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मरणोपरांत वीरता सम्मान के चेक की बीती ‘तेरहवीं’
देवरिया
Updated Fri, 08 Jul 2016 10:52 PM IST
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गौरव भारती को मरणोपरांत जीवन रक्षक वीरता पुरस्कार और चेक माता-पिता को जिलाधिकारी अनिता श्रीवास्वत ने प्रदान किया।
- फोटो : अमर उजाला
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देवरिया। भारत सरकार ने बहादुर बेटे गौरव कुमार भारती को मरणोपरांत उत्तम जीवन रक्षक वीरता सम्मान से नवाजा लेकिन जिला प्रशासन बहादुरी का सम्मान करने में चूक गया। सम्मान राशि का चेक स्थानीय प्रशासन के पास आया। लेकिन बहादुर बेटे के पिता को तब मिला जब चेक की भी तेरहवीं बीत गई।
जब पता चला कि चेक की वैधता तारीख 13 दिन पूर्व बीत गई है तब जिला इसे दोबारा वैध कराने के लिए भारत सरकार को भेजा जाएगा। जिलाधिकारी अनिता श्रीवास्तव ने शुक्रवार को कार्यालय में राष्ट्रपति की ओर से जारी वीरता का पदक गौरव के पिता शंभूनाथ भारती को प्रदान किया।
इसके साथ ही 60 हजार रुपये का चेक भी दिया। चेक देने के बाद पता चला कि इसे जारी हुए तीन माह से अधिक समय बीत चुका है। यह चेक 28 मार्च को जारी हुआ और भारत सरकार की ओर से 31 मई को डीएम देवरिया को भेजा गया। चार जून को चेक डीएम कार्यालय पहुंचा। एक माह तक डीएम कार्यालय के फाइलों में दबा रहा।
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27 जून से पहले चेक के बैंक में पहुंच जाने पर भुगतान संभव था। लेकिन तीन माह से अधिक समय बीत जाने के कारण चेक का भुगतान नहीं हो सकता। डीएम ने चेक को रिवैलीडेट के लिए वापस भेजने का निर्देश दिया।
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जब पता चला कि चेक की वैधता तारीख 13 दिन पूर्व बीत गई है तब जिला इसे दोबारा वैध कराने के लिए भारत सरकार को भेजा जाएगा। जिलाधिकारी अनिता श्रीवास्तव ने शुक्रवार को कार्यालय में राष्ट्रपति की ओर से जारी वीरता का पदक गौरव के पिता शंभूनाथ भारती को प्रदान किया।
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इसके साथ ही 60 हजार रुपये का चेक भी दिया। चेक देने के बाद पता चला कि इसे जारी हुए तीन माह से अधिक समय बीत चुका है। यह चेक 28 मार्च को जारी हुआ और भारत सरकार की ओर से 31 मई को डीएम देवरिया को भेजा गया। चार जून को चेक डीएम कार्यालय पहुंचा। एक माह तक डीएम कार्यालय के फाइलों में दबा रहा।
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27 जून से पहले चेक के बैंक में पहुंच जाने पर भुगतान संभव था। लेकिन तीन माह से अधिक समय बीत जाने के कारण चेक का भुगतान नहीं हो सकता। डीएम ने चेक को रिवैलीडेट के लिए वापस भेजने का निर्देश दिया।