अध्यापक नहीं आते, बच्चे खोलते, बंद करते हैं स्कूल
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सरकारें भले ही शिक्षा के लिए बेशुमार धन खर्च कर रही हों, लेकिन धरातल पर सच्चाई कुुछ और ही है। कम से कम शहीदों के गांव पैना में तो यह देखने को मिल ही रहा है।
कहने को तो राजकीय हाईस्कूल में चार शिक्षक तैनात हैं पर अधिकांश यह अध्यापक विहीन ही रहता है। ऐसे मेें बच्चे स्कूल खोलकर मस्ती करते हैं और फिर समय से बंद कर घर चले जाते हैं।
बहरज के पैना गांव में राजकीय हाईस्कूल बनकर तैयार है, लेकिन भवन विभाग को हैंडओवर नहीं हुआ है। ऐसे में यह विद्यालय जूनियर हाईस्कूल के दो कमरों में चल रहा है।
कार्यवाहक प्रधानाध्यापक मुहम्मद हरीश, अलीना, अनामिका और सोनी यहां तैनात हैं। कक्षा नौ और 10 में कुल 22 बच्चों का नामांकन है।
अध्यापकों के स्कूल न आने की वजह से बच्चे स्कूल खोलकर पढ़ते और मस्ती करते है। बगल के स्कूल बंद होने पर ये बच्चे भी विद्यालय बंद कर देते हैं।
गांव के लोगों ने कई बार उच्चाधिकारियों को इससे अवगत कराया, लेकिन अधिकारियों की उदासीनता के चलते यहां स्थिति जस की तस बनी हुई है।
मंगलवार को दोपहर में 12 बजे तक कोई शिक्षक स्कूल नहीं पंहुचा था। छात्र रोशनी, सिब्बू, ऊषा, हेमा, रीता, फरीदा, पल्लवी, अमरजीत ने बताया गुरुजी लोग कभी-कभी आते हैं।