालात में सुधार होता नहीं दिख रहा है। मेडिकल काॅलेज में करीब चार सौ बेड का अस्पताल है। इनमें मेडिसिन मेल-फीमेल, सर्जरी मेल-फीमेल, हड्डी रोग और नेत्र, नाक-कान व गला रोग के अलावा स्त्री व प्रसूति रोग और बाल रोग विभाग के लिए बड़े जनरल वार्ड हैं।
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इसके अलावा टीबी व सांस रोग विभाग के लिए करीब 10 बेड हैं, जो प्राइवेट वार्ड के लिए बनाए गए कमरों में चलते हैं। इनमें से सर्जरी, हड्डी रोग और मेडिसिन विभाग के गंभीर भर्ती मरीजोंं को अक्सर जांच के लिए एक्स-रे, सिटी स्कैन और अन्य जांच के लिए वार्ड से बाहर परिसर में बने केंद्रों में ले जाना पड़ता है। इसके लिए जरूरत पड़ने स्ट्रेचर और व्हीलचेयर का सहारा लेना पड़ता है। काॅलेज के नियमानुसार मरीजों को वार्ड से स्ट्रेचर और व्हीलचेयर पर वार्ड में कार्यरत मल्टीपरपज कर्मचारी को ले जाना चाहिए, पर यहां मरीज के परिजन ही लेकर जाते हैं और जांच कराकर ले आते हैं। इसमें उन्हें संबंधित जांच केंद्र की सही जानकारी नहीं होने पर इधर-उधर भटकना पड़ता है। यदि मरीज के साथ एक ही परिजन होता है तो उसे काफी मुश्किल हो जाती है।
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बेलवा बाजार की चंदा देवी (40) न्यूरो की समस्या के चलते मेडिसिन वार्ड में भर्ती हैं। शनिवार को परिजन उन्हें सिटी स्कैन कराने ले गए। उन्हें व्हीलचेयर तो मिल गया, पर कोई कर्मचारी नहीं मिला। ऐसेे में सिटी स्कैन सेंटर खोजने में काफी परेशानी हुई। एक परिजन ने बताया कि वह मुंबई रहते हैं। यहां कुछ पता नहीं, कोई कर्मचारी मिल गया होता तो आसानी रहती।
रुद्रपुर के अमौनी के सोरवीन (20) को दुर्घटना मेंं चोट लग गई है। परिजन व्हीलचेयर से घायल को लेकर ओपीडी में डाॅक्टर के पास पहुंचे। अवधपुर के राहुल (20) पांच दिन से सर्जिकल वार्ड में भर्ती हैं। उनके परिजन सिटी स्कैन के लिए खुद स्ट्रेचर खींचते दिखे।