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Deoria News: स्वामी भगवान गिरी अब मठ का संभालेंगे कार्यभार, लोगों ने किया स्वागत
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चनुकी। स्वामी देवानंद पीजी कॉलेज मठ लार के महंत का विवाद अब थम जाएगा। मंगलवार को स्वामी भगवान गिरी मठ पर पहुंचे। लोगों ने उनका स्वागत किया। एसडीएम सलेमपुर दिशा श्रीवास्तव और तहसीलदार मौके पर मौजूद रहीं। हालांकि, महंत दिग्विजय गिरी के समर्थक मौजूद नहीं थे। स्वामी भगवान गिरी अब मठ का कार्य भार संभालेंगे ।
लार मठ के महंथ को लेकर पिछले 15 दिनों से विवाद चल रहा था। वर्तमान महंत अभयानंद गिरी के आचरण और कार्यशैली को लेकर स्वामी भगवान गिरी ने अभयानंद गिरी को मठ से हटाने और रविंद्र गिरी को प्रतिनिधित्व का पत्र डीएम को दिया था। इस बात की जानकारी होते ही महंत अभयानंद गिरी मठ के मुख्य गेट के ताल बंद कर कहीं चले गए। स्वामी भगवान गिरी के पत्र के क्रम में डीएम दिव्या मित्तल ने तहसीलदार अलका सिंह को मौके पर भेज कर गेट का ताला खुलवाने और रविंद्र गिरी को महंत का अधिकार दिलाने का निर्देश दिया था। तहसीलदार अलका सिंह की मौजूदगी में भी महंत अभयानंद गिरी के समर्थकों ने गेट नहीं खोलने दिया।
मामला बिगड़ता देख स्वामी भगवान गिरी दो दिन पहले प्रयागराज से देवरिया आए। प्रशासन को पत्र देकर स्वयं महंत के पद दायित्व के निर्वहन की बात कही। उसके बाद अपने साथ रविंद्र गिरी को लेकर मठ पर पहुंचे। उनके आने की जानकारी होते ही भारी संख्या में लोग उनका फूल माला से स्वागत किया । मुख्य गेट पर पहुंचते ही मंगलाचरण से महंत भगवान गिरी का स्वागत किया गया। मौके पर मौजूद एसडीएम दिशा श्रीवास्तव और तहसीलदार अलका सिंह ने स्वामी भगवान गिरी का पक्ष जाना। उन्होंने कहा कि अभयानंद गिरी को जिस अखाड़ा के तहत महंत पद पर रखा गया था उसी निर्वाणी अखाड़ा द्वारा उन्हें हटा दिया गया है। अब वह खुद सहयोगी के मदद से मठ का कार्य देखेंगे। दूसरा पक्ष अभयानंद गिरी या उनका कोई समर्थक मौजूद नहीं था।
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लार मठ के महंथ को लेकर पिछले 15 दिनों से विवाद चल रहा था। वर्तमान महंत अभयानंद गिरी के आचरण और कार्यशैली को लेकर स्वामी भगवान गिरी ने अभयानंद गिरी को मठ से हटाने और रविंद्र गिरी को प्रतिनिधित्व का पत्र डीएम को दिया था। इस बात की जानकारी होते ही महंत अभयानंद गिरी मठ के मुख्य गेट के ताल बंद कर कहीं चले गए। स्वामी भगवान गिरी के पत्र के क्रम में डीएम दिव्या मित्तल ने तहसीलदार अलका सिंह को मौके पर भेज कर गेट का ताला खुलवाने और रविंद्र गिरी को महंत का अधिकार दिलाने का निर्देश दिया था। तहसीलदार अलका सिंह की मौजूदगी में भी महंत अभयानंद गिरी के समर्थकों ने गेट नहीं खोलने दिया।
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मामला बिगड़ता देख स्वामी भगवान गिरी दो दिन पहले प्रयागराज से देवरिया आए। प्रशासन को पत्र देकर स्वयं महंत के पद दायित्व के निर्वहन की बात कही। उसके बाद अपने साथ रविंद्र गिरी को लेकर मठ पर पहुंचे। उनके आने की जानकारी होते ही भारी संख्या में लोग उनका फूल माला से स्वागत किया । मुख्य गेट पर पहुंचते ही मंगलाचरण से महंत भगवान गिरी का स्वागत किया गया। मौके पर मौजूद एसडीएम दिशा श्रीवास्तव और तहसीलदार अलका सिंह ने स्वामी भगवान गिरी का पक्ष जाना। उन्होंने कहा कि अभयानंद गिरी को जिस अखाड़ा के तहत महंत पद पर रखा गया था उसी निर्वाणी अखाड़ा द्वारा उन्हें हटा दिया गया है। अब वह खुद सहयोगी के मदद से मठ का कार्य देखेंगे। दूसरा पक्ष अभयानंद गिरी या उनका कोई समर्थक मौजूद नहीं था।
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